सोनाली मिश्रा
चुनावों के आखिरी दिन शहर के बीचोबीच बने इस पार्टी कार्यालय में शांति थी। बूथ वाले लोग चले गए थे। सोशल मीडिया वाले लोग बचे थे। रोज कुछ पलों की शांति के लिए तरसती प्रिया को आज यह सन्नाटा दमघोंटू लग रहा था। रोज हैशटैग क्रिएट करने का दर्द होता था और आज एकदम खाली रह जाने का दर्द। एक लंबी सांस लेकर प्रिया ने बूथ से आखिरी इनपुट का इंतजार किया, और उसके आते ही उसने अपने लैपटॉप से सोशल मीडिया अपडेट कर कमरे से बाहर निकल आई। उसे लग ही नहीं रहा था कि पूरे छह महीने से वह इसी वार रूम का हिस्सा थी। फोन में मैसेंजर चेक करते हुए वह धीरे-धीरे नीचे उतरी! ‘ऐ प्रिया, चल पार्टी करेंगे!’ पारुल ने इशारा किया!
प्रिया ने सिर झुकाए हुए ही ना में गर्दन हिला दी!
‘ओए, मैसेज आने वाला होगा! टेंशन न लो!’ प्रिया उसका इशारा समझ कर झेंप गई।
और फिर एक बार अकेली प्रिया को सोशल मीडिया की दुनिया ने घेर लिया और एक चेहरा उभर कर आया! एक चेहरा, मगर तकरार अलग। काम एक, मगर पार्टी अलग। उन दोनों की पार्टी के बीच इतनी दुश्मनी कि समर्थकों के बीच तलवार खिंची रहती। कभी-कभी प्रिया को लगता कि क्या यही राजनीति है, क्या है वह जिसके लिए लोग दीवाने हैं। दो पार्टी, एक को हारना है और एक को जीतना है, मगर नीचे वाले लोग इतना उत्तेजित क्यों हो जाते हैं कि चुनाव के दौरान अपशब्द बोलने लगते हैं!
मगर वह कुछ समझ नहीं पाती। जब-जब उसका चेहरा याद आता तो वह बस मुस्करा कर झेंप जाती। उसे याद आने लगती उसके ट्रेंड के मुकाबले अपना ट्रेंड जिताने की जिद, और चुटकुलों वाले पोस्टर्स से एक-दूसरे की पार्टी पर वार! दिन में कई-कई बार तकरार, मैसेंजर में बातचीत!
मैसेज की आस में थकी और निराश प्रिया चाय की दुकान पर रुक गई और फिर से मोबाइल से खेलने लगी। उसके फॉलोअर्स उसके द्वारा पोस्ट की गई फीलिंग रिलैक्स्ड की पोस्ट पर कमेंट देते जा रहे थे। हार कर प्रिया ने फिर से मैसेंजर बॉक्स चेक किया। पर उसे खाली देख कर प्रिया का दिल टूट गया। कल तक तो उसके स्टेटस डालने के बाद वह मैसेंजर में रोज कुछ न कुछ लिखता था, पर आज, प्रिया ने एक बार फिर से मैसेंजर रिफ्रेश किया, पर आज का कोई मैसेज नहीं था। उसके चेहरे पर कई रंग आ-जा रहे थे। उसे आखिर उसके मैसेज का इतना इंतजार क्यों है! पारुल उसके इन मैसेज को पढ़ कर उसे बहुत छेड़ती, और कई बार उसे तंग करती थी।
‘प्रिया सच में क्या ये मैसेज यों ही हैं या फिर…’ और आगे की बात उसके मुंह में ही रह जाती। क्योंकि उसके बारे में दोस्ताना बातें करना या उसका नाम भी लेना इस कमरे में गुनाह था। दोनों की आंखें आपस में उसकी बातें करती। मैसेज के आते ही लम्हे हथेली से रेत की तरह फिसल जाते।
प्रिया के कप की चाय से निकलती भाप की तरह उसके सवाल भी हवाओं में घुल रहे थे। तभी फोन पर मैसेज से चौंक गई ‘सो, यू आर फीलिंग रिलैक्स्ड! आई एम आल्सो फीलिंग रिलैक्स्ड! काम खत्म हुआ! नितिन हियर।’ प्रिया चौंक गई, नितिन के पास उसका नंबर कैसे पहुंचा! प्रिया की उंगलिया जल्दी-जल्दी फोन पर चलने लगीं ‘हाउ डिड यू गेट माई नंबर?’ वह सेंड बटन दबा कर एक घंूट ही पी पाई थी कि फोन फिर बज उठा। नितिन का ही मैसेज था, ‘हमारे पास आपका नंबर न हो, ऐसा हो नहीं सकता! खैर, आप बताइए, रिलैक्स्ड के अलावा और क्या लग रहा है? कहीं हमारा, मतलब किसी का इंतजार तो नहीं हो रहा।’ प्रिया को लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई। उसने एकदम से मोबाइल बंद कर दिया। प्रिया की आंखों के सामने नितिन की हरी टीशर्ट और माथे पर गिरते बाल आ रहे थे। यह उसे क्या हो रहा है, प्रिया ने सोचा। पर वाकई खयालों पर किसका बस चला है!
