जितेश कुमार
सर्दी की शहजादी
धुंध कोहरे ने फैला दी
जैसे हो कश्मीरी वादी
उड़ती पंख हवा के लेकर
आई सर्दी की शहजादी
बूंद ओस की टप-टप-टप-टप
ज्यों धरती ने गाना गा दी
ठिठकी सबकी बोली ऐसी
जैसी बोले बुढ़िया दादी
स्वेटर, जैकेट, रुई, रजाई
सुंदर टोपी और सजा दी
दुल्हन बनकर आई सर्दी
गुड़, गजक की डिब्बा लादी
बच्चों में भी खुशियां आई
जो हंसने की है आदी
छुट्टी, क्रिसमस, नया साल भी
लाई सर्दी की शहजादी
कोहरे की चादर
सर्दी रानी आई ओढ़े
कोहरे की चादर
यह चादर है धुआं जैसा
जिसमें सब थर-थर
हवा बरफ सी मचली आई
जो चुभती धड़-धड़
दुबका है सब घर के अंदर
निकलें कैसे बाहर
चिड़ियों की चीं-चीं गायब
पौधे भी हैं गए अकड़
ठिठुरी ठानी, सर्दी रानी
इससे सब जाता डर-डर
सर्दी रानी ओढ़े चादर
घूम रही है गांव-शहर
धूप हो गई बूढ़ी अम्मा
लेटी है अपने बिस्तर
