हरीश निगम
कविता
गौरैया
आ तू भी
खा ले गौरैया।
चुग ले सारा दाना दाना
लेकिन छोड़ नहीं घर जाना
बस थोड़ा सा
गा ले गौरैया।
फुदक फुदक कुछ चूं चूं चींचू
मैं तेरी तस्वीरें खींचूं
छत खिड़की आले गौरैया।
पिंजरे के तोते से बोलो
दादी के कमरे में हो लो
आशीषें पा ले गौरैया।
इतना नहीं और तुम सोचो
खामोशी के जाले पोंछो
बात नहीं टालो गौरैया।

शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
बलि/बली
देवताओं के सम्मान में पशु या किसी अन्य चीज की कुर्बानी को बलि कहते हैं। शरीर से ताकतवर दिखने वाला व्यक्ति बली यानी बलवान होता है।
महक / मोहक
फूलों से या किसी अन्य पदार्थ से आने वाली खुशबू को महक कहते हैं। किसी चीज का दिल को भाना। अगर हम किसी चीज के प्रति आकर्षित होते हैं तो उसे मोहक कहते हैं।

