झूठ मुंहजोर

झूठ मुंहजोर
बस उसी का शोर
सच बगलें झांकता कि
बगल की गली में मकान उसका
जिसे घर बनना है अभी।
जिस संविदा कर्मी से चल रही बात
दस किलोमीटर दूर स्कूल में वह
अपने नियमित होने के इंतजार में,
उसके और मकान के घर होने में गहरा संबंध
कि मकान की उसारी में खांसते बेदम पिता
सूखी खांसी हिला देती पूरा जिस्म
कभी-कभी मकान भी हिल जाता।

आफतें कहां सूखी खांसी की तरह होती हैं
आती हैं तो गीली-लबाद
बल के जोर से गम में डूबी।
सूखी खांसी को ही क्या
स्थिति तनावपूर्ण पर नियंत्रण में कहते हैं?

वैसे जोरों-झूठ में भागना ही हमारी नियति
प्रारब्ध में ही बदा है भाई, बगले झांकना,
झांकती हैं कुछ आंखें उसके मकान में
जब निकलती है बहन उसकी, हालांकि उसे
झांकना नहीं घूरना कहते हैं।

बहन मकान में अक्सर बंद
जिसका नहीं कोई शोर
बस झूठ का जोर, शोर भी उसी का
सच बगलें झांकता कि
बगल की गली में मकान उसका
जिसे घर बनना है अभी।

दूर की कौड़ी

बहुत दूर की कौड़ी लाया वह
इतने दूर की कि
कौड़ियां चलती थीं जिस युग में
वह बस चंद कदमों की दूरी पर रहा।

बरसों लग गए
वहां से यहां तक आने में
पर इसकी गति (मति) तो देखो
कितनी हड़बड़ी में
जल्दी कितने पहुंच गया
तमाम, पैरों तले दबाते।

आंख

सबसे परदर्शी है यह
दुष्टता मन में बाद में आती है
आंखों से झांकती है पहले
प्रेमी की जान में जान आने से पेश्तर
माशूका की आंखों में हलराता है
विश्वास-आशा का समंदर

खुशी गुस्सा नाराजी भलमनसाहत
आते हैं बाद में
आंखों से जाहिर पहले हो जाते

कसाई से पूछो
कितनी देर तक, दूर तक
वजू के बावजूद
बकरे की आंख पीछा करती है

आंखों में खोट पहले आ गया
ना तो उसने बाद में कहा। ०