बिल्लो रानी
बिल्लो रानी फिर गुस्सा हैं
गुस्सा गुस्सा
नाक प गुस्सा
जब देखो
हर बात प गुस्सा
इतना गुस्सा क्यों आता है
इतना गुस्सा क्यों भाता है
गुस्से से बाहर आ देखो
दुनिया कितनी
सुंदर है
रंग-बिरंगे फूल खिले हैं
तितली रानी नाच रही हैं
भौरे कैसे भटक रहे हैं
खुशबू फैली दिग दिगंत है
चूं चूं ची ची चिड़िया रानी
इस डाली से उस डाली
तक मटक रही है
नदियां किस जल्दी में हैं
कितना सारा पानी लेकर
कल कल करती भाग रही हैं
जानें कहां उन्हें जाना है
गुस्सा छोड़ो
जल्दी आओ
चल कागज की नाव बनाएं
चल नदियों का साथ निभाएं
दूर बहुत इनको जाना है
आओ आओ
जल्दी आओ
बिल्लो रानी
बिल्लो रानी।
स्कूल खुले
आशा शर्मा
ठंडी रबड़ी बर्फ मलाई
आइसक्रीम मजे से खाई
सूरज चाचू भी मुस्काए
जब गरमी की वाट लगाई
आंखमिचौली, छुपमछुपाई
कैरम, लूडो, आइ-स्पाई
धमा-चौकड़ी, सैर-सपाटा
हुल्लड़-मस्ती हाथापाई
डेढ़ महीने मौज मनाई
गया जून आ गई जुलाई
कॉपी-पेन, किताबें ले लो
स्कूल खुले अब करो पढ़ाई
बैग खरीदा, ड्रेस सिलाई
जूते-मोजे, बोतल टाई
बेल्ट बांध स्कूल चले तो
फूट पड़ी नादान रुलाई।

