दिविक रमेश की कविता
तुम रूठी हो चेरी बोलो
क्या लेकर मानोगी तुम!
हम तो प्यार बहुत करते हैं
जाने कब जानोगी तुम!
नहीं बताऊंगी नानू मैं
लेकर कंप्यूटर मानूंगी।
सोचो जरा दिमाग लगा कर
क्या लेकर मैं मानूंगी!
अगर बताया तो समझूंगी
आप बड़े हीरो हो नानू!
हार गए तो सच कहती हूं
शेम शेम कर दूंगी नानू।
नानू झटपट लगे सोचने
क्या लेकर मानेगी चेरी!
नहीं समझ पाया तो सच्ची
मूर्ख मुझे समझेगी चेरी।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
पुरा/पूरा
किसी प्राचीन वस्तु, घटना आदि को पुरा कहते हैं। इसी से पुराना, पुरानी शब्द बने हैं। जबकि पूरा का अर्थ है संपूर्ण, कुल। जैसे मैंने पूरा खाना खा लिया।
महावट / महावत
माघ के महीने यानी जनवरी में जब बारिश की झड़ी लगती है, तो उसे महावट कहते हैं। जबकि महावत का अर्थ होता है हाथी को चलाने वाला, उसकी देखभाल करने वाला।
