कई राज्यों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से बाढ़ग्रस्त इलाकों के 1.09 लाख मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर ढह गए। पहले से ही कई दिक्कतों का सामना कर रहे किसानों के साथ इस बार की बारिश ने भी कोई नरमी नहीं बरती है। बाढ़ का पानी करीब 14.14 लाख हेक्टेयर फसलों को बर्बाद कर चुका है। वहीं बीस हजार मवेशियों के भी लापता होने की खबर है। गरीब मजदूरों और किसानों के लिए इस मानसून की बारिश ने कई मुश्किलें पैदा कर दी हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों के लोग जहां रहने, खाने जैसी दिक्कतों से दो-चार हैं, वहीं अब चुनौती बाढ़ के बाद पनप रही बीमारियां भी हैं। बिहार में बाढ़ के बाद अब डेंगू-चिकनगुनिया की मार से लोग त्रस्त हैं। पूरे प्रदेश में डेंगू और चिकनगुनिया से प्रभावित लोगों की संख्या नौ सौ के पार पहुंच गई है। हालात बदतर हैं। ऐसे में बाढ़ग्रस्त इलाकों पर अब महामारी का खतरा मंडरा रहा है।

राज्यों में बाढ़ से हुई मौतें
गृह मंत्रायल के मुताबिक महाराष्ट्र में सबसे अधिक यानी 382 लोगों की मौत बाढ़ की वजह से हुई। इसके करीब बाईस जिले बाढ़ से प्रभावित रहे। वहीं 369 लोग घायल हुए है और करीब 7.19 लाख लोगों को शिविरों में शरण लेनी पड़ी। इसके बाद दूसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल है, जहां 227 लोगों की जान इस प्रकोप की वजह से गई। वहीं राज्य के करीब पैंतालीस हजार लोगों को शिविरों में शरण लेनी पड़ी। बिहार में अब भी स्थिति चिंताजनक है। यहां अभी तक करीब 165 लोगों की मौत हो चुकी है, तो एक लाख से अधिक लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। मध्यप्रदेश में भारी बारिश, भूस्खलन और इससे हुई बाढ़ की वजह से 182 लोगों ने जान गंवाई है। वहीं कुछ लोग लापता भी हैं। साथ ही 32, 996 लोग शिविरों में शरण लेने पर मजबूर हुए हैं। केरल में भी हालात बेहद खराब हैं। राज्य में इस साल हुई बारिश में 181 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। साथ ही तेरह जिलों के पंद्रह लोगों के गुमशुदा होने की सूचना है। वहीं 4.46 लाख लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली है। असम में भी बाढ़ का कहर जारी है। यहां 97 लोगों की मौत हुई है और 5.35 लाख लोग शिविरों में रहने पर मजबूर हैं। कर्नाटक में भी 106 लोगों की मौत का कारण इस बार की बारिश बनी। गुजरात में जहां 170 लोगों की मौत हो गई, वहीं राहत शिविरों में भी सत्रह हजार से अधिक लोगों ने शरण ली है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन पांच शीर्ष देशों में शामिल है, जिन पर प्राकृतिक आपदाओं की मार विश्व में सर्वाधिक पड़ती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल प्राकृतिक आपदाओं से करीब सोलह सौ लोगों की मौत हो जाती है और देश की करीब अठारह सौ करोड़ रुपए की संपत्ति का नुक्सान होता है। वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1998 से 2017 के बीच भारत को बाढ़, सूखा और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से करीब अस्सी अरब डॉलर का भारी नुकसान हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से दुनिया भर में हर साल करीब दो करोड़ साठ लाख लोग गरीबी में जीवन बिताने को मजबूर हो जाते हैं। 1998 से लेकर 2017 के बीच दुनिया में आई सभी प्राकृतिक आपदाओं में चौवालीस फीसद हिस्सा बाढ़ का है।