अशोक अंजुम
मौसम का रिमोट
मौसम यदि ऐसा रिमोट हो हम पर
हो काबू अपना मौसम पर!
हम जब चाहें धूप निकालें
हम जब चाहें बादल छाएं,
हम जब चाहें बूंदें बरसें
शीतल-शीतल हवा चलाएं,
तपते रेगिस्तान में भर-भर
बर्फ गिराएं रेत गरम पर!
यदि ऐसा रिमोट हो हम पर
हो काबू अपना मौसम पर!
सर्दी में ना थर-थर कांपें
गरमी में ना बरसें शोले,
रामू काका के खेतों को
नष्ट करें ना गिर कर ओले,
बिजली कड़के अगर जोर से
रोक लगाएं बड़म-बड़म पर!
यदि ऐसा रिमोट हो हम पर
हो काबू अपना मौसम पर!
बाढ़ न आए, पड़े न सूखा
तूफानों पर करें नियंत्रण,
चारों तरफ रहे खुशहाली
खिल जाए धरती का कण-कण,
मनमानी ना हो मौसम की
रोक लगे हर जोर-जुलम पर!
यदि ऐसा रिमोट हो हम पर
हो काबू अपना मौसम पर!
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
दोना / धोना
पत्ते से बना कटोरीनुमा पात्र, जिसमें दुकानों पर मिठाई, सब्जी वगैरह परोसी जाती है, उसे दोना कहते हैं। जबकि धोना धुलाई करने की क्रिया को कहते हैं। जैसे बर्तन धोना, कपड़े धोना वगैरह।
नमकहलाल / नमकहराम
अपने मालिक के प्रति निष्ठावान, उसकी ईमानदारीपूर्वक सेवा करने वाले को नमकहलाल कहते हैं। नमकहलाल यानी स्वामिभक्त। पर इसका विलोम होता है नमकहराम। किसी का दिया हुआ अन्न खाकर उसके प्रति द्रोह करने वाला। कृतघ्न।
