दिविक रमेश
हवाई जहाज में उपहार
मुझे मिला उपहार प्लेन में
अंकल बोले मुझको दे दो।
लेकिन अंकल मुझे मिला है
क्यों कहते फिर मुझको दे दो।
तो मुझको भी दिलवा दो न
बोले, प्लेन की दीदी जी से
बोली, ठहरो कहती हूं मैं
देने को यह दीदी जी से।
दीदी से बोली तो दीदी
बोली अंकल को बोलो तो
पहले वे बच्चा हो जाएं
फिर उपहार मुफ्त में पाएं।
हंसी आ गई मुझको सुन कर
दीदी की वह बात मजे की।
सच्ची सूरत अंकल जी की
बनी हुई थी बड़े मजे की।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
छेना/छन्ना
दूध को फाड़ कर बना पनीर जैसा तत्त्व, जिससे रसगुल्ला आदि मिठाइयां बनती हैं, उसे छेना कहते हैं। मगर छन्ना एक प्रकार का महीन कपड़ा होता है, जिसका उपयोग किसी चीज को छानने के लिए किया जाता है।
जड़ना/झड़ना
किसी चीज को दूसरी चीज में इस प्रकार बैठाना कि वह निकल या उखड़ न पाए, उसे जड़ना कहते हैं। जैसे गहनों में नगीने जड़े जाते हैं। जबकि झड़ना का अर्थ है गिर जाना। जैसे पत्ते झड़ते हैं।
