विश्व वन्यजीवन कोष यानी वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के सभी जंगलों से रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। वन आधारित उद्योगों से सीधे तौर पर तेरह लाख लोगों को रोजगार मिलता है, जबकि अनौपचारिक रूप से दुनिया भर में इकतालीस लाख लोगों को वन जीविका प्रदान करते हैं। मगर अनियंत्रित, अनियोजित और अत्यधिक अमानवीय गतिविधियों की वजह से जंगल गायब हो रहे हैं। वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड के अनुसार, हम पिछले पचास वर्षों में दुनिया के आधे से ज्यादा जंगल खो चुके हैं।
भले ही हम आधुनिकता का चोला पहन लें, शहरों में अवास करें और जंगलों को भूल जाएं, लेकिन इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ सकते कि जंगल ही हमारे जीवन का आधार हैं। ये जंगल हमें बहुत कुछ देते हैं। मसलन, भोजन, लकड़ियां, र्इंधन और दवाइयां। आयुर्वेद जंगल के बिना अधूरा है। यहीं से विभिन्न किस्म की जड़ी-बूटियां प्राप्त होती हैं। इतना ही नहीं, जंगल पर्यावरण को अपनी मुट्ठी में दबाए रखता है। यानी जंगल की वजह से ही पर्यावरण की शुद्धता कायम है। शुद्ध जल, मृदा संरक्षण और शुद्ध हवा मिल पाती है। बादलों को आकर्षित कर पानी भी बरसाते हैं जंगल। जंगल न जाने कितने ही वन्यजीवों का बसेरा हैं और पांच हजार से ज्यादा वस्तुओं का निर्माण जंगल की मदद से होता है, जैसे घर, फर्नीचर, पेंसिल, किताब, आदि।
कैसे-कैसे जंगल
आम भाषा में जंगल यानी पौधे-पेड़ों का समूह, जहां भांति-भांति के जीव-जंतु रहते हैं। लेकिन भगौलिक स्तर काफी व्याप्क होते हैं जंगल। सघन वन (डेंस फॉरेस्ट) ऐसे जंगल होते हैं, जो इतने घने होते हैं कि यहां धरती भी मुश्किल से दिखती है। सामान्य वन (मॉडरेट फॉरेस्ट) राष्ट्रीय उद्यान या रिजर्व फॉरेस्ट होते हैं। खुला जंगल (ओपन फॉरेस्ट) ऐसे शहरी क्षेत्रों में होते हैं और शहर के बीचोबीच या आसपास की पहाड़ियों पर मिलते हैं। यहां पेड़ छितरे हुए से लगे होते हैं। कच्छ या गरान (मैंग्रूव्ज फॉरेस्ट) समुद्री जल के आसपास पनपते हैं। पश्चिम बंगाल का सुंदरवन इसका उदाहरण है। यह जंगल भी काफी घना होता है, लेकिन इसमें ज्यादातर ऐसे पेड़-पौधे उगते हैं, जो नमकीन पानी में अपने को जीवित बनाए रख सकते हैं।

