कविता
संध्या नवोदिता
अकड़ी का बकड़ा
अकड़ी का बकड़ा, जाले में मकड़ा
मकड़े की देखो चाल सयानी
नीला है अंबर, कितना सुंदर
उसमें पतंग उड़ती जाए धानी
मछली का घर है पानी के अंदर
मरने के डर से आए न बाहर
हाथ न लगाओ, बाहर न लाओ
मछली का जीवन होता है पानी
उड़ता है बादल, रूई के जैसा
बना भाप से देखो ऐसा
बरसेगा यह जब, नाचेगा मोर तब
बरखा है सब ऋतुओं की रानी
एक था राजा, उसकी रानी
नानी की बातें और कहानी
इनको सुनो तुम, इनको गुनो तुम
काम की बातें कहती है नानी।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
पाट/पाठ
रेशम, रेशमी कपड़ा, पटसन और राज सिंहासन, नदी की चौड़ाई, पटरा, पीढ़ा और उस पत्थर को भी पाट कहते हैं, जिस पर धोबी कपड़ा धोता है। जबकि पाठ का अर्थ होता है पढ़ना, पढ़ने का विषय, नियम आदि।
संग/संघ
मिलना, मिलन, साथ रहने को संग कहते हैं। इसके अलावा फारसी में संग का अर्थ होता है पत्थर। जबकि संघ का अर्थ होता है समूह, समुदाय, संघठित समुदाय। ऐसे राज्यों के समूह को भी संघ कहते हैं, जो स्वतंत्र होते हुए भी किसी केंद्रीय व्यवस्था से संचालित होते हैं।
