लंबे समय तक कुर्सी पर बैठ कर काम करना, घंटों गर्दन झुका कर मोबाइल चलाना, गलत अवस्था में सो जाना या गलत अवस्था में लंबे समय तक बैठे रहना आदि वे कारण हैं, जिनसे रीढ़ की हड्डी, गर्दन और कंधों में दर्द व अकड़न होने लगती है। ये सभी स्पांडिलाइटिस के लक्षण हैं। स्पांडिलाइटिस एक ऐसी समस्या है, जिससे आज ज्यादातर लोग परेशान हैं। यह बीमारी चालीस की उम्र के बाद के लोगों को अधिक सताती है। इस उम्र तक आते-आते हड््िडयां कमजोर होने लगती हैं और पुरुष तथा महिलाएं दोनों जल्दी इसकी गिरफ्त में आते हैं। यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। दस में से सात व्यक्ति इस समस्या से परेशान हैं। यह समस्या गलत जीवनशैली की वजह से भी पनप रही है। स्पांडिलाइटिस में गर्दन और रीढ़ की हड्डी ज्यादा प्रभावित होती है।

क्या है स्पांडिलाइटिस
स्पांडिलाइटिस दो यूनानी शब्दों- ‘स्पांडिल’ और ‘आइटिस’ से मिल कर बना है। स्पांडिल का अर्थ है वर्टिब्रा यानि कशेरुका (रीढ़ की हड््डी) और आइटिस का अर्थ है सूजन। इसका सीधा-सा मतलब है कि रीढ़ की हड्डी में सूजन की शिकायत। स्पांडिलाइटिस में पीड़ित व्यक्ति गर्दन को दाएं-बाएं घुमा नहीं पाता। उसकी गर्दन अकड़ जाती है। गर्दन से कोई गतिविधि करने पर दर्द होता है। यह तीन प्रकार का होता है। सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस, लंबर स्पांडिलाइटिस और एंकायलूजिंग स्पांडिलाइटिस।

क्यों होता है स्पांडिलाइटिस
स्पांडिलाइटिस किसी व्यक्ति को किन वजहों से होगा, इसका कोई निश्चित कारण नहीं है। यह बीमारी होने के कई कारण हो सकते हैं। कुछ कारण निम्नलिखित हैं-

गलत अवस्था में बैठना
जब आप सही अवस्था में नहीं बैठते हैं, तब रीढ़ की हड्डी का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे कमर के निचले हिस्से और गर्दन में दर्द होता है। स्पांडिलाइटिस आपको न हो, इसके लिए जरूरी है कि आप जब बैठें तो ध्यान रखें कि शरीर का भार दोनों हिप्स पर बराबर हो। हर तीस मिनट के अंदर अपनी अवस्था बदलते रहें।
स्पांडिलाइटिस से बचाव के लिए केवल बैठने की नहीं, बल्कि खड़े होने की भी सही अवस्था की जानकारी होनी चाहिए। जब आप खड़े होते हैं तब सीना बाहर और पेट अंदर की तरफ हो, कमर सीधी हो और घुटने मुड़े हुए न हों। इन तरीकों से आप स्पांडिलाइटिस के दर्द से बच सकते हैं।
कंप्यूटर या लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करते रहने से भी यह होता है। यही नहीं, लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करने से भी गर्दन में दिक्कत होती है।

पोषक तत्वों का अभाव
स्पांडिलाइटिस का एक कारण भोजन में पोषक तत्वों का अभाव होना है। यही नहीं, अगर आपके शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी है तब भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इस वजह से भी स्पांडिलाइटिस होता है। अगर आप मसालेदार और बासी भोजन करते हैं तब भी इस समस्या से पीड़ित हो सकते हैं।

बढ़ती उम्र
उम्र बढ़ने के साथ हड्डिया कमजोर होने लगती हैं। जिस वजह से स्पांडिलाइटिस होने की आशंका बढ़ जाती है।

लंबे समय तक ड्राइविंग
लंबे समय तक ड्राइविंग करने से शरीर एक ही अवस्था में रहता है। इस वजह से शरीर में अन्य जरूरी गतिविधियां नहीं हो पातीं। इसलिए लंबे समय तक ड्राइविंग करना भी खतरनाक साबित हो सकता है।

अनियमित माहवारी
महिलाओं को अगर अनियमित माहवारी होती है, तो उसकी वजह से भी स्पांडिलाइटिस होता है।

लक्षण
स्पांडिलाइटिस में गर्दन में दर्द होता है और गर्दन अकड़ जाती है। इस वजह से गर्दन को दाएं, बाएं, ऊपर या नीचे करने में दिक्कत होती है। कुछ समय में असहनीय दर्द होने लगता है। दर्द गर्दन से लेकर, कंधों, सिर से होते हुए शरीर के निचले हिस्से तक पहुंच जाता है। कशेरुकाओं के बीच मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। शारीरिक संतुलन भी बिगड़ता है।

बचाव
’शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं
’स्पांडिलाइटिस उन लोगों को होने की संभावना अधिक रहती है जो शारीरिक गतिविधियां कम करते हैं। इससे बचने के लिए आप रोजाना पैदल चलें। व्यायाम करें और योग करें।
’हमेशा ऐसे बिस्तर पर सोएं, जो आरामदायक हो। बिस्तर की वजह से शरीर को कोई दिक्कत न हो इसका ध्यान रखें। क्योंकि कई बार जब बिस्तर अधिक सख्त या अधिक नर्म होता है, तब भी
दिक्कत बढ़ जाती है।
’संतुलित भोजन कई बीमारियों को खत्म कर देता है। स्पांडिलाइटिस से पीड़ित व्यक्ति को कैल्शियम युक्त भोजन अधिक लेना चाहिए और विटामिन डी की कमी न होने दें।
’आप जब भी बैठें तो ध्यान रखें कि आपकी गर्दन बहुत लंबे समय तक झुकी न हो। उसी तरह पीठ भी झुकी न हो। सही अवस्था में बैठने से स्पांडिलाइटिस से बचा सकता है।