रावेंद्रकुमार रवि

चांद घूमने आया
दोपहरी में चांद निकल कर
जब पूरब में आया!
उसके स्वागत में सूरज ने
किरणों को भिजवाया!

आंखें बंद किए लेटी थी
धूप सेंकती मुन्नी!
ओढ़ रखी थी उसने सुंदर
एक मखमली चुन्नी!
मुन्ना ज्यों ही आया छत पर
उसने उसे जगाया!
बोला- देखो नीलगगन में
चांद घूमने आया!

धरती घूमेगी पूरब को
पश्चिम वह जाएगा!
सूरज छुप जाएगा, लेकिन
चांद नजर आएगा!
कभी रात में चमके चंदा
दिन में कभी लुभाया!
ऐसा हो जाता है कैसे
पूरा समझ न आया!

इर्द-गिर्द धरती के घूमे
चांद, पुस्तिका कहती!
चक्कर काट रही सूरज का
अपनी प्यारी धरती!
स्वयं धुरी पर भी यह घूमे
कैसी इसकी माया?
खड़ा हुआ है अचल सूर्य जो
चल कर कहां समाया?

शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

टोडी / टोड़ी
नीच प्रकृति के, तुच्छ व्यक्ति को, जिसका कार्य और व्यवहार सामाजिक मूल्यों के विपरीत हो, स्वार्थ में लिप्त रहता हो, उसे टोडी कहते हैं। जबकि टोड़ी शास्त्रीय संगीत में प्रात: काल में गाई जाने वाली एक रागिनी का नाम है। जैसे गुर्जरी टोड़ी।

बगारना / बघारना
संस्कृत के विकिरण शब्द से बना है बगारना। इसका अर्थ होता है फैलाना, छितराना, बिखेरना। जबकि बघारना भोजन बनाने की वह प्रक्रिया है, जिसमें तेल में तड़का लगा कर किसी चीज को तलते हुए पकाया जाता है। जैसे सब्जी बघारना।