शिखरचंद जैन
अमेरिका के जंगली इलाके की एक बस्ती में रहती थी अंबक। वह कबीला प्रमुख की बेटी थी। अंबक विवाह योग्य हो चुकी थी। कबीले के दो लड़के उससे शादी करना चाहते थे। इन युवकों में से एक का नाम वासावा और दूसरे का नाम था ओकाना। अंबक वासावा को अपना जीवनसाथी बनाना चाहती थी, जबकि मुखिया ओकाना को अपना दामाद बनाना चाहता था। असल में वासावा एक मध्यवर्गीय युवक था और ओकाना कई खेतों का मालिक था। इसलिए वह ओकाना से अंबक की शादी करवाना चाहता था ताकि वह आरामदायक जीवन जी सके। मुखिया को पता था कि अंबक वासावा को चाहती है और वह अपनी फूल-सी कोमल बेटी का दिल भी नहीं दुखाना चाहता था। इसके लिए उसने एक ऐसी योजना बनाई कि ओकाना अपनी मेहनत और सूझबूझ के बल पर अंबक का दिल जीत ले। उसने एक प्रतियोगिता रखी। इसके तहत मुखिया ने सुदूर उत्तर में रहने वाले अपने मित्र, दूसरे कबीले के प्रमुख को संदेश भेजने के लिए दो संदेश तैयार किए। उसने दोनों युवकों को अलग-अलग लिफाफे देते हुए कहा, ‘तुम दोनों को अपनी पूरी सूझबूझ और ताकत से यह संदेश जल्दी से जल्दी मेरे मित्र तक पहुंचाना है। जो भी इस संदेश को जल्दी पहुंचा कर इसका जवाब लेकर सबसे पहले लौटेगा, उसी के साथ मैं अपनी बेटी का विवाह करूंगा।’
कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। हर ओर बर्फ जमी हुई थी। कोहरा इतना घना कि एक हाथ दूर खड़ा इंसान भी नजर न आए। यात्रा बेहद कठिन थी। लेकिन फिर भी दोनों युवक तैयार हो गए, क्योंकि दोनों ही अंबक से शादी करना चाहते थे। तीन दिन बाद कीई तारीख प्रतियोगिता के लिए तय कर दी गई। पर अंबक प्रतियोगिता की बात सुन कर घबरा गई। उसे डर लग रहा था कि वासावा अगर विफल हो गया तो उसे ओकाना से विवाह करना पड़ेगा। वह अकेली बैठ कर रोने लगी। रोते-रोते उसकी आंखें लग गर्इं। नींद में अंबक ने एक अजीब सपना देखा। उसने देखा कि उस रात जबर्दस्त बर्फबारी हुई है। पशु-पक्षियों की भगदड़ मची हुई है। ज्यादातर पशु-पक्षी अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों पर जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बार-बार बर्फ में धंस जाते हैं। वहीं बतखें बर्फ पर मजे से चल रही हैं, और सुरक्षित जगह पहुंच जाती हैं। सुबह अंबक जगी तो उसे रात वाला सपना अच्छी तरह याद था। वह मुंह-हाथ धोकर रोज की तरह अपने मकान के सामने आकार खड़ी हो गई और ताजा हवा खाते हुए पक्षियों को दाना डालने लगी। आचर्य की बात! आज अन्य पक्षियों के साथ दो बतखें भी खाने को आर्इं। अंबक की नजर उन बतखों के पैरों पड़ी। दूसरों को दिक्कत हो रही थी, जबकि बतख आराम से बर्फ पर चल रही थी। तब अंबक के दिमाग में एक विचार आया। उसने सोचा कि अगर इंसान के पैर भी बतखों जैसे हों तो वह भी बर्फ में आसानी से चल सकता है। अंबक ने वासावा के लिए बतख के पैरों जैसा कुछ बनाने की ठानी। उसने इधर-उधर नजरें दौड़ार्इं। उसे एक पेड़ की कुछ लचीली टहनियां मिल गर्इं, जिनका इस्तेमाल उसके पिता धनुष बनाने के लिए करते थे। फिर उसने घर में पड़ी रबड़ की मजबूत शीट ली, जिससे उसकी मां पानी भरने वाले बैग बनाया करती थीं। उससे लंबी पट्टियां काटी। लचीली टहनियों और रबड़ की शीट से उसने बेहद खास जूते बना डाले। अब वह बहुत उत्साहित थी।
प्रतियोगिता शुरू होने का दिन आ गया। वासावा उससे मिलने आया। अंबक ने उसे अपने सपने के बारे में बताया और फिर उसे वे जूते दिए, जो उसने खास उसके लिए बनाए थे। वासावा अपने प्रति अंबक के प्रेम और उसकी सूझबूझ पर हैरान था। वासावा और ओकामा दोनों एक निश्चित समय पर निकल पड़े। पहले दिन का सफर आसान था। उस दिन बर्फ की सतह कठोर थी। लेकिन दूसरे दिन फिर से बर्फबारी शुरू हो गई। नरम बर्फ में पैरों को जमा कर रखना मुश्किल हो गया। ओकाना शायद इस मौसम का अभ्यस्त था। वह तो तेजी से आगे बढ़ गया। लेकिन वासावा का आगे बढ़ना मुश्किल हो चुका था। उसने झट वे जूते निकाले, जो उसे अंबक ने दिए थे। अब वह बड़ी आसानी से भुरभुरी बरफ पर चल पा रहा था। जल्दी ही वासावा उस कबीला प्रमुख के पास पहुंच गया, जिस तक उसे संदेश पहुंचाना था। मुखिया ने वासावा से संदेश ले लिया, पर उसकी तरफ देखा तक नहीं। लेकिन उसने वासावा के पैरों को देखा तो देखता ही रह गया। थोड़ी देर बाद वहां के सारे आदिवासी वासावा के चारों ओर जमा हो गए और उसने पैरों में जो अजीब से जूते पहन रखे थे, उन्हें गौर से देखने लगे। उन्होंने उन जूतों के बारे में वासावा से पूछा, तो उसने बता दिया कि इन जूतों की वजह से ही उसका भुरभुरी बर्फ पर चलना संभव हो पाया। जल्दी ही वहां के सारे आदिवासी वैसे ही बर्फ के जूते बनाने में व्यस्त हो गए जैसे कि वासावा ने पहने हुए थे। उन्होंने वासावा को न सिर्फ ढेर सारे उपहार, फल, शहद और मिठाई आदि दिए, बल्कि भविष्य में अपने मंगलकार्यों में आमंत्रित करने का वादा भी किया। कबीले के मुखिया ने अपना प्रत्युत्तर लिख कर वासावा को दे दिया। वासावा जवाब और ढेर सारे उपहार आदि लेकर जल्दी ही वापस लौट आया। अंबक के पिता को विश्वास नहीं हो रहा था। लेकिन वासावा के हाथ में उसके दोस्त का जवाब और उस क्षेत्र के फल, मिठाई और उपहार आदि इस बात का प्रमाण थे कि वह प्रतियोगिता जीत चुका है। अंबक के पिता ने धूमधाम से अंबक और वासावा का विवाह कर दिया। अंबक मन ही मन बतखों को धन्यवाद दे रही थी और वासावा अंबक को।

