कविता
डॉ नागेश पांडेय ‘संजय’
अच्छी बात नहीं
बात-बात पर अकड़ दिखाना,
अच्छी बात नहीं है दीदी।
माना तुम हो बड़ी और तुम
होशियार हो, मान रहा हूं।
समझदार हो, जानकार हो,
मैं अच्छे से जान रहा हूं।
लेकिन इसका रौब जताना,
अच्छी बात नहीं है दीदी।
इतना छोटा नहीं रहा मैं,
दीदी, मैं भी होशियार हूं।
मुझसे भी छोटे हैं बच्चे,
उनसे करता खूब प्यार हूं।
जो छोटे, उनको धमकाना,
अच्छी बात नहीं है दीदी।

ऐसा करो, करो मत वैसा,
मुझको तो बतलाती हो जी।
खुद लेटे-लेटे पढ़ती हो?
आलस खूब दिखाती हो जी।
कभी न मां का हाथ बटाना,
अच्छी बात नहीं है दीदी।
शब्द-भेद: कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
बहार/बाहर: यह दोनों अलग-अलग शब्द हैं। बहार का अर्थ आनंद व मौज-मस्ती से है। किसी के आने की खुशी का इजहार करने के लिए भी बहार शब्द का प्रयोग किया जाता है। तो वहीं बाहर से अभिप्राय है सीमा से परे या अलग। किसी व्यक्ति का भीतर से बाहर से आना भी बाहर कहा जाएगा।

सामान/समान: अक्सर लोग इन दोनों शब्दों को लिखने में गलती करते हैं। सामान का मतलब किसी वस्तु से है। जबकि समान का अर्थ समानता से है। समान का प्रयोग किसी से तुलना करने के लिए भी किया जाता है।

