महेश आलोक
जबकि ऐसा जरूरी लग रहा था मुझे
मैं उस समय ऐसा बहुत कुछ कर रहा था
जिसे करना उतना जरूरी नहीं था जितना जरूरी
लग रहा था
मैं अपनी आंखों में चंद्रमा के लिए घर बना रहा था
और चांदनी मेरे दरवाजे की दरारों से फिसल कर
बिस्तर की सिलवटों में मोहब्बत के बिंबों पर
नृत्य कर रही थी
मैं अपनी पीठ से धूप उतार रहा था
और सूरज अपनी पीठ से दिन को उतारते हुए
समुद्र में डूब रहा था
मैं सर्कस में बंदर की जिंदगी जी रहा था
शेर पिंजरे में बंद असहाय गुर्रा रहा था और उसके सामने
सर्कस का मदारी बंदर को नचा रहा था
बंदर खुश होकर नाच रहा था या भय से इसे कोई जानना नहीं चाहता था
सब केवल इस दृश्य का आनंद ले रहे थे कि शेर के सामने
बंदर नृत्य कर रहा है
मैं हर एक दृश्य में अपने को मरते हुए देख रहा था
और स्वर्ग वाले किस्से पर इस तरह विचार कर रहा था
कि अगर वह आकाश के अंतिम माले पर है
तो उसके ठीक नीचे वाले माले पर जहां कतई शोर-शराबा नहीं होगा
ईश्वर के साथ चाय पीना कैसा रहेगा
मजेदार बात यह है कि यह सब करते हुए मैं दुखी नहीं था
जबकि ऐसा लग रहा था कि मुझे
दुखी होना चाहिए था उस समय।
आस्था
मेरा बेटा एक खेल खेलता है
चिड़िया उड़ और मुझसे जीत जाता है
और मुझे लगता है
आस्था को चिड़िया की उड़ान के साथ देखना चाहिए
भले ही वह मेरी आस्था की हार के साथ
जुड़ा हो
या ऐसा भी कर सकते हैं
कि उड़ान की मुस्कुराहट में चिड़िया को आस्था के साथ
संवाद करते हुए देखते हैं
अब यहां दिक्कत यह है कि लिखना पड़ रहा है
कि बहेलिए की आस्था उसकी कल्पना में
चिड़िया की मृत्यु के साथ
संवाद कर रही है
या ऐसा कुछ करने का मन न करे
तो नींद में चले जाना चाहिए और आस्था को पुरोहितों के साथ
गप्पें मारने के सपने देखना चाहिए
यह काम देवगण के साथ भी किया जा सकता है
वैसे देवगण के साथ आस्था वाले खेल खेलने का
अलग ही मजा है
अगर शासकों वाले विचार विनिमय में आवाजाही करें
तो एक विचार यह भी निकल कर आता है कि
आस्था को हथियार बना कर हत्या भी की जा सकती है
अब तो इसके प्रमाण हर गली नुक्कड़ पर दिखाई देते हैं
मैं तो रात-विरात आज भी उस बूढ़े बरगद के रोने की आवाज सुनता हूं
जिसकी गवाही न्यायालय में
कोई मायने नहीं रखती
तो मित्रो, लब्बोलुआब यह कि
आस्था की मुस्कुराहट के कई मायने हैं
और इस भ्रम में तो कतई नहीं रहना चाहिए कि
सभी तरह की मुस्कुराहटों की भाषा
एक होती है।
मित्रता
वह मुझे पहनती है कपड़े पर छपे
फूलों की तरह
उसे खुशबू की जगह फूलों की सुंदरता
अच्छी लगती है
और बादल के एक टुकड़े की तरह तैरती है
मेरे बदन के आसपास
उसे बरसना अच्छा नहीं लगता
मैं उसे नदी की तरह पहनता हूं
और उतार देता हूं बहने के लिए
हम दोनों मित्रता को
ऐसे ही देखते हैं।
