गुणकारी चने की दाल

दाल वड़ा बनाने के लिए चने की दाल उपयुक्त होती है। चना स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत गुणकारी दाल है। चने मधुर, ठंडे, स्वास्थ्यवर्धक, रुचिकर, और शक्तिवर्धक होते हैं। चने शरीर में कोलेस्ट्रॉल को जमने नहीं देते। काले चने के सेवन से कमर और फेफड़ों को बल मिलता है। इसमें विटामिन ‘सी’ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। चने के सेवन से मधुमेह, जलोदर, हृदय रोग, रक्त विकार, उल्टी, कुष्टरोग, जुकाम, मूत्र में शर्करा, पीलिया आदि परेशानियों को रोकने में मदद मिलती है। चना अकेला ऐसा अन्न है, जिससे हर तरह का भोजन तैयार किया जा सकता है- रोटी से लेकर दाल, चटनी, सब्जी, मिठाई तक। कहते हैं, एक शाहजादे को उसके पिता ने किले में कैद करा दिया और कहा कि तुम्हें खाने को केवल एक अन्न मिलेगा। अपनी मर्जी से चुन लो क्या खाना पसंद करोगे। तब उसने सिर्फ चने को चुना था। चने को भून कर, भिगो कर, उबाल, तल, पीस-कूट कर, नमकीन या मीठे के साथ, जैसे मर्जी खाया जा सकता है।

वड़ा बनाने की विधि

दाल वड़ा बनाने के लिए चने की दाल को चार-पांच घंटे के लिए भिगो दें। अनुमान लगा लें कि कितने लोगों के लिए वड़े बनाने हैं, उसी अनुपात में दाल लें। दाल वड़े में डालने के लिए एक औसत आकार का प्याज बारीक काट लें। लहसुन की तीन-चार कलियां, हरा धनिया, अदरक, हरी मिर्चें और कुछ कढ़ी पत्ते भी बारीक काट कर एक तरफ रख लें। भीगी हुई दाल को दरदरा पीस लें। दाल के कुछ दाने साबुत रह जाएं, तो रहने दें। इसे सिल पर पीस या इमाम दस्ते में कूट लेना बेहतर होता है। अब इसमें बारीक कटा प्याज, लहसुन, हरा धनिया, अदरक, मिर्च, कढ़ी पत्ता मिला लें। इसमें कुछ साबुत जीरा, सौंफ के कुछ दाने, हींग पाउडर, थोड़ा-सा लाल मिर्च पाउडर, थोड़ा-सा सब्जी मसाला और जरूरत भर का नमक मिला कर ठीक से फेंट लें। फेंटने से पेस्ट जितना हल्का होगा, वड़े उतने ही नरम और स्वादिष्ट बनेंगे। अब कड़ाही में तेल गरम करें। हाथ में पानी लगा कर दाल के पेस्ट के छोटे-छोटे गोले बनाएं और दूसरे हाथ से हल्का दबा कर उन्हें चपटा करते हुए गरम तेल में डालते जाएं। मध्यम आंच पर तब तक तलें, जब तक कि उनका रंग सुनहरा न हो जाए।
पकौड़े तैयार हैं। इन पर चाट मसाला छिड़कें और नारियल की चटनी के साथ परोसें। बरसात और सर्दी के मौसम में चाय के साथ इन पकौड़ों का आनंद ही अलग होता है।

ठंडी तासीर का नारियल

नारियल की तासीर ठंडी होती है। सुंदरता बढ़ाने और पित्तजन्य विकारों के निदान में नारियल विशेष रूप से लाभकारी है। नारियल क्रोहन्स डिजीज के इलाज के लिए एक रामवाण औषधि है। इस बीमारी में रोगी की आंतों में जलन, डायरिया, मल में रक्त आना, वजन कम होना आदि लक्षण होते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार क्रोहन्स डिजीज के उपचार में प्रयोग किए जाने वाले कॉर्टिकोस्टेराइड्स के समकक्ष नारियल में फाइटोस्टेराल्स नामक समूह तत्त्व होता है, जो क्रोहन्स डिजीज में मुकाबला करता है। नारियल हमें मोटापे से भी बचाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क के भोजन में प्रतिदिन पंद्रह मिलीग्राम जिंक होना जरूरी है, जिससे मोटापे से बचा जा सके। ताजा नारियल में जिंक भरपूर मात्रा में होता है।
जब नारियल में इतने गुण हैं, तो इसकी चटनी खाना न सिर्फ स्वाद के लिए, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गुणकारी है।

चटनी बनाने की विधि

नारियल की चटनी बनाने के लिए एक कच्ची गरी का नारियल लें। उसके ऊपर काले गोल निशान में चाकू से छेद करके पानी निकाल लें। पानी अलग रख दें। नारियल को तोड़ कर उसकी गरी निकाल लें। अब चटनी बनाने के लिए कुछ जरूरी चीजें तैयार करें-
गरम तवे पर पचास ग्राम कच्ची मूंगफली के दाने भून लें। अगर मूंगफली पहले से भुनी हुई है, तो उसके दाने निकाल कर रगड़ कर छिलके उतार लें।
भुने चने की बिना छिलके वाली दाल भी बराबर मात्रा में लें। ऐसी दाल दुकानों पर आसानी से मिल जाती है।
अब लहसुन की तीन-चार कलियां, दो-तीन हरी मिर्चें, छह से आठ कढ़ी पत्ते, चुटकी भर साबुत जीरा, उतना ही साबुत सूखा धनिया लें।
ग्राइंडर में कच्चे नारियल की गरी के टुकड़े डालें और उसमें भुनी मूंगफली, चना दाल, लहसुन, मिर्च, कढ़ी पत्ता, साबुत जीरा, धनिया और जरूरत भर का नमक डाल कर ऊपर से नारियल तोड़ने से पहले निकले नारियल का पानी मिला लें। आधा कप पानी और डाल लें और इन सबको अच्छी तरह पीस लें।
चटनी तैयार है। इसे एक बर्तन में निकालें। अब एक कलछी या तड़का लगाने के लिए जिस भी बर्तन का उपयोग करते हों, उसमें एक चम्मच सरसों तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए तो उसमें आधा चम्मच साबुत छोटी सरसों, आठ-दस कढ़ी पत्ते और दो-तीन साबुत लाल मिर्चें डाल कर तड़का लें। इस तड़के को चटनी के ऊपर डालें और खाने के लिए परोसें।
अब देखिए, इस चटनी में कितनी चीजें हैं, फाइवर से लेकर प्रोटीन तक। इस चटनी को दाल वड़े के अलावा, इडली, डोसा या फिर वैसे ही ब्रेड पर फैला कर खाएं, देखें क्या स्वाद आता है।