शंकरानंद
पृथ्वी की सतह से उठती हुई गंध
बीज की गंध से मिलती है
धूप की परछार्इं और
चूल्हे की आग में बहुत फर्क नहीं है
किसी हाथ का कंधे पर होना
जिस तरह भरोसे का होना है
उसी तरह किसी पेड़ की छाया
बताती है अपना होना लगातार
मैं हर चेहरा गौर से देखता हूं
उन्हें देखने भर से पता चल जाता है कि
उनकी आंखों में अभी कितनी नमी बची है
धीरे-धीरे तमाम रहस्य खुल जाते हैं
कोई गांठ नहीं बचती जो धोखा दे
बस एक अफसोस बच जाता है कि
वह भला आदमी अगर चाहता तो
इतना बुरा होने से बच सकता था
जितना कि कोई गहरा कुआं होता है
पानी और जहर की गंध से एक साथ भरा हुआ।
शुरुआत
बहुत मुश्किल होता है पहला कदम बढ़ाना
अबोले में चुप्पी होती है
घुन की तरह जो काटती है समय को
हासिल होती है धूल
राख उड़ती है इच्छाओं की
दूरियां हर जगह होती हैं
दीवारें खड़ी होती हैं, तो गिरती नहीं जल्दी
ऐसे में यही लगता है कि
एक तरफ खाली पन्ना है जीवन और
दूसरी तरफ अथाह रंगों से भरा है समय
मुश्किल है कि रंग को भरना नहीं आता
ठूंठ की तरह जीने से अच्छा है कि नमी खोजें
अगर बंजर है तो उसमें भी खिल सकते हैं फूल
पहले पत्थर तोड़ने की शुरुआत तो हो!
नदियों की उम्र
सदियों से बहती नदियों के किनारे शहर बसे हैं
वे इतने खूबसूरत हैं कि खींचते हैं अपनी तरफ
जैसे वे एक चुंबक हों और
बाकी सब कुछ लोहा
पहले ये शहर
किनारे बहती नदियों का पानी पीकर बड़े हुए
अब वे नदियां किसी बूढे की तरह खांसती हैं दिन रात
जैसे उन्हें रखा जाता है घर के बाहर
चुपचाप कराहने के लिए
इसलिए कि किसी की नींद पर पत्थर नहीं पड़े
नदियों की उम्र अब घटती जा रही है
वे जीने की इच्छा के बावजूद मर रही हैं
मैं शहर की चमक को जब देखता हूं
याद आता है कि इस रोशनी की राख
कहीं और बह रही है!
भूलना
संभालने की कोशिश में भूलना एक यातना है
कुछ याद नहीं रहता
जैसे स्लेट पर लिखा था
एक बार पोंछा तो मिट गया
जबकि कुछ भी इतनी आसानी से खत्म नहीं होता
जीने के लिए याद रखना जरूरी है
इतनी चीजें हैं कि भीड़ में सब एक जैसा हो जाता है
पता फोन नंबर चेहरा हंसी और आंसू के अलावा भी
इस पृथ्वी पर असंख्य चीजें हैं जिन्हें याद रखना चाहिए
मुश्किल है कि हर चीज बोझ की तरह लगती है अब
याद रखना एक सजा
ऐसे लोग कम नहीं जो अपने घर का पता भी
भूल जाते हैं
भटकते हैं वे उम्र भर
जिन्हें अपना चेहरा भारी लगता है।
