जितेश कुमार
निंदिया रानी आओ न
मुझे भी सुलाओ न,
मीठे-मीठे प्यारे सपने
मुझको भी दिखाओ न।
प्यारी थपकी देकर मुझको
और जरा सहलाओ न,
जम्हाई जब आने लगे तो
झूम-झूम कर आओ न।
दौड़-धूप से मैं थक जाऊं
कुछ आराम दिलाओ न,
शीतल-शीतल मंद हवा-सी
तुम सुकून बन जाओ न।
दूर देश के परीलोक में
मुझको भी ले जाओ न,
मुझको भी दो पंख लगाकर
अंबर तक पहुंचाओ न,
हाथ में जो है छड़ी परी के
उसको जरा दिलाओ न।
छड़ी हाथ की घुमा कहूंगा
जग, सुंदर बन जाओ न।
जब सुंदर बन जाए दुनिया
सबको खूब हंसाओ न,
थोड़ी-थोड़ी मन बहलाने
निंदिया रानी आओ न।
