डॉ. वरुण वीर
रशियन एकेडमी ऑफ साइंस मास्को द्वारा आयोजित योग विषय को लेकर अपने वक्तव्य के दौरान मैंने अनुभव किया कि कठोर स्वभाव का समझे जाने वाला और अपने चारों ओर बड़ी वैचारिक दीवार रखने वाला रूस आज बिल्कुल बदल चुका है। योग के प्रति जनसामान्य में ही नहीं, बल्कि वहां के बुद्धिजीवी वर्ग ने भी योग को अपने जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है। मास्को शहर में लगभग सत्तर योग केंद्र कार्यरत हैं। ये योग संस्कृति के प्रचार के साथ-साथ योग के व्यवसाय को फैला कर हजारों नागरिको को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। मैंने जो भी रूस के विषय में सुना या समझा था, आज मुझे यह देख कर आश्चर्य हुआ कि अमेरिकी और यूरोपीय देशों की तरह रूसी भी खुले विचारों को अपने जीवन में स्थान दे रहे हैं। एक समय में गरीबी और अनेक बंधनों में घिरा रूस आज स्वतंत्र विचारों के साथ विश्व में सामरिक ही नहीं, व्यावसायिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भविष्य में विश्व का नेतृत्व करने का साहस लिए दिखता है। रूस ने योग को अपना कर विश्व में अपनी छवि को सकारात्मक को संतुलित बनाया है।
रेड स्क्वायर के सामने खड़े होकर अगर चारों ओर आप अपनी दृष्टि घुमाएं तो एक ओर कई सौ वर्ष पुराना चर्च, जारशाही का राजमहल, उसी के सामने अत्यंत महेंगे आधुनिक पांच सितारा होटल, विश्व के सभी बड़े ब्रांड के अत्याधुनिक महंगे शोरूम और मॉल हैं। यह नजारा अपने आप में अद्भुत होने के साथ-साथ अविश्वसनीय लगता रहा। साथ ही वहां अनेक शाकाहारी रेस्तरां देखने को मिले। जो देश शराब और मांस के बिना अपना भोजन अधूरा मानता था, आज योग के प्रभाव में शाकाहारी होता दिखाई दे रहा है। हम भारतीयों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए कि योग के कारण हमारी सकारात्मक, विनम्र और स्वतंत्र विचारों वाली पहचान विश्व में स्थापित हो रही है।
योग की विभिन्न शैलियां और उनकी उपयोगिता स्पष्ट रूप से मास्को में देखने को मिलीं। योग को लेकर अनेक प्रकार के सेमिनार तथा समय-समय पर समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में योग का छाया रहना आम बात है। मेरे लिए आश्चर्यजनक बात यह थी कि अकादमिक स्तर पर योग को सुनने और अपनाने वाले बुद्धिजीवियों में भी उत्साह था। योग एक विज्ञान है, जो प्राण, मन तथा आत्मा के स्तर पर कैसे कार्य करता है, यह समझने में भी वहां के बुद्धिजीवी वर्ग ने जिज्ञासा दिखाई। रूस का यह खुलापन आने वाले समय में संपूर्ण विश्व को अपनी ओर आकर्षित करेगा।
विश्व की महाशक्ति रूस यूरोप से लेकर एशिया तक होने के कारण लगभग समूचे विश्व से जुड़ा हुआ है। मास्को में लगभग सत्तर से अधिक स्थानों पर योग की नियमित कक्षाएं होती हैं, जिनमें हजारों लोग प्रतिदिन योगासन करते हैं। मास्को का वातावरण ठंडा होने के कारण हॉट योग बड़ा प्रसिद्ध है। यह योग की कक्षा 38 डिग्री सेल्सियस पर कराई जाती है, ताकि अधिक से अधिक पसीना निकले और शरीर में लचीलापन आए। वहीं कुलयोग, जगन्नाथ, मॉस्को योग सेंटर, शिवानंद योग, पॉवर योग आदि के साथ-साथ इस्कॉन हरे कृष्णा हरे रामा सेंटर के लोग जगह-जगह दिख जाते हैं, जो कि सारे रूसी हैं।
