गोविंद भारद्वाज
महाराज, आज अचानक आपात बैठक बुलाने का क्या कारण है?’ सुंदरवन के मंत्री बग्घासिंह ने राजा नाहरसिंह से पूछा। नाहरसिंह ने कहा, ‘आजकल हमारे सुंदरवन में शहर से आने वाले शिकारियों का दखल बढ़ गया है। वे आए दिन हमारे साथियों का शिकार करके ले जा रहे हैं। पिछले एक महीने में शिकारियों के दल ने हमें काफी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कई बंदरों, भालुओं, हिरणों और हाथियों को अपना शिकार बनाया है। हमें उनसे बचने के लिए कोई न कोई उपाय सोचना चाहिए, वरना एक दिन हम सब मारे जाएंगे और सुंदरवन में शिकारियों का राज हो जाएगा।’
राजा नाहरसिंह की बात सुन कर सबके कान खड़े हो गए और उनके चेहरों पर चिंता की रेखाएं उभर आर्इं। लोमड़ी ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘महाराज सचमुच यह तो बड़ा गंभीर मामला है। हमें तुरंत कोई न कोई कारगर कदम उठाना चाहिए।’ ‘हां… हां… कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।’ सारे जीव-जंतु एक स्वर में बोल उठे। हाथियों के सरदार गजराज ने कहा, ‘मेरा सुझाव है कि शिकारियों को ऐसा सबक सिखाना चाहिए, ताकि वे सुंदरवन की ओर मुंह करके भी सोना भूल जाएं।’
‘क्या करना चाहिए मित्रो, कोई सुझाव दो।’ नाहर सिंह ने कहा।
उनकी बातें बंदर मोंकू सुन रहा था। वह भरी सभा में खड़ा हुआ और बोला, ‘महाराज आप आज्ञा दें, तो मेरे पास एक ऐसा उपाय है, जिससे शिकारी तो क्या उनकी आने वाली नस्लें भी कभी सुंदरवन की ओर आंख उठा कर नहीं देखेंगी।’
‘अरे मोंकू देर किस बात की है, जल्दी बताओ उपाय।’ नन्हे खरगोश ने उछलते हुए कहा। मोंकू बोला, ‘मैं आपका साथ लेना चाहता हूं और बाकी का काम मेरी टीम कर देगी।’ ‘जरूर-जरूर, मैं हर तरह से तुम्हारी योजना के साथ हूं।’ नाहरसिंह ने कहा। मोंकू बोला, ‘महाराज एक महीने में शिकारियों को मैं जरूर सबक सिखा दूंगा।’ यह सुनकर हिरण, भालू, जेबरा, खरगोश, हाथी, जिराफ, बाघ, चीता, लोमड़ी सभी बहुत खुश हुए।
मोंकू ने पच्चीस-तीस युवा बंदरों को अपने घर बुलाया। उनको अपनी योजना समझाते हुए कहा, ‘देखो यह मिशन कामयाब हो जाएगा, तो हम सभी सुखी हो जाएंगे।’
लालू बंदर ने कहा, ‘भैया इस मिशन का नाम तो रखो, ताकि…।’
‘हां… हां, लालू तुमने ठीक कहा, इस मिशन का नाम होगा ‘ऑपरेशन ग्रीन स्टार’।
योजना के अनुसार दस बंदरों को मोंकू ने शहर भेजा। वे वहां से बीस गुलेल और एक बोरे में लाल मिर्ची पाउडर ले आए। मोंकू ने उन्हें कुछ दिनों तक प्रशिक्षण दिया और उन्हें होशियार रहने की हिदायत दी। कुछ दिनों बाद कौओं के सरदार कालू ने आकर मोंकू को बताया कि, ‘कुछ शिकारी हाथों में बंदूकें लिए सुंदरवन की तरफ आते हुए दिखाई दे रहे हैं।’
‘धन्यवाद कालू, तुमने हमें समय रहते सूचना दे दी।’ मोंकू ने कहा। कुछ देर बाद उसने अपनी सारी टीम को एक जगह बुलवा लिया और उन्हें अपना-अपना काम समझा दिया।