प्रिया को याद आ रहा था कि कैसे ट्रेंड चलाने की जद्दोजहद में प्रिया उस दिन आॅफिस पहुंची ही थी कि राहुल ने आवाज दे दी थी, ‘सुन प्रिया, आज यार अभिषेक नहीं आया है और रैली से लाइव अपडेट करने हैं। तेरे से तेज सोशल मीडिया पर कोई नहीं है। चल।’ राहुल बोलता जा रहा था। ‘मैं बाइक स्टार्ट कर रहा हूं। जल्दी चल।’
जब वह रैली के मैदान पर पहुंची थी, तो लोगों का रेला देख कर घबरा गई थी। मंच के एक तरफ उसके बैठने के लिए जगह बनाई गई थी। मंच पर बैठने के लिए नेताओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। प्रिया के सामने आज सब डेटा नहीं, बल्कि जिंदा लोग थे। रैली में दो लाख लोगों के आने की उम्मीद थी। उसे फील्ड से ही अपडेट भी करना था! उसने लैपटॉप में नेट कनेक्ट किया और रैली से लाइव अपडेट करने लगी। वह प्राप्त इनपुट के आधार पर सारा अपडेट करती जा रही थी। नवंबर के महीने की गुलाबी ठंडक में भी वह पसीना-पसीना हो रही थी। जहां तक उसकी नजर जाती उसे लोग ही लोग नजर आ रहे थे। प्रिया को लगा जैसे वह लोगों के समुद्र में फंस गई है। अभी तक एक कमरे के वार रूम में बैठ कर स्ट्रेटजी बना कर सोशल मीडिया अपडेट करना अलग बात थी और इस डेटा को सामने देखना एकदम अलग! ‘प्रिया आई थिंक यू नीड सम रेस्ट! तुम्हें आदत नहीं है, तो तुम जरा घूम आओ! मैं यहां पर हूं, बस अपडेट करती रहना!’ उसके साथ आए राहुल ने उससे कहा!
