कई लोग सुबह पार्क में जाकर टहलते हैं, सुबह का नाश्ता और रात का खाना भी समय पर खाते हैं और समय पर सो जाते हैं, इसके बावजूद वे बीमार पड़ जाते हैं। हालांकि बीमार होने के कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों में एक प्रमुख कारण शरीर में विटामिन की कमी भी हो सकती है। वैसे तो शरीर में ए, बी, सी, डी सभी विटामिन पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए, लेकिन विटामिन बी-12 ऐसा विटामिन है, जिसकी कमी से शरीर में खून की कमी, थकान के साथ याददाश्त में कमी, हैलुसिनेशन यानी भ्रम और डिमेंशिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एक अध्ययन के मुताबिक देश के लगभग साठ से सत्तर फीसद जनसंख्या और शहरी मध्यवर्ग के लगभग अस्सी फीसद लोगों में विटामिन बी-12 की कमी रहती है। वैसे इसकी कमी के लक्षण अचानक सामने नहीं आते और सामने आते भी हैं तो ज्यादातर लोग इसे शरीर की आम कमजोरी मान कर अनदेखा कर देते हैं। वहीं डॉक्टरों की मानें तो लंबे समय तक विटामिन बी-12 की कमी का होना बेहद खतरनाक है। तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने, मस्तिष्क के ठीक ठंग से काम करने और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए शरीर में विटामिन बी-12 की पर्याप्त मात्रा का होना बहुत आवश्यक है।
विटामिन बी-12
शरीर के स्वास्थ्य और संतुलित कार्य प्रणाली के लिए यह बेहद आवश्यक विटामिन है। यह विटामिन शरीर में तंत्रिका प्रणाली को स्वस्थ बनाए रखने, हृदय रोग का खतरा कम करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करता है। यह तनाव से निपटने में मदद करता है, इसलिए इस विटामिन को एंटी-स्ट्रेस विटामिन भी कहा जाता है। इसकी कमी होने पर शरीर में फॉलिक एसिड का अवशोषण नहीं हो पाता है। चूंकि शरीर इस विटामिन का निर्माण नहीं करता, इसलिए इसे केवल खाद्य पदार्थों के जरिए ही प्राप्त किया जा सकता है। बेहद कम खाद्य पदार्थों में विटामिन बी-12 होने के कारण आज ज्यादातर लोगों में इसकी कमी पाई जाती है।
इसकी कमी के लक्षण
शरीर में हर समय थकान और कमजोरी रहना। उबकाई आना।
चलने में लड़खड़ाहट होना, गिरने का डर लगना।
थोड़ा-सा काम करने पर सांसों का फूलना या चक्कर आना।
खून की कमी होना।
सिरदर्द होना।
शरीर में खून की कमी हो जाना और आयरन कैप्सूल लेने से भी बात नहीं बनना।
हाथ-पैरों का सुन्न होना या चींटी काटने जैसा अहसास होना।
मुंह में छालों का होना।
भूख न लगना।
स्मरण शक्ति का कम हो जाना।
अवसाद, चिड़चिड़ापन, भ्रम होना।
धड़कन का तेजी से बढ़ना या घटना।
विटामिन बी-12 की कमी से शरीर में खून की कमी हो सकती है। इससे मरीज की त्वचा का रंग पीला भी हो जाता है।
विटामिन बी-12 के स्रोत
यह संरचनात्मक रूप से जटिल विटामिन है। इसकी कमी को पूरा करने के लिए विटामिन बी-12 से युक्त आहार ग्रहण करना चाहिए। यह विटामिन मांस उत्पादों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। यही कारण है कि शाकाहारियों में आमतौर पर विटामिन बी-12 की कमी पाई जाती है। इस विटामिन की पूर्ति के लिए अंडे, चिकन, साल्मन मछली का सेवन करना चाहिए। जो लोग मांस-मछली नहीं खाते उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर विटामिन बी सप्लीमेंट्स लेने चाहिए। साथ ही उन्हें अपने आहार में दूध, पनीर और दूध से बने दूसरे उत्पाद जैसे दही, चीज आदि को शामिल करना चाहिए। कई गंभीर स्थितियों में डॉक्टर मरीज को विटामिन के इंजेक्शन भी देते हैं।
साल्मन मछली में पर्याप्त मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड के साथ ही विटामिन बी भी होता है। 178 ग्राम पकी हुई साल्मन में अस्सी फीसद तक विटामिन बी-12 होता है। अंडे में उच्च मात्रा में विटामिन बी-12 होता है। एक उबले हुए अंड में 0.6 एमसीजी विटामिन बी-12 होता है। अंडा विटामिन डी, प्रोटीन का स्रोत होता है, जो शरीर की हड्डियां मजबूत बनाने के लिए जरूरी कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है।
चिकन में लीन प्रोटीन के साथ उच्च मात्रा में विटामिन बी-12 होता है। एक कप लो फैट दूध में 1.2 एमसीजी विटामिन बी -12 होता है। दूध प्रोटीन और कैल्शियम का भी अच्छा स्त्रोत होता है। दही में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी-12 होता है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन होने की वजह से रोजाना इसका सेवन करने से मधुमेह और उच्च रक्तचाप से बचा जा सकता है।
मात्रा
चौदह साल से अधिक उम्र के लोगों को 2.4 माइक्रोग्राम्स विटामिन बी-12 की जरूरत होती है।