शिकारियों का झुंड धीरे-धीरे वन में घुसने लगा। दबे पांव वे बंदूक ताने आगे बढ़ रहे थे कि उनके ऊपर गुलेलों से पत्थरों की बौछार शुरू हो गई। वे संभलते, उससे पहले उन जख्मी शिकारियों की आंखों में लाल मिर्ची डाल दी गई। इस दोहरे प्रहार से शिकारियों की बंदूकें हाथों से छूट गर्इं। कुछ बंदरों ने मौका देखकर उन्हीं की बंदूकों से हवाई फायर शुरू कर दिए। शिकारियों में खलबली मच गई। आंखों में जलन के कारण उन्हें भागने में भी बड़ी असुविधा हो रही थी। ‘मर गए… मर गए’ कहते हुए वे शहर की तरफ दौड़ पड़े। गिरते-पड़ते किसी तरह वे अपनी जान बचा कर सुंदरवन से निकल गए।
उनके जाते ही मोंकू बंदर की युवा टीम खुशी से उछल पड़ी और चिल्लाने लगी, ‘ऑपरेशन ग्रीन स्टार जिंदाबाद।’ मोंकू के चेहरे पर मुस्कान छा गई। नाहर सिंह को मोंकू की कामयाबी की सूचना मिली, तो वह बड़ा खुश हुआ। उसने मोंकू को उसकी समझदारी के लिए शाबासी दी।
मोंकू ने नाहरसिंह से कहा, ‘महाराज अभी खतरा टला नहीं है… वे पुन: हमसे बदला लेने के लिए कोई न कोई षड्यंत्र रचेंगे।’
‘तुम चिंता मत करो मोंकू, वह वक्त आएगा, तब भी हम कामयाब होंगे।’ नाहरसिंह ने उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा।
वास्तव में कुछ दिनों बाद शिकारियों ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए राजा नाहरसिंह को एक षड्यंत्र के माध्यम से अकेले में घेर लिया। ‘कहो नाहरसिंह… किसने हम पर हमला किया था उस दिन? उनका नाम बताओ या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ।’ शिकारियों में से एक शिकारी ने बंदूक उसकी तरफ तान कर कहा।
नाहरसिंह ने बुद्धिमानी और समय की नजाकत को देख कर कहा, ‘हां… हां, मुझे मालूम है कि इस घटना के पीछे किसका हाथ है।’
‘जल्दी से हमें उनके पास ले चलो, वरना भेजे में गोली मार देंगे हम।’ शिकारियों ने कहा। नाहरसिंह थोड़ी दूर उनको साथ लेकर गया और एक पेड़ के पास जाकर बोला, ‘यह इन मधुमक्खियों का किया-धरा है, भाइयो।’ इतना सुनते ही एक शिकारी ने तैस में आकर मधुमक्खियों के छत्ते पर गोली चला दी। फिर क्या था, सारी मधुमक्खियों ने उन शिकारियों पर इतना जबर्दस्त हमला बोला कि वे अपनी जान बचा कर भागने लगे। देखते ही देखते सभी शिकारियों का बुरा हाल हो गया। उन्होंने नाहरसिंह से माफी मांगी और बोले, ‘हमें माफ कर दीजिए, हम कभी इस जंगल में नहीं आएंगे। इन मधुमक्खियों से हमारी जान बचा दीजिए।’ उसी समय मोंकू की टीम वहां पहुंच गई। उन्हें देख कर नाहरसिंह ने कहा, ‘मोंकू तुम सचमुच बड़े बुद्धिमान हो। तुम्हारी बनाई दूसरी योजना भी सफल हो गई।’ मोंकू ने मधुमक्खियों से कहा, ‘बहनो, छोड़ दो इन बदमाशों को। हम जानवर जरूर हैं, पर इन लोगों से तो बेहतर हैं।’ मधुमक्खियों ने हमला रोक दिया। शिकारी वहां से ऐसे भागे जैसे गधे के सिर से सींग। इसके बाद सुंदरवन में शिकारियों का आना बंद हो गया। सबका जीवन मोंकू की सूझबूझ से बच गया।
