प्रयाग शुक्ल

तितली आई

तितली आई उड़ती एक
इधर-उधर को मुड़ती एक
फूलों से जा जुड़ती एक
तितली आई उड़ती एक।

पंख पसारे आई है
कितनी सजी सजाई है।
वहां हवा में तैर रही
सबके मन को भाई है।

एक गिलहरी

दौड़ी आई एक गिलहरी
अभी घास पर जाकर ठहरी।
इधर घूमती उधर घूमती
जाने क्या वह ढूंढ़ रही है।
कुछ कुछ काली कुछ कुछ भूरी।

दौड़ी आई एक गिलहरी।
अब सूखे पत्तों पर दौड़ी।
चढ़ी पेड़ पर
फिर वह उतरी।
नाप रही है कितनी दूरी!

शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

आलम / आलिम
ये दोनों अरबी भाषा के शब्द हैं, पर हिंदी में घुल-मिल गए हैं। आलम का अर्थ होता है संसार। इसके अलावा इसका प्रयोग भीड़ के रूप में भी होता है। जबकि आलिम का अर्थ होता है विद्वान, पंडित।

आवरा / आवारा
हिंदी में आवरा शब्द का प्रयोग पराया, विमुख, विपरीत, मैला-कुचैला के अर्थ में होता है। जबकि आवारा शब्द से तो आप सब परिचित हैं। आवारा यानी बेवजह इधर-उधर घूमने वाला। आवारा पशुओं से तो आए दिन पाला पड़ता होगा। इसके अलावा निठल्ला, बदमाश, लुच्चा आदि के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता है।