नवनीत ग्रेवाल

बच्चे हों या बड़े, सभी की खूबसूरत मुस्कान का एक ही राज होता है, वह है हमारे दांतों की खूबसूरती। इसलिए बचपन से ही दांतों की देखभाल पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर बचपन में दांतों की उचित देखभाल हो गई, तो समझिए जीवन भर दांतों की परेशानी से मुक्ति मिलेगी। मगर हकीकत यह है कि बच्चे खुद अपने दांतों की उचित देखभाल नहीं कर पाते। वे न तो ठीक से दांतों की सफाई कर पाते हैं और न खाने-पीने के मामले में सावधानी बरत पाते हैं। इसके लिए माता-पिता को ही सतर्क रहना पड़ता है। अभिभावकों को बच्चों के दांतों की देखभाल कैसे करनी चाहिए, उन्हें क्या खिलाना चाहिए, क्या नहीं खिलाना चाहिए। इसके बारे में बता रही हैं दंत विशेषज्ञ नवनीत ग्रेवाल।

बढ़ रही है दांतों में सड़न
चिकित्सक नवनीत ग्रेवाल का कहना है कि दांतों की देखभाल के बारे में ऐसी बहुत-सी बातें हैं, जो हमें नहीं मालूम। उनका कहना है कि भारत में पचपन से साठ फीसद बच्चों के दांतों में सड़न पाई जाती है। यह एक रोग की तरह बढ़ती जा रही है।

सड़न का कारण
दांतों में सड़न की एक वजह बच्चों का मीठी चीजों का अधिक सेवन करना है। बच्चे टॉफी, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स वगैरह का सेवन बहुत करते हैं। दांतों में मीठा चिपका रहने के कारण उनमें सड़न पैदा होती है। रात को सोते वक्त और सुबह उठ कर ठीक से दांत साफ नहीं किए जाते, तो वह सड़न दांतों को खत्म कर देती है।
क्या है उपाय

मीठे से बचाएं
बच्चों को केवल मीठे से नहीं बचाना है, बल्कि उनके भोजन में शामिल मीठे की मात्रा को भी नियंत्रित करना है, जैसे टिफिन में ब्रेड-जैम, दूध में रूह-अफजा, चॉकलेट और चीनी आदि देने से भी बचना चाहिए। क्योंकि ये चीजें भी नुकसानदेह होती हैं। दंत विशेषेज्ञ का कहना है कि मीठे का सेवन तीन से चार बार के बजाय एक बार ही करना चाहिए।

दूध के दांतों का इलाज
दांतों को स्वस्थ रखने का सबसे बेहतर तरीका है कि अगर कोई समस्या दांतों में बढ़ रही है, तो जल्द से जल्द उसका इलाज शुरू कर दें। अगर बच्चे के दूध के दांतों में सड़न हो गई है, तो उसका इलाज साथ ही साथ कर लेना चाहिए, क्योंकि अगर समय पर इलाज नहीं किया गया तो जो पक्के दांत आएंगे उनमें भी सड़न लग जाएगी। दंत विशेषज्ञ का कहना है कि जब पक्के दांत सड़न वाले दांतों के साथ मुंह में रहेंगे तो उसमें पैदा होने वाले कीटाणु दूसरे दातों को भी प्रभावित करेंगे। वे नए दांतों को भी खराब कर देते हैं। अगर पक्का दांत संक्रमण वाले दूध के दांत के नीचे बन रहा हो, तो उसकी ऊपरी परत यानी दंतवल्क नाजुक हो जाता है और इनमें सड़न जल्द लग सकती है।

नई तकनीक का प्रयोग
आजकल नई-नई तकनीक और सामग्री उपलब्ध है, जिससे कम उम्र के बच्चों को दांतों के डॉक्टर बिना कैविटी बनाए और मशीन का इस्तेमाल कर ठीक कर सकते हैं। तकनीक के इस दौर में एक ऐसा ही नया आविष्कार है सिल्वर डायनिम फ्लोराइड, जिसे नेल पॉलिश की तरह दांतों पर लगा दिया जाता है और शुरू की सड़न को वहीं रोक दिया जाता है।

5210 का मंत्र है इलाज
नवनीत ग्रेवाल ने दांतों की देखभाल के लिए एक ऐसा मंत्र बताया जिसका अनुसरण करना बहुत आसान है। इस मंत्र का नाम उन्होंने रखा है 5210। यह एक ऐसा मंत्र है जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत चर्चा में है और घर बैठे आसानी से उपयोग में लाया जा सकता है। यह मंत्र निम्न तरह से प्रयोग किया जा सकता है।
5- पांच तरह की सब्जियां या पांच तरह के फलों का रोज सेवन करें। इनका सेवन आप पक्के या कच्चे किसी भी रूप में कर सकते हैं।
2- बच्चे केवल दो घंटे टीवी के आगे बैठें और उन्हें टीवी के आगे खाने को न दें। क्योंकि खाना मुंह में ही पड़ा रहता है और बच्चे टीवी में मगन हो जाते हैं, जिससे मुंह का तेजाब अधिक मात्रा में बन कर दांतों में सड़न पैदा कर देता है।
1- कम से कम एक घंटा खेल-कूद अवश्य करवाएं। इससे प्यास भी लगेगी और बच्चा पानी का सेवन करेगा, जो उसके मुंह को अंदर से साफ करेगा।
0- शून्य या कम से कम मीठा खाएं, जो कि दांतों के लिए लाभदायक होगा।
– रोहित कुमार