मानस मनोहर
कद्दू की खट्टी-मीठी सब्जी
द्दू यानी सीताफल। कुछ इलाकों में इसे पेठा, कोहड़ा और भिलिया भी कहा जाता है। अंगरेजी में इसे पंपकिन कहते हैं। कद्दू की सब्जी देख कर बहुत से लोग नाक-भौं सिकोड़ते हैं। खासकर शहरी और पित्जा-बर्गर खाने वाली युवा पीढ़ी इसे सब्जी मानती ही नहीं। मगर कद्दू सेहत की दृष्टि से बहुत गुणकारी है। पूड़ी-कचौड़ी के साथ कद्दू की सब्जी को पाचक माना जाता है। जिन्हें प्रोस्टेट की समस्या है, उन्हें कद्दू के बीज खाने का सुझाव दिया जाता है। यों भी कद्दू एक ऐसी सब्जी है, जो हर मौसम में और हर जगह बहुतायत में उपलब्ध होती है। कद्दू आमतौर पर दो तरह का होता है- एक लाल और दूसरा हरा। लाल कद्दू को लंबे समय तक घर में रखा जा सकता है। इसकी खट्टी-मीठी सब्जी पूड़ी-कचौड़ी के साथ बहुत अच्छी लगती है। इस बार हम लाल कद्दू के साथ आलू मिला कर सब्जी बनाएंगे।
विधि
लाल सीताफल का छिलका उतार लें। बीज वाले हिस्से को भी साफ कर लें और मध्यम आकार में काट लें। जितना कद्दू लिया है, उसकी चौथाई मात्रा आलू लें। जैसे एक किलो कद्दू बना रहे हैं, तो उसमें ढाई सौ ग्राम आलू की मात्रा रखें। आलू का भी छिलका उतार कर मध्यम आकार में काट लें।
अब एक कड़ाही या कुकर में तड़के के लिए तेल गरम करें। उसमें मेथी दाना, सौंफ, राई, साबुत धनिया, अजवाइन, हींग और साबुत लाल मिर्च का तड़का दें। तड़का तैयार हो जाए तो उसमें कटा हुआ कद्दू और आलू छौंक दें। थोड़ी देर चलाते हुए पकाएं। फिर उसमें चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच सब्जी मसाला और एक से डेढ़ चम्मच अमचूर या अनारदाना डालें और ठीक से मिला दें। इस सब्जी में मिठास लाने के लिए दो चम्मच गुड़ या एक चम्मच चीनी भी मिला लें। चौथाई गिलास पानी डाल कर धीमी आंच पर पकने दें। अगर कुकर में बना रहे हैं, तो दो सीटी आने तक पकाएं। कड़ाही में बना रहे हैं, तो कद्दू के गलने तक इंतजार करें। जब सब्जी पक जाए, तो चम्मच से चलाते हुए कद्दू को हलवा जैसा बना लें। अगर आपको टुकड़ों में रखना है, तो वैसे ही रहने दें। एक अलग बर्तन में निकालें और ऊपर से हरा धनिया पत्ता और कटी हरी मिर्च डाल कर परोसें।
कद्दू की बर्फी
द्दू का हलवा भी बनता है, पर इसकी बर्फी को लंबे समय तक घर में रख सकते हैं। खासकर गरमी के मौसम में, जब दूध से बनी मिठाइयां खाने से मना किया जाता है, कद्दू की बर्फी मिठाई का बेहतर विकल्प साबित होती है। यों कुछ लोग इसमें दूध का भी उपयोग करते हैं, पर बिना दूध के बनाएं, तो यह बर्फी अधिक समय तक रखी और खाई जा सकती है। कद्दू की बर्फी बनाने के लिए आप जितना कद्दू ले रहे हैं, उसकी चौथाई या फिर एक तिहाई मात्रा चीनी की रखें। चौथाई से कम मात्रा घी की रखें। इसे बनाना बहुत आसान है। इसके लिए हमेशा लाल पेठे का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सबसे पहले कद्दू का छिलका उतार कर उसे कद्दूकस कर लें। कद्दूकस करने से बचना चाहते हैं, तो कद्दू को बड़े टुकड़ों में काट लें और फिर एक भगोने में पानी गरम करें, उसमें एक छोटा टुकड़ा दालचीनी का डालें और फिर उस उबलते पानी में कद्दू के टुकड़ों को डाल कर नरम होने तक पका लें। फिर पानी से निकालें और उसे मसल कर पेस्ट जैसा बना लें। एक कड़ाही में घी गरम करें। उसमें कद्दूकस किए या उबाल कर मसले हुए कद्दू को डालें और धीमी आंच पर चलाते हुए पानी सूखने तक पकाएं। जब पानी लगभग सूख जाए, तो उसमें चीनी डालें और चलाते हुए सूखने तक पकाएं। जब पानी पूरी तरह सूख जाए तो उसमें थोड़ी-सी कुटी हुई हरी इलाइची डालें। एक अलग बर्तन में निकालें और मोटी परत बनाते हुए फैला दें। जब ठंडा हो जाए, तो उसे मनचाहे आकार में काट कर बर्फी बना लें। ऊपर से चादी का बरक चढ़ाएं और कद्दू की बर्फी का आनंद लें।
