गौरव वाजपेयी ‘स्वप्निल’

पापा जी! मोबाइल दे दो
डाउनलोड करूंगा गेम।
क्रेजी जूसर पॉप दि शूटर
किक दी बड्डी यूरो ट्रेन।

पापा बोले- प्यारे बेटे!
दौड़-भाग कर खेलो खेल।
तन-मन दोनों स्वस्थ रहेंगे
कभी नहीं होगे तुम फेल।

बड़ा बुरा है प्यारे बेटे
मोबाइल का चस्का।
बेहतर है तुम पकड़ो बल्ला
मारो चौका-छक्का।