सचमुच प्रिया इस बड़े मैदान का एक एक कोना देखना चाहती थी, वह चाहती थी उस जूनून को महसूस करना, जिसमें बंधे हुए ये लोग यहां आए हैं। प्रिया एक कोने से दूसरे कोने में जाकर देखने लगी। उसे हल्की-फुल्की फुरफुरी होने लगी थी! आज वह काले रंग का कुर्ता और जींस पहन कर आई थी।
‘माशा अल्लाह! गजब लग रही हैं आप! पता नहीं था कि रैली में इतनी खूबसूरती भी उतर आएगी!’ प्रिया यह सुन कर चौंक गई! लाखों की भीड़ में ऐसा कौन था, जो उसे इतने गौर से देख रहा था। प्रिया एकदम से उस आवाज की गहराई मे खो गई। उसके शब्द दिल तक पहुंच गए। प्रिया का खून जैसे जम रहा था। गुलाबी सुबह प्रिया के गुलाबी गालों पर गुलाबी रंग कर रही थी।
प्रिया ने एकदम से मुड़ कर देखा। उसके पीछे ही हरे रंग की टीशर्ट में एक गोरा लड़का खड़ा था। उसके माथे पर काले बाल लहरा रहे थे। वह गौर से प्रिया को देख रहा था। प्रिया को उस पर बहुत गुस्सा आया। इतने दिन हो गए थे उसे पार्टी के लिए काम करते हए, मगर ऐसी कोई हिमाकत न तो पार्टी कैडर ने की थी और न ही किसी कार्यकर्ता ने। प्रिया का गुस्सा सातवें आसमान पर था। हिम्मत कैसे हुई, इस तरह सरेआम बात करने की! ‘ओ, भाई साहब! आप हैं कौन और यहां मेरे पास आने की हिम्मत आपकी कैसे हुई। आप जानते नहीं हैं मैं कौन हूं!’ प्रिया ने पार्टी की हाईटेक कार्यकर्ता होने का रूआब गांठना चाहा।
वह हंस रहा था। ‘अभी-अभी तो मिले हैं साहब, इतनी जल्दी भी क्या है! जान भी लेंगे और पहचान भी! वैसे भी सोशल मीडिया के जमाने में किसी को जानना क्या बड़ी बात! प्रिया जी! और नजदीकियों पर खफा न होइए। इतने लोगों को बुलाएंगी तो टकराएंगे ही।’ प्रिया को एकदम से झटका लगा! ओह, यह तो उसे जानता है! तभी उसका ध्यान मंच पर गया। मंच पर नेताजी आ गए थे, राहुल उसे खोजता हुआ उधर ही आ रहा था! ‘प्रिया, प्रिया! आओ, लाइव अपडेट का समय हो गया!’
प्रिया उस अजनबी को देखते हुए राहुल के साथ भाग गई। मगर उसे अपनी पीठ पर दो आंखों की चुभन महसूस हो रही थी। आखिर वह कौन था और उसे कैसे जानता था। प्रिया बार-बार मुड़ कर देख रही थी! ‘जल्दी आओ, प्रिया, लैपटॉप सम्हालो! बॉस का मैसेज बार-बार आ रहा है! और तुम नितिन के साथ क्या कर रही थीं उधर!’ राहुल ने लगभग उसे डपटते हुए कहा!
‘कौन नितिन!’ प्रिया ने लैपटॉप आॅन करते हुए पूछा था।
‘अरे यार नितिन! हमारी अपोजिट पार्टी के वार रूम का हेड! बॉस की नजर में आ गया तो समझो गए! और अब काम सम्हालो! वह भी यहां पर अपने लोगों के साथ आया है, अपने हिसाब से रैली की फोटो लेने। तुम इलेक्शन तक उससे दूर ही रहना! जल्दी से अपडेट कर! और नितिन को अपने एकाउंट से फॉलो कर, आॅफिशियल एकाउंट से मैं कर रहा हूं। पर तू देख वह क्या अपडेट कर रहा है!’
