कविता

फहीम अहमद

मिस्टर बड़बड़

इनसे मिलिए अजब अनूठे
ये हैं मिस्टर बड़बड़!

चलती है जबान इनकी ज्यों
चलती कोई चक्की।
बिन बोले रह ही ना पाते
लगते पूरे झक्की।

गरजा करते शाम-सवेरे
जैसे बादल गड़गड़।

बातें करते हैं चिल्ला कर
शब्द-शब्द में खटपट।
बातों की पतंग पहुंचाते
दूर गगन तक झटपट।

भोपूं जैसे बजते रहते
करें कान में गड़बड़।

नमक मिर्च वे खूब लगा कर
बातें करते पूरी।
पिंड छुड़ाना होता मुश्किल
सुनना है मजबूरी।

जो भी इनकी बात सुने ना
उससे जाते लड़ लड़।

शब्द-भेद

कुछ शब्द बोलने में एक जैसे जान पड़ते हैं, इसलिए उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ समझते हुए उनका अंतर समझते हैं।

शैया / सैंया

सोने वाले बिस्तर को शैया कहते हैं, जबकि सैंया पति को कहते हैं। जैसे कहावत है कि सैंया भए कोतवाल…

भीख / बीख

भीख यानी भिक्षा। भीख मांगना। जैसे कहते हैं कि भीख मांगना पाप है। जबकि बीख कदम उठाने या डग भरने को कहते हैं।