रूस ने शरीर के स्तर पर विश्व की अन्य धाराओं को अपनाने में कोई संकोच नहीं किया है। अगर शरीर के स्तर से ऊपर उठ कर आध्यात्मिकता के स्तर पर रूस योग को अपनाता है, तो सकारात्मक दृष्टि से बहुत बड़े परिवर्तन की आशा की जा सकती है। यह आध्यात्मिकता चाहे चर्च के आधार पर ही क्यों न हो। सामरिक रूप से मजबूत रूस आर्थिक स्तर पर भी मजबूत हो रहा है। अगर इसमें आध्यात्मिक स्तर को भी जोड़ दिया जाए तो यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भविष्य में रूस विश्व का नेतृत्व करने में अग्रणी होगा।
भारत को छोड़ कर जिसने भी योग और योग बुद्धि को अपनाया, उस समाज और राष्ट्र का उत्थान ही हुआ है। आज हमारे भारतवर्ष का दुर्भाग्य यह है कि योग हमारी देन तो है, लेकिन योग के किसी भी नियम या अंग में हम पूर्णता से लिप्त नहीं हो पा रहे हैं।
सत्तर के दशक में रूस साम्यवादी विचारधारा से सराबोर था। एक प्रोफेसर ने बताया कि जब रूस में साम्यवाद था तब भी उन्होंने दो साल तक चुपचाप योग किया था। हालांकि उस समय योग जैसा कुछ भी करना संभव नहीं था। ऐसा नहीं कहा जा सकता कि योग के कारण रूस में बड़ा परिवर्तन आया है, लेकिन योग को खुल कर अपनाने में रूस की छवि में बड़ा परिवर्तन जरूर आया है।
मुख्य रूप से वहां की नौजवान पीढ़ी योग के प्रति आकर्षित है तथा नियमित रूप से अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योगासन को प्रतिदिन और साप्ताहिक स्तर पर अपना रही है। योग शिक्षक बनाने के अनेक प्रशिक्षण समय-समय पर अनेक जगह देखने को मिलते हैं।
मन को नियंत्रित करने के कुछ प्राणायाम और ध्यान की क्रिया साइंस ऑफ एकेडमी के प्रोफेसर के साथ करने में मेरा बड़ा ही अच्छा अनुभव रहा। अनुलोम विलोम और कुंभक प्राणायाम मन को तुरंत शांत और स्थिर करते हैं। उसके बाद ध्यान की क्रिया में कमर को सीधा और आंखें बंद करके मन में आने वाले विचारों को द्रष्टा भाव से देखने की क्रिया और कल्पना करना कि मेरी बार्इं तरफ एक बॉक्स है, जो भी विचार भूतकाल से आएगा उसे उस बॉक्स में रख देना तथा दाएं ओर एक बॉक्स है, जो भी विचार भविष्य से आएगा उसे दाएं बॉक्स में रख देना। एक बॉक्स मेरे सामने है, जो विचार वर्तमान से आएगा उसे सामने वाले बॉक्स में रख देना है। कुछ समय तक यह क्रिया करने से विचारों का आना अत्यंत धीमा हो जाता है। अच्छे अभ्यास के बाद विचारों का आना लगभग बंद-सा ही हो जाता है। यहीं से शून्य की स्थिति बनने लगती है। सभी प्रोफेसर ने इस क्रिया को बड़े ध्यान से किया और इसका लाभ उठाया। योग की अनेक शैलियां जैसे हठयोग, आयंगर योग, शिवानंद योग, हॉट योग, प्राण योग तथा पावर योग आदि मॉस्को में देखने को मिलते हैं। आईसीसीआर ने भी योग को प्रचारित-प्रसारित करने में अहम योगदान दिया है।
जबसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाया जाने लगा है, तभी से और बड़े पैमाने पर आईसीसीआर ने योग के क्षेत्र को फैलाया है। प्रत्येक देश में भारत से योग शिक्षक को दो दो वर्ष के लिए विदेशों में भेज कर योग की जड़ों को मजबूत करने का कार्य किया है। रूस से अलग हुए सभी देशों में भी योग ने स्थान ले लिया है। इसका यही कारण था कि आज भी वह देश कहीं-न-कहीं रूस का अनुसरण करते हैं और उसमें योग के बढ़ते कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके महत्त्व को दर्शाते हैं। आज का रूस विश्व में अपने खुलेपन के कारण आकर्षण का केंद्र बन रहा है। समूचे विश्व के सैलानियों के साथ-साथ भारतीय भी बड़ी संख्या में वहां अपने आप को पहले से और अधिक सहज महसूस करते हैं। शाकाहार और योग भारतीयों के लिए सदैव आकर्षण तथा सहजता से भरपूर रहा है। योग के कारण आने वाला समय भारत तथा रूसी मैत्री को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।
