मानस मनोहर
खिचड़ी का नाम सुनते ही कई लोग नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं। उनका मानना है कि यह बीमार लोगों का भोजन है। मगर खिचड़ी के स्वाद में जो विविधता और गुण हैं, वह दूसरे व्यंजन में नहीं। आयुर्वेद में भादों के महीने यानी जो महीना अभी चल रहा है, उसमें खिचड़ी और घी का सेवन स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम माना गया है। कई जगह मंदिरों में प्रसाद के रूप में खिचड़ी बांटी जाती है। देश का शायद ही कोई हिस्सा हो, जहां खिचड़ी न खाई जाती हो। इस तरह खिचड़ी पकाने के तरीके में भी विविधता है। इस बार खिचड़ी के बारे में।
आमतौर पर खिचड़ी दाल और चावल को एक साथ मिला कर हल्दी, नमक, हींग डाल कर खूब सारा पानी के साथ पका ली जाती है। फिर इसमें जीरे का तड़का दे दिया जाता है। मगर इसके अलावा हर इलाके की खिचड़ी के अलग-अलग रंग-रूप-स्वाद हैं। कई जगह शादियों में भी खिचड़ी परोसी जाती है, जैसे मारवाड़ी विवाहों में खिचड़ी जरूर रखी जाती है। इसी तरह महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में रेस्तरां, होटल वगैरह में भी खिचड़ी व्यंजन के तौर पर शामिल होती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश आदि के पारंपरिक घरों में तो शनिवार की रात को खिचड़ी खाने का रिवाज-सा है। गुजरात की खिचड़ी के अपने रंग हैं।
खिचड़ी का मतलब केवल आसानी के लिए चावल-दाल को एक साथ पका लेना नहीं होता। इसमें तरह-तरह की सब्जियां डाल कर भी पकाया जाता है। कई जगह इसे पुलाव की तरह सूखा पकाया जाता है, तो कई जगह खूब पानी डाल कर। इसके अलावा केवल चावल की खिचड़ी नहीं बनती। इसमें दलिया, साबूदाना वगैरह का भी इस्तेमाल किया जाता है।
इस मौसम में चूंकि पाचनतंत्र मंद होता है, हल्का भोजन ही लेना चाहिए। इसीलिए इस मौसम में खिचड़ी खाने को कहा जाता है। खिचड़ी में जरूरी नहीं कि दाल का उपयोग करें ही। लौकी, गाजर, गोभी, साग आदि जो भी इस मौसम में सब्जी उपलब्ध है, उसके साथ चावल, नमक, हल्दी, हींग डाल कर प्रेशर कुकर में खूब गला लें और खाएं, यह पेट के लिए मुफीद है। यही प्रक्रिया दलिया और साबूदाने के साथ भी अपना सकते हैं। मगर कुछ खास इलाकों की कुछ खास खिचड़ी बनानी हो, तो उसकी विधि जानना जरूरी है।
मारवाड़ी खिचड़ी
रवाड़ी खिचड़ी को गट्टे का पुलाव भी कहते हैं। यह एक तरह से वेज पुलाव की तरह होता है। उत्तर प्रदेश की तहरी भी कुछ ऐसी ही होती है। इसमें खड़े मसालों और सब्जियों का उपयोग होता है। दाल नहीं इस्तेमाल की जाती। मारवाड़ी खिचड़ी बनाने के लिए कुछ तैयारी करनी जरूरी होती है। इसके लिए चावल को आधा घंटा पहले भिगो कर रख दें। इसके लिए बासमती चावल लें, तो स्वाद बेहतर आएगा। फिर, इसमें चूंकि गट्टे का इस्तेमाल होता है, इसलिए पहले गट्टे बना लें। बेसन में नमक, चुटकी भर हल्दी, हींग, लाल मिर्च पाउडर, अजवाइन के दाने और भरपूर घी या तेल डाल कर ठीक से रगड़ कर मिला लें। पानी का छींटा देते हुए कड़ा गूंथ लें, जैसे गट्टा बनाने के लिए गंूथते हैं। इसके छोटे-छोटे टुकड़े काट लें। इन गट्टों को कड़ाही में हल्का घी डाल कर आधा पकने तक धीमी आंच पर तल कर अलग रख लें। खिचड़ी में देसी घी का उपयोग करें, तभी स्वाद आता है।