प्रिया को काटो तो खून नहीं था। ओह! यह वही नितिन है, जिसकी वार रूम स्ट्रेटजी को कभी-कभी देखती थी! ओह हां! उसने अपनी प्रोफाइल में पार्टी का झंडा लगा रहा था, इसलिए वह पहचान नहीं पाई! मगर अब! प्रिया का मन उस खुशबू में बस गया था। उसे वह खुशबू उसकी तरफ खींच रही थी और उस फुसफुसाहट में, जो उसके कानों के एकदम करीब थीं, उस फुसफुसाहट में ऐसा क्या था! उसकी आंखों के सामने से नितिन का चेहरा नहीं जा पा रहा था।
जैसे ही उसने अपने एकाउंट से नितिन को फॉलो किया, वैसे ही मैसेंजर में नितिन की तरफ से मैसेज आया ‘थैंक्स फॉर फॉलोविंग।’ तभी मंच से भाषण को अपडेट करना शुरू करना कर दिया था। नितिन को उसने परे कर दिया। एकदम से मैसेज की आवाज से चौंकी वह- ‘आप बहुत ही मेहनती कार्यकर्ता हैं!’ प्रिया के चेहरे पर मुस्कान आते-आते रुक गई! फिर से मैसेज आया- ‘हुजुर मुस्करा लीजिए, दुश्मन हमारी पार्टियां हैं, हम लोग नहीं! हम लोग हाड़ मांस के आदमी हैं, जिनमें दिल है।’
प्रिया मैसेज पढ़ कर मुस्कराई और एक और मैसेज का इंतजार करने लगी। मगर जैसे जैसे रैली में भाषण बढ़ते जा रहे थे, नितिन की वाल पर अपडेट बढ़ते जा रहे थे और उसकी वाल पर उसके फॉलोअर्स के पास उसकी पार्टी के अपडेट नहीं पहुंच रहे थे। उसने नितिन का खयाल दिल से हटाया और अपडेट करने लगी। जल्द ही उसके फॉलोअर्स के कारण उसकी पार्टी का हैशटैग ट्रेंड करने लगा था। रैली के बाद नितिन का मैसेज उसके मैसेज बॉक्स में चमक रहा था ‘वेल डन!’ प्रिया का चेहरा और दिल दोनों ही आज गुलाबी हो रहे थे। चेहरा तो ट्रेंड के टॉप में रहने के कारण और दिल शायद बेवजह या फिर कुछ फुसफुसाहटें उसके दिल को गुलाबी कर रही थीं।
दिल और दिमाग के इस कशमकश में फंस कर थकी प्रिया आॅफिस आकर वहीं सो गई थी। सोते-सोते प्रिया को लगा जैसे उसके कानों में कोई फुसफुसा रहा है, ‘अरे हुजूर! जाग भी जाइए!’ नवंबर की रात में प्रिया एकदम से चौंक कर उठ गई थी। उसके माथे पर पसीना था। बार-बार वे आंखें उसका पीछा कर रही थीं। जब प्रिया ने उसे मुड़ कर देखा था तो उसकी सांसों से भी वह टकरा गई थी। महज कुछ पलों की सांसों की गर्माहट उसे इतनी पिघला देगी कि वह पसीना-पसीना हो जाएगी, उसे नहीं पता था। वह वार रूम के कमरे के बाहर बालकनी में आ गई थी। नींद नहीं आ रही थी! चांद को देखते-देखते वह कहीं खो रही थी। तारों को देखते-देखते उसने फोन भी उठा लिया था, सोशल मीडिया आॅन किया। आज का उसका हैशटैग बहुत सफल रहा था, टॉप टेन ट्रेंड में रहा था। नितिन की पार्टी का ट्रेंड टॉप टेन से बाहर था।
उसने नितिन के अपडेट और रीअपडेट पर नजर डाली। उसकी वाल पर गई और उसके अपडेट देखने लगी। रैली की एक तस्वीर में वह खिलखिला रही थी और उस पर तीन हजार लाइक्स थे। प्रिया को हंसी आ गई थी कमेंट पढ़ कर। तभी मैसेज बॉक्स पर उसकी नजर गई। नितिन के चार मैसेज थे- ‘आपकी तस्वीर आपको नजर कर रहा हूं। जरा पार्टी लाइन से हट कर देखिए, कितनी खूबसूरती बिखरी है!’ नितिन का यह मैसेज पढ़ कर प्रिया को कुछ हुआ। उसने देखा कि नितिन उसे काफी समय से फॉलो कर रहा है, मगर उसने राहुल के कहने पर आज नितिन को फॉलो किया, क्योंकि अब तक रैली के लाइव अपडेट का काम अभिषेक का था।
