मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक बार-बार देखी, सुनी गई बातों का दिमाग पर गहरा असर पड़ता है और व्यक्ति की सोच प्रभावित होती है। वहीं अमेरिकी फेडरल ब्यूरो आॅफ इंवेस्टिगेशन ने अपने आपराधिक आंकड़ों में यह स्पष्ट कहा था कि यौन हिंसा के अस्सी फीसद मामलों में अश्लील साइटें, तस्वीरें जिम्मेदार हैं। इंटरनेट क्रांति और इंटरनेट के हर जगह पहुंचने ने अश्लील और वीभत्स यौन-चित्रण को देखना आसान बना दिया है। आज यह हर वर्ग और हर मानसिकता के व्यक्ति तक उपलब्ध है। अक्सर फिल्मों, टीवी पर बलात्कार या यौन हिंसा को दिखाया जाता है, मगर देखा गया है कि इस तरह के दृश्य लोगों में सहानुभूति, आक्रोश, काल्पनिक यौन इच्छा को संतुष्ट करने के साधन के तौर पर ज्यादा देखे जाते हैं और अगर उनके अपने शब्दों में कहें तो वे इस सबको देख कर ‘मजा’ लेते हैं। सिनेमा हॉल में अक्सर अश्लील दृश्यों पर बजती सीटियां इस बात का उदाहरण हैं।

यही वजह है कि अब बलात्कार के वीडियो बनाने का चलन भी बढ़ गया है। लोग इस तरह के अपराधों को वीडियो बना कर रखते हैं, ताकि जब चाहें उसे देख सकें और कुछ का तो उद्देश्य ही इन्हें अश्लील साइटों पर डालना होता है। ताज्जुब तो यह है कि इस तरह के अपराध पर कुछ गेम भी प्रचारित होते रहे हैं। ‘रेपले’ उन्हीं में से एक है। 2006 में जापान में यह वीडियो गेम खूब प्रचारित हुआ था। इस गेम में एक व्यक्ति बारी-बारी से पहले एक मां और उनकी दो बेटियों का अलग-अलग जगहों पर बलात्कार करता है। भयावह स्थिति यह है कि इस तरह के गेम को आॅनलाइन भी बेचा और खरीदा गया।

बदलाव से आएगी जागरूकता

समाज में अपराधियों को दंडित करने के साथ ही आपराधिक मानसिकता में भी बदलाव हो, तो अपराध की इस प्रवृत्ति को कम किया जा सकता है। जहां पीड़ित महिलाओं के प्रति भी समाज को अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। वहीं समाज में कुछ बदलाव भी जरूरी हैं।

सोच में बदलाव : इस बदलाव की शुरुआत महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना और घर से हो तो नतीजे सकारात्मक होंगे। इसके लिए घरेलू हिंसा न हो और बेटे, बेटी में अंतर करने जैसी मानसिकता से मुक्ति ही इस समस्या से समाधान की ओर कारगर कदम है।

यौन शिक्षा : यौन शिक्षा को बढ़ावा देकर यौन हिंसा के प्रति जागरूकता फैलाई जा सकती है। जस्टिस जेएस वर्मा समिति की सिफारिश के मुताबिक स्कूली पाठ्यक्रम में यौन शिक्षा को शामिल किया जाना चाहिए। इससे बच्चों को सही-गलत को समझने में मदद मिलेगी और वे आपसी संबंधों के विषय में जान पाएंगे।

अश्लील साइटों से दूरी : अश्लील वेबसाइटों से दूरी जरूरी है, क्योंकि यह अपराध के लिए पूरी तरह जिम्मेदार न सही, मगर इस तरह की सामग्री उनमें उत्तेजना पैदा करती है और इससे अपराध को बढ़ावा मिलता है।