मानस मनोहर
नारियल के लड््डू
नारियल के लड्डू बनाना सबसे आसान है। इसके लिए ढाई सौ ग्राम नारियल का चूरा लें। यह बाजार में आसानी से मिल जाता है। अगर न मिले, तो थोड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। कद्दूकस पर सूखे नारियल को बारीक घिस लें। ढाई सौ ग्राम नारियल के चूरे के लिए सौ ग्राम चीनी पर्याप्त होती है। चीनी को मिक्सर में पीस लें या बाजार से बूरा खरीद लें। इसके अलावा सौ ग्राम मावा भी ले लें। चूंकि मावे में भी मिलावट का डर रहता है, इसलिए इतनी ही मात्रा में मिल्कमेड ले सकते हैं। इसके अलावा करीब सौ ग्राम काजू और बादाम को बारीक काट कर अलग रख लें। अब मौसम कुछ ठंडा होने लगा है, इसलिए तिल का सेवन किया जा सकता है। अगर आपको पसंद हो तो पांच-छह ग्राम सफेद तिल के दाने भी इसमें डाल सकते हैं। नारियल का थोड़ा-सा चूरा भी अलग रखें, ताकि वह लड्डू पर लपेटने के काम आए।
अब एक कड़ाही गरम करें। आंच हल्की रखें। कड़ाही में पहले नारियल का चूरा डालें और उसे गरम करें। जब उससे नारियल की खुशबू आने लगे तो उसमें कटे हुए मेवे और पिसी चीनी डाल कर दो मिनट के लिए चलाएं। फिर मावा या मिल्कमेड डाल कर ठीक से चलाते हुए मिला लें। भाप उठने लगे तो आंच बंद कर दें।
अब इस मिश्रण की छोटी-छोटी लोइयां लेकर लड्डू का आकार दें। लड्डुओं को अलग रखे नारियल के चूरे में लपेटते जाएं और एक अलग बर्तन में रख कर ठंडा होने दें। चाहें तो इन्हें कड़ा होने के लिए फ्रिज में भी रख सकते हैं।
इस तरह कम चीनी वाला आसानी से तैयार हो गया नारियल का गुणकारी लड्डू।
मालपुआ
लपुआ बनाना भी बहुत आसान है। यह परंपरागत देसी मिठाई है, जो देश के लगभग हर हिस्से में खाई जाती है। इसमें चीनी का इस्तेमाल अधिक होता है, इसलिए यह गरिष्ठ मिठाई है। जिन्हें गरिष्ठ भोजन से परहेज है, वे इसे ज्यादा न खाएं।मालपुआ बनाने के लिए ढाई सौ ग्राम मैदा लें। करीब सौ ग्राम चीनी को पानी में घोलें और मैदे में मिला कर गाढ़ा घोल तैयार करें। इस घोल को कम से कम चार घंटे के लिए रख दें। रात भर के लिए भी रख सकते हैं। पर ध्यान रखें कि फ्रिज में नहीं रखना है इसे। अब एक सपाट पेंदे वाली कड़ाही में कम से कम आधा लीटर तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए तो कलछी से थोड़ा-थोड़ा घोल डालें, ताकि चपटे आकार के पतले पुए बन सकें। ज्यादा मोटे पुए बनेंगे, तो कच्चे रह जाएंगे। इस तरह आसानी से पुए तैयार हो जाते हैं। अब बारी आती है, पुए की चाशनी की। मालपुए की चाशनी दो तरह से बनाई जाती है। राजस्थान आदि में मालपुओं को चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है, जैसे जलेबी को। मगर पश्चिम बंगाल में इसे दूध के गाढ़े घोल यानी रबड़ी में भिगोया जाता है।
चीनी की चाशनी तैयार करने के लिए पाव भर चीनी को पानी में घोल लें और तब तक गरम करते रहें चब तक कि वह एक तार गाढ़ा न हो जाए। इसकी जांच का तरीका है कि चाशनी की एक बूंद उंगली पर रखें और अंगूठे से छूते हुए देखें कि अंगुली और अंगूठे को अलग करने पर उनके बीच चीनी का तार-सा बन रहा है या नहीं। जब मालपुए बन जाएं तो इन्हें इस चाशनी में डाल दें। थोड़ी देर डूबा रहने के बाद इन्हें प्लेट में निकाल लें। अब इनके ऊपर बारीक कटे काजू और बादाम बुरक दें और खाने को परोसें। राबड़ी बनाने के लिए दूध को गरम करते हुए गाढ़ा करें। यह समय लेने वाला काम है। इसलिए दूध को अधिक गाढ़ा करने का आसान तरीका है कि जब दूध गरम होते-होते आधा रह जाए तो उसमें आधा डिब्बा मिल्कमेड मिला दें और थोड़ी देर चलाएं। दूध गाढ़ा हो जाए तो उसे मालपुओं के ऊपर डालें और उपर से मेवे बुरक कर फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। इस तरह कैलोरी तो बढ़ती है, पर चीनी कम रहती है। रबड़ी वाले मालपुए ठंडा खाने में भी लजीज लगते हैं।

