परीक्षा का नाम सुनते ही बच्चों में डर, तनाव, घबराहट, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं उभर आती हैं। जब भी पढ़ने बैठेंगे तब नींद आएगी। जो भी पढ़ रहे हैं, उसे भूल जाएंगे। कई बार ऐसा भी होता है कि वे दूसरी किताबें पढ़ने में तो रुचि रखते हैं, लेकिन पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबें पढ़ने में उन्हें कोई रुचि नहीं होती। परीक्षा एक भूत के समान विद्यार्थियों के सामने आती है। विद्यार्थियों को परीक्षा का डर इतना सताता है कि कई बार उन्हें बुखार आ जाता है। चिकित्सीय भाषा में इस परेशानी को एग्जाम फीवर यानी परीक्षा का बुखार कहते हैं। एग्जाम के डर से आने वाले इस बुखार को कैसे भगाएं? यह बुखार न आए उसके लिए पहले से क्या तैयारी करें?
परीक्षा के बुखार से बचने के उपाय
परीक्षा से पहले करें तैयारी: कहते हैं टेंशन है क्योंकि अटेंशन नहीं है। यही टेंशन परीक्षा के समय विद्यार्थी झेलते हैं। साल भर वे परीक्षा की पढ़ाई नहीं करते। और जब परीक्षा के कुछ दिन बच जाते हैं तो घबराने लगते हैं। तनाव बढ़ने लगता है। इन परेशानियों से बचने का एक ही उपाय है कि आप परीक्षा आने के एक महीने पहले ही तैयारी शुरू कर दें।
टाइम टेबल बनाएं: परीक्षा से पहले की तैयारी में आप अपना एक टाइम टेबल बनाएं, जिसके तहत आप रोजाना खुद से पढ़ाई करें। ताकि परीक्षा के समय आपके पास पर्याप्त समय हो रिवीजन करने का।
पढ़े हुए को दोबारा पढ़ें: परीक्षा से संबंधित जिस भी विषय को आपने एक दिन में पढ़ा है, उसे परीक्षा से पहले एक बार और पढ़ लें। मतलब अगर आपने किसी विषय का कोई एक अध्याय खत्म किया है, तो अध्याय समाप्त होने के बाद थोड़े समय के बाद दोबारा उसे पढ़ें। ताकि जो भी पढ़ा हुआ है उसे आप भूलें नहीं।
एहतियात: ‘काक चेष्टा, बको ध्यानं, श्वान निंद्रा तथैव च अल्पाहारी, सदाचारी विद्यार्थीन लक्षणं।’ संस्कृत का यह श्लोक विद्यार्थी जीवन का मूलमंत्र है। अगर छात्र इस श्लोक को अपने जीवन में उतार लें तो विफलता पास भी नहीं आएगी। अगर आपको परीक्षा का बुखार चढ़ गया है, तो उसे उतारने के निम्न तरीके हो सकते हैं।
उद्देश्य: अगर आपके सामने आपका उद्देश्य स्पष्ट है, तो आप परीक्षा के बुखार से कभी ग्रसित नहीं होंगे। क्योंकि हर विद्यार्थी की क्षमता अलग होती है और सभी के उद्देश्य भिन्न। इसलिए यह जरूरी नहीं कि हर विद्यार्थी चाहे कि वह प्रथम स्थान प्राप्त करे। किसी को सामान्य श्रेणी में रहना है तो किसी को प्रथम। इसलिए आप उद्देश्य को स्पष्ट रखें, ताकि आपको यह बुखार झेलना न पड़े।
योजना बनाएं : विद्यार्थी के लिए एक-एक मिनट अमूल्य होता है। इसलिए उसे अपने समय को बर्बाद नहीं करना चाहिए। हमें किस समय पढ़ना है, क्या पढ़ना है, खाने-पीने, खेलने और व्यायाम का क्या समय होगा, यह भी सब सुनिश्चि कर लें। इन सब दैनिक कार्यों की अगर आप योजना बना लेते हैं तो आपको पढ़ाई बोझ नहीं लगेगी।
सकारात्मक सोचें: कहते हैं, अगर आप खुद को लेकर अधिक नकारात्मक सोचते हैं तो आप में नकारात्मकता अधिक बढ़ती चली जाती है। इसलिए परीक्षा के समय पर जितना हो सके उतना सकारात्मक सोचें। खुद को हतोत्साहित न करें। अगर आपने एक दिन में दो अध्याय भी खत्म किए हैं, तो उस पर खुद को शाबाशी दें। इस तरह आप परीक्षा के बुखार से दूर रह पाएंगे।
अभ्यास : अभ्यास करने से ही सफलता मिलती है। इसलिए निरंतर अभ्यास करते रहें। अभ्यास हमेशा करना चाहिए। बेशक आपको एक बार में पूरी सफलता न मिले, पर थोड़ी तो मिलेगी। अगली बार उससे अधिक मिलेगी। अभ्यास से ही विद्यार्थी सफल हो सकते हैं।
खानपान: परीक्षा के समय में छात्रों को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसलिए अभिभावकों को बच्चे के खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्हें हल्का खाना समय-समय पर देते रहें।

