शिव मोहन यादव

दादा हमको खेल खिलाओ,
अच्छी-अच्छी बात बताओ!
मम्मी पापा डांटे यदि तो,
तुम मेरी बन जाओ ढाल!
आओ हम खेलें फुटबॉल!

बेटा नहीं खेलने के दिन,
क्यों तुम मुझको करते हो पिन?
रूठो नहीं पास में आओ,
ऐसे नहीं फुलाओ गाल!
आओ हम खेलें फुटबॉल!

यह सुनकर बच्चा मुस्काया,
दादाजी ने गले लगाया!
चले मटकते मैदान में तो,
बदल गई पोते की चाल!
लगे खेलने वे फुटबॉल!

मारी किक तो हुआ कमाल!
जम कर होने लगा धमाल!
सभी देख कर दंग रह गए,
दादा पोते का भौकाल!