मानस मनोहर

बहुत से लोग समझते है कि बंगाली लोग सिर्फ मछली और चावल यानी माछ-भात खाना पसंद करते हैं। माछ-भात वहां का मुख्य भोजन जरूर है, पर शाकाहारी व्यंजन भी वहां खूब बनते हैं। बंगाल दरअसल खानपान के मामले में विविधताओं से भरा प्रदेश है। खासकर वहां की मिठाइयों में बहुत विविधता है। हर समय खाने में कुछ न कुछ मीठा जरूर शामिल किया जाता है। बंगाल में लुची, चने की मीठी दाल और मिष्टी दई का नाश्ता आम चलन में है। इस बार वही बनाने के बारे में बात करेंगे।

लुची

लुची दरअसल, अन्य इलाकों में खाई जाने वाली पूड़ी ही है, पर बंगाल में इसे आटे के बजाय मैदे से बनाया जाता है। कुछ लोग कचौड़ी की तरह इसके बीच में थोड़ा-सा मूंग दाल की पिट्ठी भी डाल देते हैं। लुची बनाने के लिए मैदे को नरम गूंथ लें। गूंथते समय थोड़ा-सा दूध डाल लें तो आटा और लोचदार हो जाता है।

अब इसमें भरने के लिए तीन-चार घंटे भिगोई और फिर निथारी हुई दो-तीन चम्मच मूंग की दाल लें। एक कड़ाही में एक चम्मच घी गरम करें। उसमें मूंग की दाल को डाल कर चलाते हुए नरम होने तक पकाएं। ध्यान रखें कि वह पूरी तरह गलने न पाए। अब उसमें थोड़ी-सी कूटी हुई लाल मिर्च, धनिया पाउडर और जीरा पाउडर डाल कर ठीक से मिला लें। दाल को कड़ाही से निकाल कर एक कटोरी में हल्का-सा दबा कर मसल लें। यह काम हाथ से ही करें। इस भरावन को अलग कटोरी में रख दें।

अब गूंथे हुए मैदे की पूड़ी बनाने लायक आकार की लोइयां तैयार करें। उनके बीच में थोड़ी-थोड़ी दाल की भरावन डाल कर लोइयों को बंद कर दें। ध्यान रहे, भरावन आधी चुटकी से अधिक न लें, नहीं तो तलते समय लुची के फटने की आशंका रहेगी।
अब लोइयों को पूड़ी की तरह बेल कर तेल में तल लें। हालांकि लुची बनाने के लिए उसमें मूंग दाल की भरावन डालना जरूरी नहीं है। इसके बिना भी लुची बनाई जाती है। नाश्ते के लिए बंगाली लुची तैयार है।

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लुची

चने की मीठी दाल

इसे बनाना बहुत आसान है। चने की दाल को कम से कम चार घंटे के लिए भिगो दें। फिर उसमें हल्दी, नमक और थोड़ी-सी चीनी डाल कर कुकर में तीन-चार सीटी आने तक पका लें। इसे पकाते समय ध्यान रखें कि दाल पूरी तरह गलने न पाए। उसके दाने नरम भर हो जाएं और साबुत दिखते रहें।

दाल पक जाए, तो एक कड़ाही में एक चम्मच घी गरम करें। उसमें जीरे का तड़का लगाएं और दाल को उसमें डाल कर एक उबाल आने तक पका लें। ध्यान रहे कि दाल गाढ़ी रहे, उसमें पानी अधिक न हो। लुची के साथ खाई जाने वाली दाल में टमाटर, प्याज, लहसुन वगैरह का उपयोग नहीं करना चाहिए। अगर उसमें थोड़ा और स्वाद लाना चाहते हैं, तो एक चम्मच धनिया पाउडर डाल लें। दाल पक जाए, तो ऊपर से धनिया पत्ता और हरी मिर्च बारीक-बारीक काट कर मिला लें। लुची के साथ खाने वाली चने की मीठी दाल तैयार है।

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मीठी दाल

मिष्टी दोई

मिष्टी दोई यानी मीठी दही जमाने का तरीका भी वही है, जो सामान्य दही बनाने का है। इसमें अंतर सिर्फ यह होता है कि यह दही मीठी होती है। इसके लिए एक नॉनस्टिक पैन को गरम करें और उसमें दो-तीन चम्मच चीनी डाल कर पिघलाएं। जब चीनी का रंग भूरा हो जाए तो आंच बंद कर दें और पिघली हुई चीनी को चलाते हुए ठंडा करें। इस तरह ठंडा होने के बाद कैरेमल तैयार हो जाएगा। अब उस कैरेमल को एक खरल में कूट कर चूर्ण बना लें। ध्यान रहे कि दूध के मुताबिक चीनी की मात्रा रखें। एक लीटर दूध में चार से पांच चम्मच चीनी पर्याप्त होती है। अगर दही को अधिक मीठा बनाना चाहते हैं तो चीनी की मात्रा बढ़ा सकते हैं।

गुनगुना दूध लें। उसमें कूटे हुए कैरेमल को मिला दें। इस तरह दूध का रंग बादामी हो जाएगा। अब उसमें एक चम्मच दही डाल कर जमने रख दें। अगर दही को गाढ़ा बनाना है तो उसे मिट्टी के बर्तन में जमाना अच्छा रहता है। इस तरह छुट्टी वाले दिन बंगाली नाश्ते का आनंद लें और घर आए मेहमानों को भी खिलाएं।

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मिष्टी दोई