मानस मनोहर
आजकल स्वास्थ्य और आहार विज्ञानी जोर देते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए अपने भोजन में मोटे अनाज जरूर शामिल करें। शहरों में रहने वाले लोगों में खानपान संबंधी आदतें बिगड़ने से उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। लगातार नरम और मुलायम भोजन करने से उनका पाचन तंत्र प्रभावित हो रहा है। ऐसे में मोटे अनाज और दालों को अपने भोजन में शामिल कर स्वादिष्ट भोजन तैयार कर सकते हैं। इस बार कुछ ऐसे ही व्यंजन।
बेसन के गट्टे
सन के गट्टे राजस्थान की लोकप्रिय सब्जी है। यों दूसरे क्षेत्रों में भी इसे बनाया और पसंद किया जाता है, पर कई लोगों को शिकायत रहती है कि गट्टे मुलायम नहीं बन पाते या उसकी ग्रेवी लजीज नहीं बन पाती। इसलिए आसान तरीके से मुलायम और लजीज गट्टे बनाने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। बेसन के गट्टे बनाते समय दो चीजें अलग-अलग तैयार करनी पड़ती हैं- एक तो गट्टे और दूसरा उसकी ग्रेवी। दोनों के कुछ खास नुस्खे हैं।
पहले, गट्टे बनाने के लिए एक कप बेसन लें। उसमें डालने के लिए गरम तवे पर आधा चम्मच की मात्रा में साबुत धनिया, जीरा, सौंफ और अजवायन को सेंकने के बाद दरदरा कूट लें। इन सबको बेसन में डालें। फिर आधा चम्मच कुटी लाल मिर्च, जरूरत भर का नमक, चौथाई चम्मच हल्दी और चुटकी भर हींग डालें। फिर दो चम्मच देसी घी और एक चम्मच रिफाइंड तेल या कोई भी खाने का तेल डालें। इन सारी चीजों को रगड़ कर ठीक से मिलाएं। इसे गूंथने के लिए आधा से तीन चौथाई कप दही लें और उसमें से थोड़ी-थोड़ी दही डालते हुए बेसन को आटे की तरह गूंथ लें। ध्यान रहे कि बेसन पतला न हो। हो सकता है, गूंथते समय बेसन हाथों में चिपके, इसलिए पहले चम्मच का इस्तेमाल कर सकते हैं। फिर हाथ में तेल लगा कर गूंथें। इस गुंथे हुए बेसन को कम से कम पंद्रह मिनट तक आराम करने के लिए रख दें।
इस बीच में ग्रेवी के लिए तैयारी कर लें। इस ग्रेवी में प्याज, लहसुन का उपयोग न करें। दो मध्यम आकार के टमाटर ले सकते हैं। टमाटरों को मिक्सर में पीस कर पेस्ट बना लें। फिर एक कप दही को छन्नी या कपड़े से छान लें, ताकि उसकी गांठें न रहें। इसी दही में एक चम्मच या अपने स्वाद के अनुसार कुटी लाल मिर्च, चौथाई चम्मच हल्दी, एक चम्मच धनिया पाउडर, एक चम्मच सब्जी मसाला डाल दें।
एक कड़ाही गरम करें और उसमें बिना तेल डाले एक चम्मच बेसन को लगातार चलाते हुए सुनहरा होने तक सेंक लें। इस बेसन को छन्नी से छान कर गांठें दूर करें और ठंडा होने के बाद दही में मिला दें। फिर जरूरत भर का नमक डाल कर सारी चीजों को अच्छी तरह फेंट लें और इस घोल को अलग रख दें। अब गट्टे की तैयारी कर लें। इसके लिए एक भगोने में दो से तीन कप पानी लें और उसे उबलने के लिए रख दें। फिर गट्टे के लिए जो बेसन गूंथा था, उसे बड़ी थाली या परात में रख कर हथेली से रगड़ते हुए मलें। जैसे रसगुल्ले बनाने के लिए छेने को मलते हैं उसी तरह बेसन को मलें। जितना मलेंगे, गट्टे उतने ही मुलायम बनेंगे।
बेसन गुंथ जाए, तो उसमें से छोटे-छोटे पेड़े लेकर बेलनाकार बनाएं और उन्हें उबलते हुए पानी में डालते जाएं। थोड़ी देर ढक्कन लगा कर मध्यम आंच पर पकने दें। जब गट्टे पानी पर तैरने लगें और उनकी सतह पर सफेद गोल दाने की तरह उभर आएं, तो समझें कि गट्टे पक कर तैयार हैं। आंच बंद कर दें। गट्टों को पानी से बाहर निकालें और ठंडा होने दें। गट्टों को मनचाहे आकार में काट लें। फिर एक कड़ाही में पकौड़े तलने लायक तेल गरम करें। जब तेल खूब गरम हो जाए, तो उसमें कटे हुए गट्टों को डाल कर दो मिनट के लिए सेंक लें और फिर बाहर निकाल लें। इससे स्वाद अच्छा आता है। अगर तेल से परहेज है, तो इन्हें न तलें।
अब कड़ाही में एक से डेढ़ चम्मच तेल गरम करें। उसमें जीरा, सौंफ, अजवाइन और राई का तड़का दें और पिसे हुए टमाटर का पेस्ट डाल कर लगातार चलाते हुए तेल छोड़ने तक पकाएं। जब तेल छोड़ने लगे, तो उसमें फेंटा हुआ दही डालें और उसे भी लगातार चलाते हुए तेल छोड़ने तक धीमी आंच पर पकाएं। अब जिस पानी में गट्टे उबाले थे, उसे इसमें डाल दें और उबाल आने तक पकाएं। फिर गट्टे उसमें डाल कर गाढ़ा होने तक पकाएं। ऊपर से एक चम्मच कसूरी मेथी मसल कर डालें। फिर एक चम्मच देसी घी में हींग और लाल मिर्च पाउडर का तड़का लगा कर डाल दें। बेसन के नरम, स्वादिष्ट गट्टे तैयार हैं।
थालीपीठ
यह महाराष्ट्र का लोकप्रिय व्यंजन है। यह दरअसल, गेहूं, बाजरा, ज्वार, चना दाल, उड़द और मूंग दाल को सेंक कर दरदरा पीसे हुए आटे से बनी मोटी रोटी होती है। वैसे बाजार में थालीपीठ का आटा मिलता है, पर आप इसे घर में भी तैयार कर सकते हैं। बताए गए सभी अनाजों को महक आने तक अलग-अलग सेंक लें और फिर उसमें जीरा, साबुत धनिया, अजवाइन, लाल मिर्च डाल कर मिक्सर में दरदरा पीस लें।
इस आटे में जरूरत भर का नमक, चुटकी भर हींग, थोड़ा-सा बारीक कटा प्याज, हरा धनिया पत्ता डालें और गुनगुने पानी से गूंथ कर हाथ पर रोटी की तरह फैलाते हुए गोलाकार बनाएं और तवे पर सेंकें। अगर इसकी रोटी बनाने में दिक्कत हो, तो नीचे प्लास्टिक बिछा कर फैला सकते हैं। मगर ध्यान रहे कि सारा आटा एक बार में न गूंथें। थोड़ा-थोड़ा करके गूंथें और रोटी बनाते जाएं। थालीपीठ मूंगफली, लहसुन और लाल मिर्च की सूखी चटनी और छाछ के साथ खाने में अच्छी लगती है। यह मोटे अनाजों वाला उत्तम आहार है।

