हरिंदर सिंह गोगना
कक्षा में दाखिल हुए अध्यापक जी कुर्सी पर बैठते ही बोले- ‘बच्चो, कल हमने कहा था कि आज हम सर्वप्रथम सबके नाखून चेक करेंगे… इसलिए जिसे जिसे मैं बुलाऊं वह अपने नाखून मुझे दिखाए…।’ सब बच्चे अपने-अपने नाखून दिखा रहे थे। मगर जब अध्यापक ने रोल नंबर दस बोला तो विनय गर्दन नीचे झुकाए बैठा था। अध्यापक जी ने फिर दोहराया- ‘विनय, तुमने सुना नहीं मैंने क्या कहा… इधर आओ और अपने नाखून चेक करवाओ।’
विनय डरता-डरता अध्यापक जी के पास आया और अपने हाथ छिपाते हुए बोला- ‘सर, मैं अपने नाखून काटना भूल गया।’ अध्यापक जी जानते थे कि विनय साफ-सफाई के मामले में बहुत लापरवाह है। अध्यापक जी ने गुस्से में उसे पूरा पीरियड बेंच पर खड़े रखा और पचास रुपए जुर्माना भी किया। विनय के पास जेब खर्च के बीस रुपए थे। उसने वही अध्यापक जी को देते हुए कहा कि तीस रुपए वह कल लाकर देगा। मारे शर्मिंदगी के वह अपने सहपाठियों के सामने पूरा पीरियड सिर झुकाए खड़ा रहा था।
अगले दिन विनय स्कूल नहीं आया। अध्यापक जी उसके घर के आगे से गुजर रहे थे तो विनय की मम्मी उन्हें रोकते हुए बोली- ‘सर, यह आवेदन रख लीजिए… विनय की है… आज वह स्कूल नहीं आ सकेगा… उसे बुखार है।’ अध्यापक जी एक पल सोच कर बोले- ‘क्या मैं विनय को देख सकता हूं?’
‘जी क्यों नहीं… आइए…।’ कह कर विनय की मम्मी अध्यापक जी को आदर सहित घर के उस कमरे में ले गई जहां विनय बिस्तर पर आंखें मूंदे पड़ा था और उसके माथे पर गीली पट्टी रखी थी। अध्यापक जी उसके समीप बैठ गए। तभी विनय की आंखें खुली तो अध्यापक जी को पास बैठा देख कर वह कुछ हैरान हुआ और बोला- ‘सर… आप!’
‘तुम लेटे रहो।’ अध्यापक जी ने कहा और उठ कर विनय के कमरे की बंद खिड़की खोलते हुए बोले- ‘अरे यह खिडकी क्यों बंद कर रखी है।
अगर ताजा हवा भीतर नहीं आएगी, तो जल्दी तंदरुस्त कैसे होगा।…’ फिर उन्होंने विनय के पास रखा पानी का अनढका गिलास भी प्याली से ढक दिया और फर्श की ओर देखते हुए विनय के मम्मी से बोले- ‘बहन जी, इस फर्श पर तो कितनी मक्खियां बैठी हैं… आधी बीमारी की जड़ तो यही हैं। आप इस फर्श को फिनायल से साफ करें। अगर हम अपने इर्द गिर्द स्वच्छता रखें और बाहरी चीजें कम इस्तेमाल करें, साफ-सफाई के प्रति जागरूक रहें तो क्या मजाल कि बीमारी पास फटक जाए।… विनय के बीमार होने का कारण यही तो है। यह सफाई के प्रति जरा भी सावधान नहीं।…’ विनय पर आज जैसे अध्यापक जी की बातों का गहरा असर हो रहा था। वह बड़े ध्यान से उनकी बातें सुन रहा था और भीतर ही भीतर उसे अपनी गलतियों का अहसास हो रहा था। फिर अध्यापक जी चले गए। इसके कुछ दिनों बाद की बात है। स्कूल में एनएसएस इकाई के सात दिवसीय कैंप में बढ़िया खिलाड़ी, बढ़िया अनुशासन और बढ़िया सफाई रखने वाले बच्चे को चुना और सम्मानित किया जाना था। जब सबके बाद साफ-सफाई रखने वाले बच्चे को इनाम के लिए चुना गया, तो वह था विनय। यह देख कर उसके अध्यापक जी को बड़ी हैरानी मिश्रित खुशी हुई।
इनाम लेने के बाद विनय ने मंच पर ही बैठे अपने अध्यापक जी के पैर छू कर कहा- ‘सर आपने उस दिन मुझे साफ-सफाई के प्रति इतनी सच्ची और अच्छी भावना से समझाया कि मुझे अहसास हुआ कि मनुष्य अगर सफाई न रखे तो वह पशु से भी बदतर है। सफाई रखने वाले को सभी पसंद करते हैं और वह ऐसे ही सम्मान पाते हैं।…’ विनय में आए परिवर्तन को देख कर और उसकी सूझ भरी बातें सुन कर अध्यापक जी खुशी से गदगद हो गए और उन्होंने विनय को सीने से लगा लिया।

