भारत मेलों का देश है। यहां साल भर कोई न कोई बड़ा मेला आयोजित होता है। पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले की बात ही कुछ और है। दिल्ली में हर साल आयोजित होने वाले इस मेले में न सिर्फ देश भर से कारोबारी और व्यापारी, निर्माता-उत्पादक, दस्तकार हिस्सा लेते हैं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों की भी इसमें उत्साहजनक हिस्सेदारी होती है। यह मेला यों तो व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है, पर इसमें सामान्य नागरिक भी खूब उत्साह के साथ भाग लेते हैं। वे इसमें विभिन्न राज्यों और देशों के खानपान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते और मनचाही खरीदारी करते हैं। इस बार के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले के बारे में बता रहे हैं सुशील राघव।

मेला’ शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में रंग-बिरंगी बत्तियों से सजे झूले, खिलौने, मिठाइयां खासकर जलेबी और मौज-मस्ती करते हुए बच्चों के दृश्य सामने आने लगते हैं। भारत में साल में छोटे-बड़े सैकड़ों मेले लगते हैं, जिनमें से अधिकतर धार्मिक मेले हैं। इसके अलावा कुछ मेले मौसम के बदलाव के समय लगते हैं। सबसे बड़े मेलों की बात करें तो इनमें कुंभ मेला, सोनपुर मेला, पुष्कर मेला, हेमिस गोम्पा मेला, चंद्रभागा मेला, गंगासागर मेला, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला आदि प्रमुख हैं। कुंभ मेला हर बारह साल में एक स्थान पर आयोजित होता है। यह मेला चार स्थानों प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। कुंभ हिंदुओं का सबसे बड़ा मेला है। इस दौरान श्रद्धालु पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, क्षिप्रा या गोदावरी) में डुबकी लगाते हैं। बिहार में लगने वाला सोनपुर मेला पशुओं की खरीदारी के लिए जाना जाता है। यह गंगा और गंडक नदियों के किनारे आयोजित होता है। सोनपुर मेला अपनी तरह का दुनिया में अकेला मेला है। इस मेले का मुख्य आर्कषण हाथी बाजार होता है, जहां पर बड़ी संख्या में हाथियों की खरीद-फरोख्त की जाती है। अच्छे पशुओं की खरीदारी के लिए पूरे एशिया से लोग यहां आते हैं।

सोनपुर मेले में जहां सभी पशुओं की खरीद-फरोख्त होती है, वहीं पुष्कर मेला ऊंटों के बाजार के रूप में जाना जाता है। पुष्कर झील के किनारे आयोजित होने वाले इस मेले में दुनिया भर से लोग ऊंट खरीदने के लिए आते हैं, जिनमें इजरायल से सबसे अधिक लोग आते हैं। हेमिस गोम्पा मेले का भारतीय बौद्ध लोगों के बीच विशेष महत्त्व है। हर साल जनवरी-फरवरी के दौरान यह मेला लद्दाख स्थित हेमिस गोम्पा बौद्ध मठ के पास आयोजित किया जाता है। इस मेले में हजारों लोग जुटते हैं। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के नजदीक आयोजित होने वाले चंद्रभागा मेले को माघ सप्तम मेला भी कहते हैं। फरवरी में आयोजित होने वाले इस मेले में आने वाले श्रद्धालु चंद्रभागा नदी में डुबकी लगाते हैं और विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के दर्शन करते हैं। कुंभ के बाद सबसे अधिक लोग गंगासागर मेले में जुटते हैं। पश्चिम बंगाल में जहां गंगा नदी बंगाल की खाड़ी से मिलती है, वहीं इस मेले का आयोजन होता है। इस दौरान लाखों लोग पवित्र नदी में डुबकी लगाते हैं।