अब इसमें डालने के लिए एक आलू छील कर छोटे टुकड़ों में काट लें। फूल गोभी के कुछ टुकड़े ले लें। इन्हें भी अलग-अलग आधा पकने तक तल लें। फिर हरी मटर के दाने और टुकड़ो में कटी शिमला मिर्च को भी अलग-अलग तल लें। सारी सब्जियों और गट्टे को एक साथ ठंडा होने के लिए रख दें। अब एक कड़ाही में दो से तीन चम्मच घी गरम करें। उसमें जीरा, साबुत धनिया, दालचीनी का छोटा टुकड़ा, चकरी फूल, कुछ साबुत काली मिर्चें, दो साबुत लाल मिर्चें, दो तेजपत्ता, दो-चार छोटी इलाइची डाल कर तड़का लें। फिर इसमें कुछ काजू के दाने डालें और तल लें। अब चुटकी भर हल्दी, लाल मिर्च पाउडर डालें और सबको मिला लें।
इस खिचड़ी में प्याज-लहसुन की जरूरत नहीं पड़ती, फिर भी अगर आपको पसंद है, तो डाल सकते हैं। फिर तड़का तैयार हो जाने के बाद भिगोया हुआ चावल डालें और उसमें चावल से दोगुनी मात्रा में पानी डाल कर ढक्कन लगा दें। उबाल आने के पांच मिनट बाद सब्जियां डाल कर मिलाएं। अगर लग रहा है कि पानी कम पड़ेगा, तो थोड़ा और गरम पानी डाल सकते हैं। फिर नमक डाल कर ढक्कन लगा दें और पकने दें। जब पानी सूख जाए, तो आंच बंद कर दें। अदरक और हरा धनिया काट कर ऊपर से डालें और खाने के लिए परोसें। खिचड़ी के साथ छाछ, रायता, दही, अचार, नीबू, पापड़ का मेल अच्छा होता है।
साबूदाने की खिचड़ी
बूदाने की खिचड़ी दोनों तरह से बनती है। पानी वाली और सूखी। इसके लिए कम से कम चार घंटे तक साबूदाने को भिगो कर रखें। भिगोते समय पानी इतना ही डालें कि साबूदाने की सतह तक आए, तभी उसके दाने-दाने अलग रहेंगे। फिर अगर पानी वाली खिचड़ी बनानी है, तो कुकर में देसी घी का तड़का लगाएं और उसमें सब्जियों और साबूदाने को साथ डाल कर भरपूर पानी के साथ दो सीटी आने तक पका लें।
अगर सूखी खिचड़ी बनानी है, तो कुछ मूंगफली के दाने और कुछ मूंग की दाल को पहले घी में तल कर अलग रख लें। फिर कड़ाही में जीरा, राई और कढ़ी पत्ते का तड़का लगाएं और जो सब्जियां आप डालना चाहते हैं, जैसे उबले हुए आलू, गाजर, बीन्स वगैरह, डाल दें। सब्जियां नहीं भी डाल सकते हैं। फिर साबूदाने में नमक, लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच सब्जी मसाला डालें और उसे चलाते हुए पकाएं। ऊपर से तली हुई मूंगफली और मूंग दाल डालें। फिर अदरक और धनिया के कटे पत्ते डाल कर ठीक से मिला लें। आंच बंद करके थोड़ी देर ढंक कर रखें, फिर नीबू निचोड़ कर खाने को परोसें।

