मानस मनोहर
भारतीय घरों में रायता दैनिक आहार में शामिल होता है। भोजन कुछ भी बने, उसके साथ रायता अवश्य परोसा जाता है। सर्दी के मौसम में मसालेदार और तली-भुनी चीजें खाने का मन कुछ अधिक होता है और बाकी मौसम की अपेक्षा ऐसी चीजें खाई भी अधिक जाती हैं, उसमें रायते से भोजन का स्वाद और बढ़ जाता है। खासकर परांठे आदि के साथ रायते का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाता है। यों चावल-दाल, रोटी-सब्जी के साथ भी रायते का मेल अच्छा बैठता है। इस बार कुछ मौसमी रायते।
रायता बनाना सबसे आसान काम माना जाता है। दही को फेंटा या मथा और उसमें कोई सब्जी या फल घिस कर डाल दिया, कुछ नहीं, तो बूंदी डाल कर रायता बना लिया। मगर वास्तव में रायता बनाना भी खासे कौशल की मांग करता है। पहले तो यह जानना जारूरी है कि दही के साथ किस चीज का मेल ठीक रहता है और क्या चीज उसमें मिल कर पेट के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। जैसे दही के साथ प्याज का मेल ठीक नहीं होता। उसी प्रकार रायते में कोई भी फल नहीं डालना चाहिए। रायते के लिए कुछ शाक उत्तम होते हैं, जैसे पालक और बथुआ। सर्दी में कुछ मौसमी सब्जियां भी रायते के लिए उत्तम मानी जाती हैं, जैसे गाजर और चुकंदर।
फिर रायते के सेवन को लेकर भी सावधानी बरतनी चाहिए। रात को रायता खाने से परहेज करना चाहिए। दोपहर के भोजन में तड़का लगा रायता स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है। इसके अलावा जिन लोगों को कब्ज रहती हो, उन्हें किसी भी वक्त रायता खाने से परहेज करना चाहिए। अगर वे चाहें तो छाछ में जीरा, अजवाइन और लहसुन का तड़का लगा कर बना रायता दोपहर को ले सकते हैं।
रायता बनाने के लिए, जैसा कि पहले भी बता चुके हैं, राई का इस्तेमाल जरूर करें, इससे स्वाद बढ़ जाता है। राई यानी पीली सरसों को चार-पांच घंटे के लिए भिगो कर रख दें और फिर निथार कर उसे कूट या पीस लें। फिर कम से कम एक घंटे के लिए ढंक कर रख दें। जब रायता बनाएं, तो उसमें एक छोटा चम्मच इसे डाल दें।
बथुए का रायता
सर्दी में रायता बनाने के लिए बथुआ सबसे उत्तम शाक होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से बथुआ अत्यंत गुणकारी शाक है। जिन्हें कब्ज रहती हो, वे भी बथुए का उपयोग कर सकते हैं। यह खून को साफ करता है, जिससे कील-मुंहासे आदि की समस्या दूर होती है। बथुए का उपयोग आम घरों में खूब होता है। मगर थोड़ा रोचक तरीके से इसका रायता बनाएं, तो इसका स्वाद बढ़ जाता है। बथुए का कोई भी व्यंजन बनाना हो, तो सबसे पहले इसे सावधानी से साफ करना चाहिए। इसके पत्तों और नरम हिस्से का ही उपयोग करें। फिर तीन-चार बार पानी से धोकर साफ कर लें।
रायता बनाने के लिए बथुए को नमक मिले पानी में पांच मिनट के लिए ढक्कन लगाए बगैर उबाल लें और फिर छान कर तुरंत ठंडे पानी में डाल कर कुछ देर छोड़ दें। इससे बथुए का हरापन भी बरकरार रहता है और इसके पोषक तत्त्व सुरक्षित रहते हैं। फिर छान कर इसे मिक्सर में अच्छी तरह पीस लें। अब एक बर्तन में बथुए की मात्रा के बराबर ही दही लें और बथुए वाले मिक्सर में ही डाल कर एक बार चला लें। रायता बन गया।
अब इसमें जरूरत भर का नमक (अगर आधा सफेद और आधा काला नमक लें, तो स्वाद बढ़ जाता है), अपने स्वाद के अनुसार कुटी लाल मिर्च, एक छोटा चम्मच राई का पेस्ट, एक छोटा चम्मच भुना-पिसा जीरा डालें और सबको ठीक से मिला लें। अब इसमें तड़का लगाना जरूरी है। तड़के के लिए एक चम्मच घी गरम करें, उसमें राई, जीरा, अजवाइन, दो-तीन बारीक कटी लहसुन की कलियां और आधा चुटकी हींग डालें और तड़का तैयार कर रायते में डाल दें। ऊपर से आधा छोटा चम्मच चाटमसाला डालें और सब कुछ को अच्छी तरह मिला लें और परोसें।
गाजर का रायता
बथुए की तरह गाजर भी स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत गुणकारी सब्जी है। इसका रायता बहुत स्वादिष्ट बनता है और परांठे आदि के साथ इसका मेल उत्तम रहता है। गाजर का रायता बनाने के लिए पहले गाजरों को हल्का छील कर अच्छी तरह धो लें। अब एक मध्यम आकार के गाजर को कद्दूकस करके अलग रख लें। बाकी के दो-तीन गाजरों को चाहें तो मोटा-मोटा काट लें। कटे हुए गाजरों को अच्छी तरह उबाल कर पका लें। फिर अंत में घिसे हुए गाजर को भी इसी में डाल दें, ताकि यह थोड़ा नरम हो जाए।
अब बड़े टुकड़ों को निकाल कर मिक्सर में अच्छी तरह पीस लें और कद्दूकस किए हुए गाजर को अलग कटोरी में रखें। पिसे हुए गाजर में बराबर मात्रा में दही डालें और एक बार मिक्सर को चला लें। अब इस रायते को निकाल कर नमक, लाल मिर्च, भुना-पिसा जीरा, चाट मसाला डालें और ठीक से मिला लें। इसमें भी उसी प्रकार तड़का लगाएं और परोसें, जैसे बथुए के रायते में लगाया था।
