बैगन-मुगौड़ी की सब्जी
भोजन बनाने में लगातार प्रयोग करते रहना चाहिए। इससे एक ही तरह का भोजन करते-करते जो अरुचि पैदा हो जाती है, वह नहीं होती और एक ही चीज से विविध व्यंजन बनाए जा सकते हैं। भोजन में विविधता आती है। हमेशा मौसमी सब्जियों का ही उपयोग करना चाहिए। बेमौसम सब्जी खाना सेहत के लिए नुकसानदेह है। बहुत सारे लोग स्वाद बदलने के लिए गरमी में मटर, गोभी जैसी सर्दी की सब्जियां खाते हैं तो सर्दी में भिंडी, तोरई वगैरह। ऐसा इसलिए भी करते हैं, क्योंकि हर मौसम में कुछ सीमित सब्जियां पैदा होती हैं और उन्हें खाते-खाते अरुचि पैदा हो जाती है। इसलिए स्वाद बदलने के लिए कुछ अलग तरह के व्यंजन बनाएं।
मुगौड़ी यानी दालों से बनी बड़ी। इसे कुछ इलाकों में अदौरी भी कहते हैं। मुगौड़ी बनाने का तरीका अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे अदौरी कहते हैं। वहां इसे बनाने के लिए लोग मूंग, उड़द, चने की दाल और पेठा यानी सफेद कद्दू (जिससे पेठा मिठाई बनती है) के गूदे का उपयोग करते हैं। इसमें धनिया, जीरा, सौंफ, काली मिर्च, लाल मिर्च जैसे खड़े मसाले भी डाले जाते हैं। कई इलाकों में सिर्फ मूंग की दाल को पीस कर उसकी बड़ियां बना ली जाती हैं। दरअसल, मुंगौड़ी इसी को कहते हैं। मुगौड़ी या अदौरी बनाने का चलन इसलिए हुआ कि हर जगह और हर मौसम में हरी सब्जियां उपलब्ध नहीं होतीं, इसलिए मुगौड़ी की सब्जी बहुत काम आती है। मुगौड़ी सदाबहार सब्जी है। इसे किसी भी मौसम में बनाया और खाया जा सकता है। बैगन के साथ मुगौड़ी बनाने के लिए बाजार से मूंग दाल की छोटे आकार वाली मुगौड़ी लें। इसके साथ बनाने के लिए हरे लंबे बैगन लें। इसके अलावा सोया की कुछ पत्तियां लें। सोया धनिया की तरह ही खुशबूदार होता है। इस मौसम में यह सहज उपलब्ध होता है। बैगन के साथ सोया का मेल बहुत अच्छा रहता है। बैगन-मुगौड़ी में प्याज की जरूरत नहीं होती, पर अगर आप चाहें तो छोटे आकार का प्याज बारीक काट कर तड़के में डाल सकते हैं। इसके अलावा इसमें एक बारीक कटा टमाटर भी डाल सकते हैं। वैसे टमाटर-प्याज के बिना बनाएं तो स्वाद अच्छा आएगा। हां, इसमें लहसुन और हींग का उपयोग जरूर करें। ये दोनों चीजें बैगन की सब्जी में अवश्य डालनी चाहिए।
इसे बनाना बहुत आसान है। एक कुकर में खाने का तेल गरम करें। उसमें जीरा, राई, मेथी दाना, साबुत धनिया और अजवाइन का तड़का लगाएं। तड़का लगाते समय सारी चीजें एक साथ नहीं डालनी चाहिए, नहीं तो जो कोमल मसाले हैं, वे पहले जल जाते हैं और मेथी दाना और राई ठीक से पक नहीं पाते। तड़का तैयार होते ही उसमें मुगौड़ियों को डाल कर चलाते हुए सुनहरा होने तक भून लें। उसी में कटे हुए बैगन, सोया और लहसुन डाल दें। ऊपर से नमक, सब्जी मसाला, हल्दी पाउडर डालें और आधा कप पानी डाल कर ढक्कन लगा दें। पानी इतना ही डालें, जिससे ज्यादा रसा न बने, सूखी सब्जी जैसा हो जाए। आंच धीमी रखें। एक या दो सीटी के बाद आंच बंद कर दें। देख लें, बैगन पूरी तरह गल जाना चाहिए, जैसे भरता बनता है। चम्मच से फेंट कर बैगन को मसल दें। ऊपर से धनिया पत्ता, अदरक और हरी मिर्च काट कर सजाएं और रोटी या परांठे के साथ गरमागरम परोसें।

टमाटर-प्याज की चटनी
चटनी आमतौर पर कच्चे टमाटर, धनिया पत्ता, पुदीना वगैरह की बनती है, पर इसे अलग तरह से बनाएं तो स्वाद अलग आएगा। इसके लिए थोड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। साबुत प्याज, लहसुन और टमाटरों को धीमी आंच पर भूनें। हाथ से छूकर देखें, जब वे पक जाएं तो उनका छिलका उतार लें। अब मिक्सर में साबुत धनिया के दाने, जीरा और सौंफ डालें। कुछ कढ़ी पत्ते भी ले लें। इसके अलावा साबुत सूखी लाल मिर्चें लें। उसमें भुने हुए प्याज, टमाटर और लहसुन डाल कर पीस लें। जब चटनी बन जाए तो उसमें ऊपर से नमक और सरसों तेल में कुछ राई के दाने तड़का कर डालें और मिला दें। इस चटनी को परांठे या रोटी के साथ खाएं, अलग स्वाद आएगा।

