सिराज अहमद
समर ने विशाल की किताब का एक पन्ना फाड़ दिया। विशाल बिदक गया, उसका चेहरा देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता था कि वह बहुत गुस्से में है। उसने समर को धक्का दे दिया। समर गिर पड़ा और जोर-जोर से रोने लगा। इससे पहले कि विशाल को डांट पड़ती वह खुद ही किताब लेकर मम्मी के पास जा पहुंचा और उन्हें दिखाते हुए सारी बात बतला दी।
समर भी उठकर मम्मी के पास आंसू पोंछता हुआ चला आया। उसके हाथ में किताब का फटा हुआ वही पन्ना था। उसने पन्ना लाकर मम्मी को थमा दिया जैसे वह कहना चाह रहा हो कि उसने जानबूझकर उसे नहीं फाड़ा।
विशाल उसे डांटने लगा तो मम्मी ने टोकते हुए कहा, ‘मैं इसे जोड़ दूंगी। अब लड़ना बंद करो।’ समर का रोना चालू था, अब भी उसकी आंखो से आंसू जारी थे। मम्मी ने उसे गोद में उठा लिया और दुलराने लगी। थोड़ी देर में ही उनकी गोद में खेल कूदकर वह बहल गया।
एक रोज विशाल स्कूल से घर आया। घर में सन्नाटा था। आते ही उसने पूछा, ‘मम्मी, समर कहां है?’ उसने बैग सोफे पर रखा और समर को कमरे के अंदर तक ढूंढ आया लेकिन वह उसे नहीं मिला। ‘तुम्हारी मांसी आई हुई हैं, समर उन्हीं के साथ है। वह कुछ सामान लेने बाजार गई हुई है, अभी आती होंगी।’ मांसी आई है! विशाल यह सुनकर उछल पड़ा और बेसब्री से उनके आने का इंतजार करने लगा।
कुछ ही देर में दरवाजे पर खटखट हुई। विशाल ने लपककर दरवाजा खोला तो देखा मांसी ही सामने खड़ी है। उनकी गोद में समर है। ‘देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाई हूं।’ कहते हुए मांसी ने एक गिफ़्ट पैक विशाल को पकड़ा दिया। समर के हाथो में भी एक रोबोट था जो बटन दबाने पर बोलता था, ‘मेरा नाम रोबो है।’ जैसा ही रोबो बोलता समर खिलखिलाकर हंस पड़ता।
विशाल ने फटाफट अपना गिफ़्ट खोल डाला, ‘अरे वाह मांसी! यह तो कमाल की कार है।’
‘उसमें रिमोट भी है उससे भी चला सकते हो।’ मांसी ने बताया।
दोनो भाई खेलने लगे। कुछ ही देर हुई थी कि समर तेजी से चीखा तो मम्मी दौड़कर उनके पास पहुंची। समर ने मम्मी को अपना रोबोट दिखाया। बटन दबाने पर रोबो अब कोई जवाब नहीं दे रहा था।
‘विशाल यह तुमने किया?’ मम्मी ने पूछा तो वह बोला, ‘मम्मी, समर इसे बार- बार दबा कर मुझे इरिटेट कर रहा था तो मैंने रोबो को छीनकर हल्के से फर्श पर लुढ़का दिया था, बस।’
समर चिड़चिड़ाकर विशाल की कार को तोड़ने के मकसद से उस पर लपका लेकिन विशाल उसे लेकर भाग खड़ा हुआ। खैर मम्मी ने समर का रोबो ठीक कर दिया और वह फिर उससे खेलने में मशगूल हो गया।
एक शाम मम्मी फुर्सत में बैठी पापा का पुराना एल्बम देख रही थी। विशाल और समर भी आकर उनके पास बैठ गए। वे दोनो भी फोटो देखने लगे। एल्बम में पापा के बचपन की फोटो भी थी।
‘अच्छा बताओ यह कौन है?’ मम्मी ने विशाल से पूछा।
बहुत गौर से देखने के बाद भी विशाल अपने पापा को पहचान न सका।
‘यह तुम्हारे पापा है।’ मम्मी कहकर हंस पड़ी।
‘इतने छोटे से।’ विशाल ने कहकर मुंह पर हाथ रख लिया। उसे देखकर समर ने भी वैसा ही किया।
एक फोटो में पापा अपनी छोटी बहन को अपने हाथ से मिठाई खिला रहे थे। यह फोटो देखते ही विशाल ने जिज्ञासावश पूछा, ‘यह कौन है मम्मी?’
‘यह आपकी बुआ है।’ मम्मी ने बताया।
एक दूसरी फोटो में पापा अपनी बहन के साथ पार्क में खेल रहे थे। एक और फोटो थी जिसमें पापा अपनी बहन को उसके जन्मदिन पर गिफ्ट दे रहे थे। विशाल और समर बड़े गौर से फोटो देख रहे थे।
फोटो देखते-देखते विशाल को एहसास हुआ कि समर ने प्यार से उसके सिर को चूमा। उसने समर की तरफ देखा तो वह मुस्कुरा उठा। विशाल ने उसके मुलायम गाल पर पप्पी ली और उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसके गालों को हल्के हाथो से खींचकर बोला, ‘मेरा प्यारा छोटा भाई।’
