फहीम अहमद
बस्ते में पेड़
सोचो-सोचो, समझो-बूझो
कहां-कहां हैं पेड़?
पेड़ लगे हैं प्यारे प्यारे
बगिया में देखे हैं सारे।
तीन पेड़ हैं बड़े घनेरे
लगे हुए स्कूल में मेरे।
और पार्कों में देखे हैं
खूब वहां हैं पेड़।
पेड़ हमारे कमरे में है
पेड़ तुम्हारे कमरे में है।
पेड़ न केवल रस्तों में है
पेड़ हमारे बस्तों में है।
मैंने सीखा समझा जाना
अरे यहां हैं पेड़।
कुर्सी दरवाजे टेबिल में
कापी किताब पेंसिल में।
कितने सारे पेड़ छिपे हैं
ये सब मुझको आज दिखे हैं।
ये सब चीजें वहीं मिलेंगी
खूब जहां हैं पेड़।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
फूल / फुल / फुल्ल
फल आने से पहले पेड़ों-पौधों में फूल आते हैं। फूल गुलाब, गेंदा, जुही वगैरह के तो आपने भी देखे होंगे। पर मात्रा गलत लग जाए तो वह अंग्रेजी का फुल बन जाता है। फुल यानी पूरा, पूरी तरह भरा हुआ। और इसमें आधा ल जुड़ कर फुल्ल बने तो उसका अर्थ हो जाता है खिला हुआ। ‘फुल्ल कुसुमित’ तो सुना ही होगा।
खरा / खड़ा / खारा
पूरी तरह शुद्ध, बिना किसी खोट वाली वस्तु को खरा कहते हैं- जैसे खरा सोना। और र की जगह ड़ लग जाए तो वह बैठे के बजाय खड़ा हो जाता है। और ख में एक मात्रा अतिरिक्त हो जाए तो वह खारा यानी नमकीन हो जाता है। जैसे समुद्र का पानी खारा होता है।
