विज्ञान भूषण
होली से कुछ दिन पहले ही अभि और सुमि अपने मम्मी-पापा के साथ मॉडर्न कॉलोनी में रहने आए थे। दरअसल उनके पापा बैंक मैनेजर हैं और उनका तबादला शहर की मुख्य शाखा से मॉडर्न कॉलोनी में स्थित शाखा में हो गया था। नई कॉलोनी और नए घर में आकर अभि और सुमि बहुत खुश थे। दोनों यह सोचकर उत्साहित थे कि इस बार नए दोस्तों के साथ मिल कर होली पर खूब मस्ती करेंगे। लेकिन उनका सारा उत्साह ठंडा पड़ गया, जब होली वाले दिन दोनों अपनी पिचकारी लेकर खेलने निकले तो कॉलोनी का कोई बच्चा उनके साथ होली खेलने को तैयार ही नहीं हुआ। उन बच्चों का कहना था कि बगैर दोस्ती किए, वे अनजान बच्चों के साथ नहीं खेलते हैं।
यह सुन कर अभि और सुमि बगैर होली खेले मायूस होकर घर लौट आए। घर आने पर पापा ने उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा, तो दोनों ने सारी बात पापा को बता दी।
पापा बोले, ‘बस इतनी सी बात!’
अभि-सुमि ने उनकी तरफ अचरज से देखा, ‘आप ऐसा कह रहे हैं, पर पापा जी हमें तो समझ में ही नहीं आ रहा है कि उन बच्चों से हम दोस्ती कैसे करें?’
पापा ने कहा, ‘दोस्ती के लिए उन्हें अपने घर बुला लो, थोड़ा हंसी-मजाक करो, हो जाएगी दोस्ती।’
अभि बोला, ‘पापा आप कैसी बात करते हैं! जब हमारी दोस्ती ही नहीं है तो कोई बिना बात क्यों आएगा हमारे घर?’
पापा मुस्कुराए, ‘अपनी बर्थ-डे पार्टी में बुलाओगे तब तो आएंगे।’ इस पर अभि-सुमि एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। फिर सुमि बोला, ‘पर पापा जी मेरा बर्थ-डे तो नवंबर में आता है और अभि का जनवरी में। तो क्या इतने महीने हम बिना दोस्तों के रहेंगे यहां?’
पापा बोले, ‘नहीं भाई, तुम अपना बर्थ-डे अगले सप्ताह ही मना लो।’
‘अगले सप्ताह!’ अभि-सुमि एक साथ चौंके।
‘हां… हां। अगले सप्ताह फर्स्ट अप्रैल है यानी अप्रैल फूल, उसी दिन मना लो अपना बर्थ डे।’
अभि झुंझुलाया, ‘पापा, आप क्या कह रहे हैं मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है।’ सुमि ने भी अभि की हां में हां मिलाई। अब पापा ने दोनों को समझाया, ‘बेटा, सोचो दोस्ती की शुरुआत अगर हंसी-मजाक से हो तो कितना मजा आएगा। इसलिए तुम दोनों में से कोई एक आज शाम ही अड़ोस-पड़ोस के जिन घरों में बच्चे हों, उन्हें जाकर अपने बर्थ-डे यानी एक अप्रैल के लिए इनवाईट कर लेना। उन बच्चों के मम्मी-पापा उन्हें बर्थ-डे पार्टी के लिए जरूर भेजेंगे। फिर उस दिन क्या होगा यह तो समझ ही गए होगे तुम दोनों।…’
पापा की बात सुन कर अभि-सुमि खुशी से उछल पड़े, ‘अरे वाह पापा, क्या आईडिया दिया है आपने!’
उसी दिन शाम को अभि-सुमि आस-पड़ोस के बच्चों को यह कह कर इनवाईट कर आए कि एक अप्रैल की शाम सात बजे घर पर अभि के बर्थ-डे पार्टी है।
एक अप्रैल की शाम को कॉलोनी के बच्चे एक-एक कर उनके घर आने लगे। जब भी कोई बच्चा आता, अभि उसे ड्राइंग रूम में बैठने को कह कर चुपचाप वहां से चला जाता। बच्चे यह देख कर अचरज में थे कि अभि-सुमि के घर में न कोई सजावट है, न कोई नाच-गाने का इंतजाम। शाम सात बजे तक जब सारे बच्चे जमा हो गए, तो आपस में खुसुर-फुसुर करने लगे, ‘ये कैसी बर्थ-डे पार्टी!’ पिंकी ने मुंह पर हाथ रख कर बगल में बैठे राजू से कहा। वह बोला, ‘हां… सच कहा तूने, न केक, न सजावट, न नाच, न गाना।’
अभि-सुमि चुपचाप एक सोफे पर बैठे थे। दीपू से नहीं रहा गया तो उसने पूछ ही लिया, ‘अभि यह कैसी तुम्हारी बर्थ-डे पार्टी है, कुछ पता ही नहीं चल रहा है?’
उसके ऐसा कहते ही अचानक अभि और सुमि जोर से ताली बजा कर हंसने लगे। फिर उछल-उछल कर गाने लगे, ‘अप्रैल फूल… अप्रैल फूल… सबको बनाया अप्रैल फूल!’
यह देख कर सारे बच्चे हक्के-बक्के रह गए। अगले ही पल कमरे में अभि-सुमि की मम्मी और पापा मुस्कुराते हुए आए। उनके हाथों में बड़ी-सी ट्रे थी। उसमें पेस्ट्री, समोसा, आइसक्रीम और चॉकलेट्स रखे थे। पापा ने मेज पर ट्रे को रखते हुए कहा, ‘आज अभि का बर्थ-डे नहीं अप्रैल फूल की पार्टी है।’
राजू चौंका, ‘अप्रैल फूल पार्टी!…’
अभि ने राजू के कंधे पर हाथ रख कर कहा, ‘मैं और सुमि तुम सबके साथ दोस्ती करना चाहते थे, तुम्हारे साथ खेलना चाहते थे। पर जब तुम लोगों ने हमारे साथ होली नहीं खेली, तो तुम लोगों से दोस्ती करने के लिए यह तरीका हमने खोज निकाला… क्यों अब तो हो जाएगी हम सबकी दोस्ती!…’
उसकी बात सुन कर सारे बच्चे खिलखिला कर हंस पड़े। तभी मम्मी बोलीं, ‘बस अब बातें कम, खाना ज्यादा।…’
पापा ने म्यूजिक सिस्टम ऑन कर दिया और ताली बजा कर बोले, ‘सारे बच्चे नाचो-गाओ- खाओ और अप्रैल फूल मनाओ।…’

