जबसे ऑनलाइन खाने की डिलीवरी का चलन बढ़ा है, तबसे युवाओं के खानपान में अनियमितता बढ़ी है। उन्हें भूख लगी हो या नहीं, कुछ न कुछ खाते रहते हैं। आजकल स्मार्टफोन के जरिए पल भर में वे खाना ऑर्डर कर देते हैं। मतलब हमारा खुद पर, हमारी जुबान पर नियंत्रण नहीं है। युवा चाहे मेट्रो में हो या किसी सड़क पर, उन्हें जब जो दिखता है वे उसे खा लेते हैं। इस तरह का खानपान युवाओं में कई तरह की बीमारियों को जन्म देता है। ताज्जुब की बात तो यह है कि इस तरह के खानपान से युवाओं में हृदय रोग जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। एक स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी होता है कि किसी युवा को किस समय और क्या खाना चाहिए। क्योंकि ज्यादा भोजन भी जहर के समान होता है। इसलिए संतुलित आहार ही स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है। स्वामी दयानंद अस्पताल में जनरल फीजिशियन डॉक्टर ग्लैडविन त्यागी का मानना है लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीने के लिए भोजन का समय पर खाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि आजकल युवाओं में खानपान संबंधी अनियमितताएं अधिक बढ़ रही हैं, जिससे तनाव, अवसाद, अपच, हृदय व गठिया जैसे रोग बढ़ रहे हैं।

घर के खाने से अरुचि
डॉक्टर ग्लैडविन त्यागी का मानना है कि आजकल के युवा का खानपान बिगड़ रहा है। वे घर के खाने के बजाय बाहर का खाना अधिक पसंद करते हैं। अगर नौकरी पेशा युवा हैं तो घर से सुबह जल्दी निकलने के चक्कर में टिफिन साथ लेकर नहीं जाते। और ऑफिस जाकर जंक फूड खाते हैं। ऐसे भोजन से मोटापा बढ़ता है।

चाय के साथ सिगरेट
हर चाय के स्टॉल पर कोई न कोई युवा आपको चाय के साथ सिगरेट पीता दिखाई दे जाता है। चाय के साथ सिगरेट का मिलन ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि चाय में कैफीन होती है जो आपके लिए हानिकारक है। दूसरा, सिगरेट में पहले ही खतरनाक टॉक्सिंस होते हैं। इससे परेशानियां बढ़ने का खतरा अधिक बना रहता है।

असमय भोजन
आजकल के बढ़ते बाजारवाद से प्रभावित युवा भी इसकी चपेट में हैं। डॉक्टर ग्लैडविन त्यागी के मुताबिक युवाओं का खानपान का कोई समय नहीं है। वे किसी भी समय कुछ भी खा लेते हैं। जैसे सुबह के नाश्ते में हेल्थी फूड के बजाय पकौड़ा खाएंगे, जिससे गैस की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा जब उन्हें दोपहर का भोजन करना है तब वे सुबह जैसा नाश्ता कर रहे होते हैं या रात के खाने में लंच कर रहे होते हैं। इस तरह खाने का समय बदलने पर शरीर में पाचन क्रिया प्रभावित होती है। डॉक्टर त्यागी ने बताया कि दो तरह की दवाइयां होती हैं। एक क्यूरेटिव दूसरी प्रिवेंटिव। क्यूरेटिव में जब कोई बीमार पड़ता है, तो उसे दवा दे दी जाती है और प्रिवेंटिव में देखा जाता है कि ऐसा खानपान हो, जिससे आप बीमार न पड़ें। इसलिए प्रिवेंटिव मेडिसिन को अपनाना चाहिए।

असमय नींद
आजकल एक तो युवा अपने रोजगार की वजह से समय पर नहीं सो पाते हैं, दूसरा उसका स्मार्टफोन उन्हें सोने नहीं देता। आजकल के युवाओं को स्मार्टफोन की ऐसी लत है कि रात में तीन बजे तक वे फोन पर ही होते हैं। जिससे रात में वे ठीक से सो नहीं पाते। सुबह ऑफिस में जाकर सोते हैं। उनींदेपन की वजह से उन्हें खाने के लिए जो मिलता है उसे खा लेते हैं। नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन बढ़ता है। और युवा परेशान रहते हैं।

भूख लगने पर ही खाएं
बहुत से लोगों की खाने की ऐसी आदत होती है, कि भूख नहीं लगी होती है, फिर भी खाते हैं। कहते हैं बेमन से खाया खाना शरीर को लगता नहीं है। डॉक्टर ग्लैडविन के मुताबिक आप जो भी खाना खा रहे हैं उसकी प्रकृति समान होनी चाहिए। विपरीत प्रकृति का खाना खाने से अनेक बीमारियां तो होती ही हैं, साथ ही भोजन का स्वाद भी बिगड़ता है। इस तरह असमय भोजन करना या ज्यादा खाना खाने से गैस की समस्या बढ़ती है।

सावधानियां
जीवनशैली में बदलाव से खानपान में बदलाव आता है। इससे कई बीमारियां होने की संभावना रहती है। आपको ऐसी बीमारियां न हों, उसके लिए निम्न सावधानियों पर ध्यान दें।
’सोने का समय निर्धारित करना चाहिए।
’घर का खाना ही खाएं। बाहर का खाना बिल्कुल न खाएं। हमेशा टिफिन साथ रखें।
’सुबह का नाश्ता पोषणयुक्त और संतुलित होना चाहिए।
’खाने और सोने के बीच अंतर होना चाहिए। खाना खाने के आधे घंटे बाद ही बिस्तर पर लेटें।