रावेंद्रकुमार रवि
ताऊ की गोदी में चढ़ कर मेला जाएंगे!
मेले से हम खूब खिलौने लेकर आएंगे!
चाट-जलेबी-पापड़-डोसा-गुझिया खाएंगे!
आइसक्रीम-कुरारी भुजिया चट कर जाएंगे!
गप्प-गप्प करके रसगुल्ले चार उड़ाएंगे!
ताऊ की गोदी में चढ़ कर मेला जाएंगे!
सभी तरह के झूलों में हम चक्कर खाएंगे!
ऊपर-नीचे होने वाली नाव चलाएंगे!
फिर बैठेंगे मिनी ट्रेन में मौज मनाएंगे!
ताऊ की गोदी में चढ़ कर मेला जाएंगे!
गुब्बारे पर बैठा बंदर खूब नचाएंगे!
ठुमक-ठुमक कर चलने वाला घोड़ा लाएंगे!
कंधे पर बंदूक लाद कर रौब जमाएंगे!
ताऊ की गोदी में चढ़ कर मेला जाएंगे!
चुन्नी-कंगन-बिंदी-गुड़िया-भोंपू लाएंगे!
रंग-रंगीली फिरकी लाकर उसे उड़ाएंगे!
मन करता है मेले में ही हम रह जाएंगे!
ताऊ की गोदी में चढ़ कर मेला जाएंगे!
(1)
बालों से है इसका नाता
उलझे बाल यही सुलझाता
गंजों के यह काम न आता
ज्ञानी वही जो नाम बताता।
(2)
दो पंक्ति में साथ खड़ी हैं
पास-पास पर दूर बड़ी हैं
कभी न मिलते इनके छोर
पर रेल है जाती छुक-छुक दौड़।
(3)
काला मुंह लाल शरीर
कागज को वह खाता
रोज शाम को पेट फाड़ कर
कोई उन्हें ले जाता!
नीचे दिया गया चित्र किसका है, पहचानिए और बताइए।
चार भुजाओं वाला ऐसा क्षेत्र जिसके चारों कोण समकोण हों और आमने-सामने की भुजाएं समान हों, आयत कहलाता है। इसके अलावा इस्लाम के पवित्र धर्म ग्रंथ कुरान में लिखी बातों को भी आयत कहा जाता है।
कुछ शब्द बोलने में एक जैसे जान पड़ते हैं, मगर प्रयोग के अनुसार उनका अर्थ अक्सर बदल जाता है। ऐसी गड़बड़ी से बचने के लिए आइए उनके अर्थ समझते हुए उनका अंतर समझते हैं।
