मानस मनोहर

छाछ के साथ सहजन
जिस तरह छाछ को गुणकारी माना गया है, उसी तरह सहजन को भी अनेक विटामिनों की खान कहा जाता है। खासकर महिलाओं के लिए सहजन का उपयोग इसलिए अधिक करने को कहा जाता है कि इससे उन्हें भरपूर मात्रा में कैल्शियम और आयरन मिल जाता है। यह मौसम सहजन में फल आने का है। थोड़े दिन बाद बाजार में सहजन की नरम फलियां आनी शुरू हो जाएंगी। वैसे सहजन बारहों महीने बाजार में उपलब्ध रहता है।
अगर आपने सहजन की नरम फलियां ली हैं, तो चार लोगों के खाने के लिए दस-बारह फलियां लें। अगर कड़ी, मोटी और लंबी फलियां हैं तो तीन-चार काफी होंगी। अगर कड़ी फलियां हैं तो चाकू से छील कर सावधानी से उनका छिलका उतार लें। फलियों को दो-दो इंच के टुकड़ों में काट लें।
एक भगोने में एक चम्मच नमक मिला पानी गरम करें। पानी उबलने लगे, तो उसमें सहजन की फलियां डाल दें। फलियों को नरम होने तक पकाएं। जब वे पक जाएं तो पानी में छान कर अलग रख लें।
अब इसकी ग्रेवी बनाने के लिए एक कड़ाही में करीब एक कप बेसन को हल्की आंच पर चलाते हुए सुनहरा होने तक भून लें। बेसन को ठंडा होने दें।
ग्रेवी बनाने के लिए एक मध्यम आकार का प्याज और इतने ही बड़े टमाटर को बारीक काट लें। अगर इन दोनों चीजों को कद्दूकस कर लें, तो बेहतर होगा। लहसुन की दो कलियां और आधा इंच अदरक कूट लें।
अब भुने हुए बेसन में आधा लीटर छाछ धीरे-धीरे डालते हुए सावधानी से फेंट लें। इसी में आधा लाल मिर्च पाउडर और एक छोटा चम्मच सब्जी मसाला डालें और फेंट लें।
एक कड़ाही में दो चम्मच सरसों का तेल गरम करें। उसमें जीरा, मेथी दाना, सरसों, सौंफ, आधा इंच दालचीनी और अजवाइन का तड़का दें। ऊपर से हींग, कढ़ी पत्ता और दो लाल साबुत मिर्चें भी तोड़ कर डाल दें। तड़का तैयार हो जाए तो पहले कुटा हुआ लहसुन और अदरक डालें फरि प्याज डाल कर चलाते हुए नरम होने तक पकाएं। फिर टमाटर डाल कर तेल छोड़ने तक पकाएं। अब चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर डालें और फिर सहजन की फलियां डाल कर एक मिनट चलाएं। फिर फेंटा हुआ बेसन डालें और चलाते हुए पकाएं, जैसे कढ़ी पकाते हैं। जब ग्रेवी गाढ़ी हो जाए, तो आंच से उतार लें। स्वाद के अनुसार नमक डालें।
इस सब्जी को गरमा-गरम खाएं, तो इसकी खुशबू और जायका बना रहता है। इसे रोटी या चावल के साथ खाने पर अच्छा लगता है।

छाछ की रसम
रसम तो आप घर में बनाते ही होंगे। यह अच्छा पाचक होता है। रसम पाउडर आसानी से बाजार में उपलब्ध होता है। अगर न मिले तो बराबर-बराबर मात्रा में तुअर की दाल, साबुत धनिया, साबुत लाल मिर्च और उसका आधा हिस्सा काली मिर्च, मेथी दाना और जीरा लेकर तवे पर महक उठने तक भून लें और फिर ठंडा करके सबको मसाले की तरह पीस लें। हालांकि इसमें से दो चम्मच पाउडर ही रसम के लिए काफी होगा। बाकी को एक शीशी में बंद करके रख लें।
रसम बनाने के लिए दो मध्यम आकार के टमाटर लेकर कद्दूकस कर लें। इसमें डालने के लिए दो-तीन लहसुन की कलियां और आधा इंच अदरक छील कर बारीक कूट लें।
अब एक कुकर में एक कप पानी डाल कर चौथाई कप या दो से तीन चम्मच तुअर दाल में नमक, हल्दी और हींग डाल कर तीन से चार सीटी आने तक पका लें। ध्यान रहे कि तुअर दाल पूरी तरह गल जानी चाहिए। मथानी या कलछी से मसल कर पतला कर लें।
एक कड़ाही में दो चम्मच सरसों तेल या नारियल का तेल गरम करें। उसमें राई, दो-तीन तोड़ी हुई साबुत लाल मिर्चे, चार-छह दाने काली मिर्च और कड़ी पत्ते का तड़का दें। फिर उसमें पहले लहसुन अदरक का पेस्ट डाल कर चलाएं, फिर कद्दूकस किया हुआ टमाटर डाल कर तेल छोड़ने तक चलाते हुए पका लें। अब आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, चौथाई चम्मच काली मिर्च पाउडर डालें और टमाटर को मसल कर बिल्कुल चिकना कर लें, ताकि वह पूरी तरह रसम में घुल सके।
अब इसमें आधा से एक लीटर छाछ डालें और आंच धीमी कर दें। चलाते हुए पकाएं। साथ ही उबली हुई तुअर दाल डालें और दो-तीन उबाल आने तक चलाते हुए पकाएं। जब भी छाछ को पकाएं, उसे लगातार चलाते रहना जरूरी है, वरना वह फट जाएगा। ऊपर से स्वाद के अनुसार नमक डालें।
रसम तैयार है। इसमें अगर चाहें तो एक बार फिर ऊपर से सरसों और साबुत लाल मिर्च का तड़का देना चाहें, तो दे सकते हैं। रसम को गरमा-गरम परोसें।