दिमागी कसरत
मेरी प्यारी-प्यारी दोस्त।
नटखट, राजदुलारी दोस्त।
चॉकलेट सी मीठी-मीठी,
चंदा जैसी न्यारी दोस्त।
नहीं रूठने देती मुझको,
रखती सब तैयारी दोस्त।
सस्ते में खुशियां ले आती,
है ऐसी व्यापारी दोस्त।
एक अकेली दस से बढ़के,
सपनों की अलमारी दोस्त।
जूही-चंपा क्या-क्या बोलूं,
सजी-धजी फुलवारी दोस्त।
उठा उसे घर ले तो आऊं,
लेकिन थोड़ी भारी दोस्त।
मेरी प्यारी प्यारी दोस्त
शब्द-भेद
(1)
पांच अक्षर का मेरा नाम
उल्टा सीधा एक समान
सबकी जुबां पर रहती हूं
दिल की बातें कहती हूं
(2)
कौन है ऐसा
वह शैतान
नाक पर बैठे
पकड़े कान
(3)
वह कौन-सी गोली है, जो लोहे से बनी है, पर खाने से शरीर को ताकत मिलती है?
(4)
नीचे दिया गया चित्र किसका है, पहचानिए और बताइए।
1- मलयालम, 2- चश्मा, 3- आयरन की गोली, 4- खान अब्दुल गफ्फार खान
कुछ शब्द बोलने में एक जैसे जान पड़ते हैं, इसलिए उन्हें लिखते समय अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। ऐसी गड़बड़ी से बचने के लिए आइए उनके अर्थ समझते हुए उनका अंतर समझते हैं।
दोनों अरबी के शब्द हैं। सुबह यानी सवेरे का समय, जब सूरज निकलता है।
जबकि
किसी व्याक्ति या बात पर संदेह हो, शक हो तो वह शुबह कहलाता है।
सदा / सादा
अरबी में सदा आवाज देने, पुकार लगाने को कहते हैं जबकि हिंदी में इसका अर्थ हमेशा होता है।
सादा फारसी का शब्द है, जिसका अर्थ सफेद, बिना किसी सजावट का, सामान्य होता है।
