भोजन में हरे मटर का आकर्षण तो वर्ष भर बना रहता है, पर सर्दी के मौसम में इसका जायका कुछ अलग ही होता है। इसलिए कि जो चीज जिस मौसम में पैदा होती है, उसमें उसे खाने का मजा ही अलग होता है। यह हरे मटर का मौसम है। सब्जी के रूप में मटर तो अक्सर खाया जाता है, पर इसके बहुत सारे व्यंजन बनते हैं। हरे मटर की दाल का स्वाद लाजवाब होता है, पोहे में इसके दाने स्वाद चौगुना कर देते हैं। इसी तरह के मटर के कुछ व्यंजनों के बारे में इस बार चर्चा करेंगे।
मटर के परांठे
हरे मटर में फाइवर की मात्रा अन्य दालों की अपेक्षा अधिक होती है, प्रोटीन तो होती ही है। इसलिए यह न केवल स्वाद, बल्कि सेहत की दृष्टि से भी लाजवाब होता है। हरे मटर की सब्जी तो हर कोई खाता है, कुछ लोग दाल भी बना लेते हैं। कुछ लोग हलवा और बर्फी भी बनाते हैं। मगर हरे मटर के परांठे लाजवाब बनते हैं। सुबह नाश्ते में या फिर किसी भी वक्त भोजन के तौर पर इसे खाया जा सकता है। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में मटर के परांठे खाने का खूब चलन है। हरे मटर के परांठे बनाना बहुत आसान है। कुछ लोग इसका मसाला तैयार करने के लिए मटर के दानों को उबाल लेते हैं। पर चूंकि मटर में पानी की मात्रा पहले से होती है, इसे उबालने पर अपेक्षित स्वाद नहीं आ पाता। हरे मटर के परांठे बिल्कुल देसी अंदाज में बनाएं, तो इसका मजा बढ़ जाता है।
मटर के दाने निकाल कर एक बार पानी से धोकर ठीक से साफ कर लें। फिर कड़ाही में एक चम्मच तेल गरम करें। उसमें राई, जीरा, सौंफ, साबुत धनिया और अजवाइन का तड़का दें और मदर के दाने छौंक दें। थोड़ा-सा नमक डालें और ढंक कर पांच मिनट के लिए धीमी आंच पर पकाएं, ताकि मटर के दाने नरम हो जाएं। कड़ाही से मटर को निकालें और खरल में, सिलबट्टे पर या चकला-बेलन की मदद से कुचल लें। ध्यान रखें कि इसे मिक्सर में न पीसें, नहीं तो इसका देसी स्वाद नहीं आएगा। मटर के कुछ दाने दिखते रहते हैं, तो परांठे खाने का आनंद बढ़ जाता है।
अब इसमें धनिया पत्ता, हरी मिर्च, अदरक और चाहें तो कुछ लहसुन की कलियां भी महीन काट कर डाल सकते हैं। फिर ऊपर से सब्जी मसाला, लाल मिर्च पाउडर, अमचूर पाउडर और जरूरत भर का नमक डालें और सारी चीजों को मिला लें। नमक का ध्यान रखें, क्योंकि मटर को पकाते समय भी डाला था। इस तरह परांठे की पिट्ठी तैयार हो गई। अगर मटर को उबालते या पहले पीस कर पकाते हैं, तो स्वाद सही नहीं आ पाता। जब मटर को पहले छौंक कर पकाते हैं, तो उसका स्वाद बहुत बढ़िया आता है।
अब आटे की लोइयां बनाएं और जैसे आलू के परांठे बनाते समय भरावन भरते हैं, वैसे ही मटर की पिट्ठी भर लें और गरम तवे पर डाल कर मध्यम आंच पर थोड़ा-घी लगाकर सेंकें। मटर के परांठे फूले-फूले बनें, इसके लिए भरावन भरने में सावधानी बरतनी पड़ती है। फिर बेलते समय पहले लोई को चकले पर रख कर हल्के हाथों से बीच से किनारों की तरफ दबाते हुए फैलाएं। ध्यान रखें कि परांठा कहीं से भी फटने न पाए। अब बेलन घुमा कर बेल लें। इस तरह जब परांठे को पकाएंगे, तो वह फूला-फूला बनेगा। फिर वह भीतर से नरम और बाहर से कुरकुरा भी बनेगा। परांठे पकाते समय आंच को तेज नहीं रखनी चाहिए, इससे परांठे ठीक से पकते नहीं और ऊपर से जल जाते हैं। मटर के परांठे आलू-गोभी की सब्जी या फिर रायता, अचार, धनिए की हरी चटनी या फिर सॉस, किसी के भी साथ खाएं।
चिड़वा मटर
पोहे में मटर तो सभी डालते हैं, पर बिहार और उत्तर प्रदेश में चिड़वा मटर की नमकीन कुछ अलग ढंग से बनती है और यह बहुत लोकप्रिय भी है। इसे बनाना बहुत आसान है। इतना आसान कि मेहमान आएं तो झट-पट बना कर परोसा जा सकता है। चिड़वा मटर बनाने के लिए एक साथ दो कड़ाहियों का इस्तेमाल करें। दोनों में एक-एक चम्मच तेल गरम करें। एक कड़ाही में जीरा, राई, अजवाइन का तड़का दें और उसमें अच्छी मात्रा में लेकर मटर के दानों को छौंक दें। इसमें थोड़ा सब्जी मसाला, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक डाल कर मिलाएं और ढक्कन लगा कर धीमी आंच पर पकने दें। दूसरी कड़ाही में चिड़वा यानी पोहे डालें और फिर चुटकी भर हल्दी पाउडर डाल कर मध्यम आंच पर तब तक चलाते हुए सेंकें, जब तक कि वह कुरकुरा न हो जाए।
पहली कड़ाही में मटर का ध्यान रखें, वह पक कर नरम हो जाए और उसका पानी पूरी तरह सूख जाए, तो आंच बंद कर दें। चिड़वा पर ध्यान दें। उसका रंग हल्का सुनहरा होने लगे, तो समझें कि वह खाने के लिए तैयार है। अब इसमें तले हुए मटर के दाने डाल कर अच्छी तरह मिला लें। गरमा-गरम प्लेटों में डालें और ऊपर से कटा हुआ हरा धनिया, हरी मिर्च और प्याज डालें, चाहें तो मुट्ठी भर बेसन के सेव भी डाल सकते हैं। गरमा-गरम परोसें। यह चाय के साथ खाया जाने वाला बेहतरीन नमकीन होता है। इसे खाकर भरपूर नाश्ता हो जाता है।

