हाल ही में राष्ट्रपति ने बारह साल की उम्र तक की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों के खिलाफ फांसी की सजा दिए जाने के कानून पर दस्तखत किए हैं। हालांकि इसके आलोचक कह रहे हैं कि सिर्फ बारह साल की बच्चियों तक यह कानून क्यों लागू हो। बच्चियों के प्रति इस तरह के अपराध संगीन माने जाने चाहिए, लेकिन दूसरी महिलाएं, जो बड़ी संख्या में इस तरह के अपराधों का शिकार होती हैं, उनके अपराधियों को भी इसी तरह की कठोर सजा मिलनी चाहिए। हालांकि जिन देशों में इस तरह के कठोर कानून लागू हैं, वहां भी इस तरह के अपराध बड़ी संख्या में होते हैं। कहा यह भी जाता है कि लोगों की मानसिकता बदलनी चाहिए तभी ऐसे अपराध रुक सकते हैं। कानून अगर डर पैदा करने के लिए होते हैं, तो कुछ समय तक तो लोग उनसे डरते हैं, मगर यह डर अपराधों में शायद ही कोई कमी लाता है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि डरा हुआ आदमी और अधिक अपराध करता है।
इसके अलावा अपने देश में इन दिनों कठोर कानूनों की आड़ में उनका दुरुपयोग भी बढ़ चला है। हाल ही में नोएडा में पुलिस की मिलीभगत से एक ऐसा गिरोह काम कर रहा था। इस गिरोह की लड़कियां गाड़ी चलाते अकेले पुरुषों से लिफ्ट लेती थीं, फिर कुछ दूरी पर खड़ी पुलिस की गाड़ी को देख कर गाड़ी रुकवा कर जोर-जोर से शोर मचाती थीं और दुष्कर्म का आरोप लगाती थीं। पुलिस इन लोगों को पकड़ती थी, फिर ब्लैकमेल करके बड़ी रकम ऐंठ ली जाती थी। जब इस तरह की शिकायतें आर्इं तो इस गिरोह के साथ पुलिस के लोग भी पकड़े गए।
हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली में भी ऐसे बहुत से गिरोह पकड़े गए हैं। एक तरफ हैवानों की शिकार होती नन्ही बच्चियां हैं, महिलाएं हैं, जिन्हें न्याय तो मिलता ही नहीं, कई बार जान से भी हाथ धोना पड़ता है, दूसरी तरफ कानूनों को हथियार बना कर तेजी से फलते-फूलते ब्लैकमेलिंग करने वाले गिरोह हैं। वे महिलाएं जो कानूनों का दुरुपयोग करती हैं वे उन सताई गई बच्चियों, महिलाओं का न केवल अपमान करती हैं, बल्कि कानून के प्रति अविश्वास और संदेह का माहौल भी बनाती हैं। उनके अधिकार को छीनती हैं। ऐसी महिलाओं को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए, जिससे कि महिलाओं की रक्षा के लिए बनाए गए कानून इनके चंगुल से मुक्त हो सकें। और जो महिलाएं इनका दुरुपयोग करने की इच्छा रखती हों, उनके लिए सबक भी हो।
तो सवाल यही है कि क्या करें। हम अपनी बच्चियों, महिलाओं को आए दिन होने वाले जघन्य अपराधों से कैसे बचाएं। हालत कहां जा पहुंची है कि कि भोपाल में एक दस साल की बच्ची की हत्या करने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया। वह समाज जो इस बात पर इतराता है कि वह बच्चियों को देवी मानता है वह आखिर इतनी छोटी बच्चियों के प्रति इतना निर्मम कैसे होता है, कैसे हो सकता है।
