मानस मनोहर
तहरी
तहरी उत्तर प्रदेश में अक्सर खाई जाती है। यह खिचड़ी और पुलाव के बीच की चीज है। इसे आज की भाषा में खिचड़ी और पुलाव का फ्यूजन कह सकते हैं। यह खाने में स्वादिष्ट तो होती ही है, पौष्टिक भी बहुत होती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि जब आपका खाना बनाने का मन न हो, बहुत थके हुए हों, तब भी बड़ी आसानी से बना सकते हैं। इसे बनाने के लिए चावल को धोकर साफ कर लें। चावल को पकाने के लिए जितना पानी डालते हैं, उतने ही पानी में चावल को भिगो कर छोड़ दें। अब इसमें डालने के लिए सब्जियां काटें। तहरी बनाने के लिए आपके पास जो भी सब्जी उपलब्ध है, उसका उपयोग कर सकते हैं। प्याज, टमाटर, हरी मटर, गाजर, हरा प्याज, गोभी यहां तक कि आलू भी। चाहें तो कुछ सोयाबीन की बड़ियां भी इसमें डाल सकते हैं। तहरी में सोयाबीन की बड़ियों का स्वाद बहुत अच्छा लगता है।
एक बड़े कुकर में दो-तीन बड़ा चम्मच सरसों का तेल गरम करें, फिर उसमें इतना ही देसी घी डालें और गरम करें। इसमें जीरा, राई, कुछ दाने काली मिर्च के, दो पत्ते तेजपत्ता के, एक बड़ी काली इलायची और एक इंच दालचीनी के टुकड़े का तड़का दें। तड़का तैयार हो जाए, तो इसमें सारी सब्जियों को छौंक दें। इन्हें चला कर थोड़ी देर के लिए ढक दें। फिर इसमें नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और अपनी पसंद के मुताबिक डेढ़ से दो चम्मच सब्जी मसाला डालें। इसमें सब्जी मसाला थोड़ा ज्यादा भी डाल सकते हैं, क्योंकि तहरी मसालेदार अच्छी लगती है। इन सारी चीजों को ठीक से मिलाएं और फिर पानी समेत चावल डाल कर मिलाएं और कुकर का ढक्कन बंद कर दें।
जितनी देर में आपका चावल पक कर तैयार होता है उतनी सीटी आने के बाद आंच बंद कर दें। आमतौर पर दो सीटी में तहरी बन कर तैयार हो जाती है, पर यह अलग-अलग कुकर की बनावट और आंच पर निर्भर करता है। अगर आंच तेज होगी, तो सीटी जल्दी आएगी, और आंच मद्धिम होगी, तो सीटी देर से आएगी। इसलिए ध्यान रखें कि आप कितनी देर में चावल पकाते हैं, उतनी ही देर में गैस बंद कर दें। कुकर को तुरंत न खोलें। जब उसकी भाप पूरी तरह शांत हो जाए, तभी कुकर को खोलना चाहिए। तहरी तैयार है। आप इस पर हरा धनिया, हरी मिर्च और अदरक काट कर डालें और गरमा-गरम खाएं। इसे दही या रायता, अचार, पापड़ और चटनी के साथ खाया जाता है। यों इसके साथ प्याज-टमाटर की चटनी बहुत अच्छी लगती है।
तहरी का मजा यह भी है कि इसे अगर ठंडा होने के बाद भी खाएं, तो स्वाद अच्छा लगता है। इसलिए हफ्ते में एक दिन यह बच्चों के टिफिन में देने का भी विकल्प हो सकता है। फिर अगर रात को बनाया है और बच गई है, तो सुबह भी खाई जा सकती है। तहरी को अगर फ्रिज में रखते हैं तो चावल कड़े हो जाते हैं, इसलिए जब भी खाना हो, इसे गरम करके खाएं, तभी स्वाद आएगा। प्याज-टमाटर की चटनी ज-टमाटर की चटनी लाजवाब होती है। हालांकि इसे बनाना थोड़ा मशक्कत का काम है, पर एक बार बना कर दो-तीन दिन तक खा सकते हैं। प्याज-टमाटर की चटनी बनाने के लिए सबसे पहले प्याज और टमाटर को धीमी आंच पर भूनते हुए पकाना होता है। इसके लिए गैस की आंच पर प्याज और टमाटर को भूनिए, जैसे भर्ता बनाने के लिए बैगन को भूनते हैं। प्याज और टमाटर की मात्रा बराबर रखें। जैसे दो बड़े प्याज लिए हैं, तो दो बड़े टमाटर भी लीजिए।
तवा गरम कीजिए और उस पर तीन-चार हरी मिर्चें और लहसुन की सात-आठ कलियों को भी भून लीजिए। जब लहसुन और मिर्चें भुन जाएं तो आंच बंद कर दीजिए और गरम तवे पर ही एक-एक छोटा चम्मच साबुत धनिया, जीरा, सौंफ और सफेद तिल को डाल कर चलाते हुए भून लीजिए।
प्याज और टमाटर का छिलका उतार लें।
अब एक मिक्सर में भुने प्याज-टमाटर और लहसुन, मिर्चें तथा मसाले डालें। जरूरत भर का नमक और एक चम्मच सरसों तेल या फिर जैतून का तेल मिलाएं और चटनी पीस लें।
इस चटनी को रोटी, परांठा, चावल-दाल किसी के भी साथ खा सकते हैं, पर इसका स्वाद तहरी या फिर डोसा, इडली के साथ अलग ही आता है।
प्याज-टमाटर की चटनी को शीशी में बंद करके रख दें, दो-तीन दिन तक खाई जा सकती है। इसमें तेल और नमक प्रिजर्वेटिव का काम करते हैं, इसलिए चटनी खराब नहीं होगी।

