मंजरी शुक्ला

अप्पू हाथी पूरे जंगल में अपना स्टूल लिए घूम रहा था, पर मोंटू बंदर उसे कहीं नजर नहीं आ रहा था। थक-हार कर अप्पू एक आम के पेड़ के तने से टिक कर बैठ गया।

अप्पू के बैठते ही पेड़ इतनी जोर से हिला कि हीरू तोते के हाथ से पका हुआ आम छूट कर सीधे अप्पू के सिर पर जा गिरा। पिलपिले आम का गूदा अप्पू के चेहरे पर लग गया।
हीरू तोता डर कर जैसे ही उड़ने को हुआ, अप्पू बोला-‘अरे हीरू, तुमने कहीं मोंटू को देखा है क्या?’
हीरू बोला- ‘आज सुबह उसने मेरी बहुत सुंदर पेंटिंग बनाई थी। उसके बाद तो वह नहीं दिखा।’
‘मुझे भी अपनी पेंटिंग बनवानी है।’ अप्पू रुआंसा होते हुए बोला।

हीरू अप्पू की बात सुन कर दुखी हो गया। वह जानता था कि मोंटू अप्पू की पेंटिंग नहीं बनाना चाहता है।
हीरू कुछ कहता, तब तक अप्पू बोला- ‘अब मैं क्या करूं? अगर मैं इतना मोटा हूं तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है और मोंटू के वे आठ स्टूल मैंने जानबूझ कर तो नहीं तोड़े!’
हीरू को अप्पू की बात सुन कर बहुत हंसी आई। तभी उसकी नजर स्टूल की तरफ गई और वह बोला- ‘यह स्टूल लेकर क्यों घूम रहे हो?’
‘पापा ने बहुत मजबूत स्टूल बना कर दिया है और कहा है कि इसी पर बैठ कर पेंटिंग बनवाना। यह टूटेगा नहीं।’
हीरू मुस्करा दिया और बोला- ‘चलो, मोंटू के पास चलते हैं।’
‘तुम्हें पता है कि वह कहां मिलेगा?’ अप्पू अपना स्टूल पकड़ कर खड़ा होते हुए बोला।
‘हां… पता है।’ कहते हुए हीरू उड़ चला।

हीरू धीरे धीरे उड़ रहा था और उसके पीछे अप्पू अपना स्टूल उठा कर हांफते हुए भागा जा रहा था।
मन ही मन में उसने अपने लिए सारे रंग भी सोच लिए थे। ‘लाल रंग की नेकर, पीले रंग की शर्ट और काले गॉगल्स में कितना स्मार्ट लगूंगा!’
कुछ ही देर बाद अप्पू और हीरू नदी के किनारे पहुंच गए। अप्पू ने स्टूल जमीन पर रखते हुए कहा- ‘पर मुझे अभी तैरने का मन नहीं है। मुझे तो अपनी पेंटिंग बनवानी है।’
हीरू हंसते हुए बोला- ‘अरे, उस तरफ तो देखो, वहां मोंटू बैठा हुआ है।’
अप्पू ने तुरंत अपना स्टूल उठाया और मोंटू की ओर दौड़ पड़ा।

मोंटू, धम धम की आवाज सुन कर पीछे पलट कर देखने लगा। अप्पू को देखते ही मोंटू भागने को हुआ, तभी हीरू चिल्लाया- ‘मोंटू, भागो मत, अप्पू तुम्हारे स्टूल पर नहीं बैठेगा। देखो, वह अपना स्टूल साथ लेकर आया है।’
मोंटू ने आश्चर्य से अप्पू की ओर देखा, जो हाथ में स्टूल पकड़े हांफ रहा था। मोंटू का दिल भर आया। उसने अप्पू को अपने पास आने का इशारा किया। अप्पू बहुत खुश हो गया और मोंटू के सामने स्टूल पर बैठ गया।
मोंटू अपने पेंट और ब्रश पकड़ते हुए बोला- ‘अब तुम बिलकुल हिलना-डुलना नहीं।’
‘मैं इतना शांत बैठूंगा कि कोई बता ही नहीं पाएगा कि मेरी मूर्ति है या मैं हूं, बस मेरी लाल नेकर, पीली शर्ट और काले गॉगल्स जरूर बना देना।’
अप्पू को इतना खुश देख कर हीरू और मोंटू हंस पड़े। अप्पू बिना हिले डुले चुपचाप बैठ गया।

हीरू जानता था कि अप्पू को ‘फन पार्क’ जाने का बहुत मन है और इसीलिए वह मोंटू से अपनी पेंटिंग बनवाने को उत्सुक है, क्योंकि जंगल के राजा शेर सिंह ने एलान किया था कि जिसकी भी पेंटिंग को सबसे ज्यादा लोग पसंद करेंगे, वह मोंटू के साथ मुफ्त में ‘फन पार्क’ जाकर सारी राइड्स का दिन भर आनंद सकता है।
मोंटू ने पेंटिंग बनानी शुरू की। पर यह क्या! अभी आधी पेंटिंग भी नहीं बन पाई थी कि चर्र चर्र की आवाजें आने लगीं। जब तक कोई कुछ समझ पाता, स्टूल टूट गया और मोंटू लुढ़कता हुआ सीधा पानी के अंदर पहुंच गया।
अप्पू इतना दुखी हुआ कि वह आंखें बंद करके चुपचाप बैठ गया। इतनी मुश्किल से दिन-रात एक करके पापा ने स्टूल बनवाया था। पापा के लिए तो दुख लग ही रहा था और अब उसके कारण मोंटू की भी सारी मेहनत बेकार हो गई थी। ‘अब मैं कभी कोई पेंटिंग नहीं बनवाऊंगा। पूरे जंगल में अगर सिर्फ मेरी पेंटिंग नहीं बनेगी तो कौन-सा फर्क पड़ जाएगा।’ सोचते हुए अप्पू आंख बंद किए हुए नदी के अंदर ही बैठा रहा। हीरू भी दुखी होता हुआ वहां से उड़ गया।
दिन बीतते गए। आज पेंटिंग प्रतियोगिता का परिणाम आना था। अप्पू हीरू से बोला-‘मेरी पेंटिंग नहीं बन पाई तो क्या हुआ, बाकी सब दोस्तों की तो पेंटिंग बनी है। उन्हें ही देखने चलते हैं।’
हीरू यह सुन कर मुस्करा दिया और अप्पू के साथ पेंटिंग देखने चल दिया। हॉल में पहुंचते ही अप्पू और हीरू आश्चर्यचकित रह गए। सभी पेंटिंग करीने से दीवार पर लगी थीं, पर सारे पशु-पक्षी सिर्फ एक पेंटिंग के आगे खड़े थे। तभी निफ्टी हिरन अप्पू से बोला- ‘वो जो सामने पेंटिंग लगी है न, जिसके आगे सब लोग खड़े हैं, वही पेंटिंग फर्स्ट आई है।’
अप्पू बोला- ‘चलो देखते हैं, किसकी पेंटिंग है। अब तो मोंटू के साथ उसको भी ‘फन पार्क’ जाने का मौका मिलेगा। निफ्टी हंस दिया। हीरू तो सबके ऊपर से उड़ कर पेंटिंग के पास पहुंच गया। अप्पू भीड़ में से रास्ता बनाता हुआ जब पेंटिंग के पास पहुंचा, तो खुशी और आश्चर्य से उसकी चीख निकल गई। बड़ी सी पेंटिंग में वह पीली शर्ट और काले गॉगल्स पहने नदी के अंदर बैठा था।