फहीम अहमद

ऐसा होता क्यों

अम्मा, जरा मुझे समझाओ
ऐसा होता क्यों?

तितली जैसे पंख लगाएं
हम सब झूमें, नाचें, गाएं
मिलजुल सारे हंसें-हंसाएं
पर महरी का बेटा कलुवा
हरदम रोता क्यों?

खाता रूखा-सूखा चोकर
जगह-जगह पर लगती ठोकर
थके बहुत बोझा ढो-ढोकर
फिर भी गधा बली चाचा का
बोझा ढोता क्यों?

पेड़ हमें क्या-क्या न देते
पर बदले में कुछ न लेते
अपने गुण से बने चहेते
दादा ने जो पेड़ लगाए
काटे पोता क्यों?

शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

अगम / आगम
ऐसी जगह जहां तक पहुंचना कठिन हो, जिसकी थाह न लगाई जा सके उसे अगम कहते हैं। अगम का पर्याय है दुर्गम। जबकि आगम शब्द का प्रयोग आने, आगमन के अर्थ में होता है। आगम यानी भविष्य। इसके अलावा वेद-पुराण-धर्मग्रंथों को भी आगम कहा जाता है।

कुंडा / कूंड़ा
दरवाजा बंद करने के लिए जो सांकल या लकड़ी का कुंदा इस्तेमाल होता है, उसे कुंडा कहते हैं। जबकि कूंड़ा एक ऐसे गहरे बड़े बर्तन को कहते हैं, जो मिट्टी या लकड़ी का बना होता है।