मगर उस दिन के बाद वह अधिकतर रैलियों में जाने लगी थी, बार-बार किसी से मिलने की आस लिए। क्या पता कब कौन किससे टकरा जाए। इत्तेफाक की चाहत बहुत बुरी होती है। वह टकराना चाहती थी, पर उसके बाद से वह टकराई नहीं। बार-बार उसे लगता कि कोई पीछे से आएगा और फिर से उससे कुछ कहेगा, मगर वह फिर न आया। वह उस फुसफुसाहट की गर्माहट को अपने कानों में फिर से महसूस करना चाहती थी, पर उस दिन के बाद वह नहीं मिला।
वह उस दिन के बाद से हैशटैग की रेस में कंपटीशन करते हुए मैसेज बॉक्स में मैसेज की आदी हो गई। प्रिया को लगता जैसे नितिन उसके लिए कुछ तो खास है। पर इत्तेफाक रोज हुए नहीं और उसे नितिन दोबारा मिला नहीं। और आज तो जैसे मिलने के सभी बहाने बंद हुए। प्रिया उन बंद होते दरवाजों को देख रही थी, महसूस कर रही थी, पर उन्हें बंद होने से रोक नहीं पा रही थी। रास्ते अक्सर अकेले ही होते हैं, अगर साथी मिल जाए तो सफर अच्छा कट जाता है। अब तक प्रिया का सफर बहुत ही तकरार भरा रहा था। पर वह प्यार भरी नोंकझोंक थी। अब अकेलापन है, सड़क पर चलती प्रिया को बहुत ही अकेला महसूस हो रहा था, रोज-रोज की नोंक-झोंक अब नहीं होगी, और अब नितिन से बात करने का भी कोई बहाना नहीं।
मगर ऐसा क्या है, जो वह नितिन को इतना याद कर रही है, उसकी आंखों में उसकी हरे रंग के टीशर्ट वाली फोटो ने जैसे कब्जा कर लिया है।
प्रिया सड़क पर पत्थर को मारते हुए एक कोने से दूसरे कोने में ले जाने लगी। तभी उसकी नजर कोने वाले मंदिर पर गई, जहां पर आरती के लिए लोग इकट्ठा हो गए थे। प्रिया मंदिर के बाहर बने चबूतरे पर बैठ गई। कभी-कभी मन केवल चुप रह कर किसी का इंतजार करना चाहता है, वह इंतजार जो किसी के कहने पर नहीं होता, न किसी वादे पर, न किसी इरादे पर, बस भरोसे की एक महीन रस्सी पर, मन इंतजार करता है, कि कोई आएगा और जरूरत आएगा।
‘तो यहां बैठ कर मेरा हमारा इंतजार हो रहा है हुजूर।’ अचानक प्रिया के कानों में वह सरसराहट दौड़ गई। चौंकते हुए प्रिया ने गर्दन उठाई। ओह, यह तो वही आवाज है।
‘मुझे तो लगा था कि आप रिलैक्स्ड हैं, तो हमारा इंतजार अपने मनपसंद गोलगप्पे के ठेले पर करेंगी, पर आप तो हमें यहां पर बैठ कर याद कर रही हैं।’ वह बोलता जा रहा था। प्रिया को लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई। वह अचकचाते हुए बोली, ‘मैं क्यों आपको याद करूंगी! वह तो खालीपन लग रहा था, इसलिए यहां बैठ गई थी।’
नितिन जैसे ही उसके करीब आया, प्रिया को लम्हों से इश्क हो गया। यह नजदीकी आॅनलाइन नहीं थी। आज कोई भी ऐसी मजबूरी न थी कि वह नितिन के इस साथ को महसूस न कर सके। इतने दिनों से वह और नितिन जो दूर रह कर महसूस करते थे, जिस शिद्दत से महसूस करते थे, वह लम्हा आज उनके साथ था, आज दोनों ही एक साथ थे, मगर पार्टी के नहीं, दिल के वॉलंटियर बन कर।
नितिन उसके पास बैठकर बोलता जा रहा था ‘प्रिया हम आज तक केवल लड़ते आए हैं। अब समय लड़ाई से आगे बढ़ने का है, क्या तुम्हें लगता है कि हम कभी अच्छे दोस्त बन पाएंगे?’ प्रिया चुप थी, शायद वह भी कुछ घंटे पहले यही सोच रही थी। उसने हल्के से नितिन के सीधे हाथ की तर्जनी को थाम लिया जैसे दोस्ती के लिए तिनके भर का साथ।
वार रूम के दो योद्धा वार खत्म होने के बाद शाम के गुलाबी रंग में नहा रहे थे।
